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'आखिरी सांस तक मैं उन्हें इस बात के लिए...', Virender Sehwag को लेकर पूर्व खिलाड़ी ने बताया बड़ा सच

Manoj Tiwary On Virender Sehwag: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी मनोज तिवारी ने हाल ही में वीरेंद्र सहवाग को लेकर बड़ा खुलासा किया है। मनोज तिवारी ने 12 वनडे और 3 टी-20 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जबकि उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। अपने छठे वनडे मैच में मनोज तिवारी ने दिसंबर 2011 में चेन्नई में वेस्टइंडीज के खिलाफ धमाकेदार शतक जड़ने का काम किया था।

मनोज तिवारी ने खोला बड़ा राज (Manoj Tiwary On Virender Sehwag)

चेन्नई में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी यादगार पारी को याद करते हुए मनोज तिवारी ने बड़ा खुलासा किया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने एकमात्र शतक के लिए मनोज तिवारी ने वीरेंद्र सहवाग का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने बताया कि अगर वीरेंद्र सहवाग नहीं होते तो फिर उनका ये शतक भी नहीं होता। दरअसल, जिस मुकाबले में मनोज तिवारी ने शतक जड़ा था, उस मैच में वीरेंद्र सहवाग ने खुद को प्लेइंग इलेवन से बाहर किया था।

Manoj Tiwary 1

शतक जड़ने के बावजूद टीम से हुए बाहर

वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच जिताने वाली नाबाद 104 रन की पारी खेलने के बावजूद मनोज तिवारी भारत के लिए अधिक मैच नहीं खेल सके। मनोज तिवारी ने द लल्लनटॉप से बात करते हुए कहा कि शतक जड़ने के बावजूद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और अगले 14 मैचों में वह नहीं खेल पाए। मनोज तिवारी ने खुलकर कहा कि भारतीय टीम में हमेशा कप्तानों की चली है, जो खिलाड़ी कप्तान को पसंद होता वही टीम में शामिल किया जाता है।

सहवाग को बताया अपना आदर्श

चेन्नई वनडे से ठीक पहले सहवाग ने इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 219 रन की पारी खेली थी। हालांकि, उन्होंने तिवारी को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने का रास्ता साफ करने के लिए अगले मैच में खुद को बाहर करने का फैसला किया। तिवारी ने कहा कि सहवाग मेरे आदर्श हैं। मैं अपनी आखिरी सांस तक उनका ऋणी रहूंगा। क्योंकि अगर वह खुद को बाहर नहीं करते तो मेरी जिंदगी अलग होती।

तिवारी ने आगे कहा कि जब वीरेंद्र सहवाग गौतम गंभीर और मेरे बीच अच्छे संबंध थे और मैं 7 साल तक टीम का हिस्सा था। इस दौरान वीरू भाई ने देखा कि मुझे मौके नहीं मिल रहे हैं या मुझे ऊपर-नीचे किया जा रहा है। कभी-कभी मुझे अचानक ओपनिंग करने के लिए कहा जाता था फिर 5वें नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए उन्होंने देखा कि मेरे साथ न्याय नहीं हुआ। ऐसे में उन्होंने मेरा साथ दिया और मुझे नंबर चार पर खेलने का मौका दिया।

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