Jasprit Bumrah टेस्ट मैच में धीमी बॉलिंग के लिए भी थे तैयार, कोच की नसीहत से तुरंत बदल गई सोच
Jasprit Bumrah Fitness: तब जसप्रीत बुमराह ने टेस्ट मैच में जानबूझकर धीमी गति से गेंदबाजी करने का फैसला किया था लेकिन कोच ने ऐसी बात कही कि गेंदबाजी की सोच में तुरंत बदलाव आ गया।

भारत के जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) इस समय उपलब्ध नहीं हैं। हद तब हो गई जब साल की शुरुआत में श्रीलंका के खिलाफ वापसी करते दिख रहे बुमराह उसके बाद हर सीरीज से बाहर होने लगे। बड़ी उम्मीद थी कि वे बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के लिए कम से कम उपलब्ध रहेंगे फिर भले ही टीम मैनेजमेंट उनको एक दो मैच ही खिलाए लेकिन ना तो पहले दो टेस्ट मैच की टीम में उनका नाम दिखा और ना ही अंतिम दो मुकाबलों में बुमराह ने खुद को उपलब्ध कराया। तब यह माना जा रहा था कि टेस्ट मैचों का वर्कलोड इतना ज्यादा होता है कि वापसी कर रहे तेज गेंदबाजी के लिए इन हालातों में खेलना आसान नहीं होगा।

एक ऐसी कहानी जिसके बारे में बहुतों ने नहीं सुना
लेकिन कमाल की बात ये है कि बुमराह इस टेस्ट सीरीज के बाद होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज से भी गायब हैं। साफ झलक रहा है कि तब श्रीलंका के खिलाफ बीसीसीआई ने कितना जल्दबाजी भरा फैसला किया था और अब बोर्ड कुछ ज्यादा ही फूंक करकर कदम रख रहा है। सवाल बुमराह पर भी उठते हैं कि वे खुद को कैसा महसूस करा रहे हैं। हो सकता है वे गेंदबाजी करने में पूरी तरह से सक्षम हों लेकिन ना तो वनडे में और ना ही टेस्ट मैचो में उनकी फिटनेस उनको खेलने की इजाजत दे रही है। शायद उनका मौजूदा कंफर्ट जोन टी20 क्रिकेट है और वे मुंबई इंडियंस के लिए दमखम लगाते हुए नजर आएंगे। इसी बीच एक ऐसी कहानी सामने आ रही है जब बुमराह ने सोचा कि वह अपने 100 प्रतिशत पर काम नहीं करेंगे। ये निश्चित तौर पर एक ऐसी कहानी है जिसके बारे में बहुतों ने नहीं सुना होगा।

जानबूझकर धीमी गेंदबाजी करने पर विचार किया
सिडनी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2019 के टेस्ट मैच के दौरान, बुमराह ने जानबूझकर धीमी गेंदबाजी करने पर विचार किया। ये कुछ ऐसा है जो शायद बुमराह अब भी कर सकते हैं लेकिन पीठ की चोट के दोबारा उभरने ने उनको शायद डरा दिया है। अगर ये चोट वापसी के बाद फिर से उभरी तो पूरे करियर के यहीं पर समाप्त होने का खतरा भी है। शायद ये सब शंकाए और चिंताए बुमराह के मन-मस्तिष्क में हैं और बीसीसीआई भी उनको भारत को बेस्ट पेसर मानता हैं जिसको वो किसी भी कीमत पर चोट के कारण खोना नहीं चाहता। लेकिन ये जो बुमराह ने टेस्ट मैच में धीमी स्पीड से बॉलिंग करने की बात कही थी ये शायद अब आगे कई बार देखने को मिलेगी। एक बार वे फिट होकर आते हैं तो टेस्ट क्रिकेट में कम से कम पूरा जोर नहीं लगाना चाहेंगे।

आर श्रीधर ने खुलासा किया
बुमराह पहले भी ऐसा कर चुके हैं जिसका आर श्रीधर ने खुलासा किया। भारत के पूर्व फील्डिंग कोच ने याद किया कि सिडनी की पिच बेहद सुस्त थी, जिसे देखते हुए बुमराह गेंदबाजी कोच भरत अरुण के पास पहुंचे और थोड़ा हिचकिचाते हुए बोले, 'सर विकेट बिल्कुल शांत है, और इसमें तेज गेंदबाजों के लिए कुछ भी नहीं है। मैं बहुत थका हुआ हूं, सर, शारीरिक रूप से थका हुआ और मानसिक रूप से थका हुआ। अगर मैं थोड़ी धीमी स्पीड से गेंदबाजी कर लूं और ये बिल्कुल सपाट बॉलिंग नहीं होगी बल्कि मैं अपनी और से बेहतर गेंदबाजी करता रहूंगा। बस स्पीड कम होगी।"

भरत अरुण के सामने गए बुमराह
श्रीधर के मुताबिक अरुण ने ध्यान से बुमराह की बात सुनी और दो विकल्प सामने रखे। पहला यही था जो बुमराह कह रहे थे कि बॉलिंग 130 kmph के आसपास रखो लेकिन तब बल्लेबाज उनको आसानी से खेल सकते थे और अगले मैच में बुमराह के खिलाफ वे मानसिक तौर पर कहीं अधिक भरोसे के साथ उतरते क्योंकि उनकी नहीं पता कि बुमराह अपनी क्षमता से कम पर बॉलिंग कर रहे हैं। उनको तो यही लगेगा कि वे बुमराह को खेल सकते हैं और कई मौकों पर यह दिमागी बढ़त भी खेल में निर्णायक बदलाव लाने में सक्षम होती है।

कोच की नसीहत से पूरी ताकत से बॉलिंग की
दूसरा विकल्प ये था कि बुमराह पूरी ताकत से छोटे स्पैल में गेंदबाजी करें। भले ही पिच पर कोई मदद ना हों लेकिन बल्लेबाजों के लिए बुमराह को खेलना भयभीत करने का विषय बन जाए। इसके बाद जब भी वे बल्लेबाज गेंदबाजी की थोड़ी सी भी मदद करने वाली पिचों पर खेलेंगे तो बुमराह का सामना करने में उनकी हवा टाइट रहेगी। बुमराह ने वैसा ही किया और उनको इसका फायदा भी मिला जहां विकेट भले ही दूसरे गेंदबाजों को मिले लेकिन दूसरी नई गेंद से बुमराह बहुत घातक थे वे गेंदबाजी के बाद फिर अरुण के पास आए और सही सलाह देने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया।
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