ना गेंद का ना बल्ले का, ये मामला है भावना का, आखिरी मैच में दरियादिल बनकर छा गए दीपक चाहर

हरारे, 23 अगस्त: जिम्बॉब्वे के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की सीरीज में दीपक चाहर पूरी तरह से छाए रहे। वे पहले मुकाबले में मैन ऑफ द मैच रहे तो दूसरे मुकाबले में उनको ना खेलने के लिए काफी चर्चा मिली। तीसरे मैच में दीपक चाहर एक बार फिर फैंस की नजरों में आ गए जब उन्होंने विपक्षी खिलाड़ी को पहली गेंद फेंकने से पहले ही मांकडिंग तरीके से आउट कर दिया था लेकिन अपील नहीं की। यह खिलाड़ी थे जिम्बॉब्वे के ओपनर इनोसेंट काइया। (कवर फोटो सौजन्य- ट्विटर/स्क्रीनशॉट)

 ये मामला है भावना का

ये मामला है भावना का

इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 289 रन बनाए थे जिसके जवाब में मुंबई की टीम बल्लेबाजी करने उतरी और पहला ओवर दीपक चाहर फेंक रहे थे। उन्होंने पहली गेंद की भी नहीं थी कि नॉन स्ट्राइक एंड पर खड़े इनोसेंट काइया पहले ही से दो कदम आगे निकल गए और दीपक चाहर ने इस मूवमेंट को भांपकर तुरंत गिल्लियों को उड़ा दिया। तकनीकी तौर पर बल्लेबाज साफ आउट था। टीवी रिप्ले ने भी इसकी पुष्टि कर दी थी। और दीपक को भी इस बात का पता था। लेकिन, उन्होंने एक झलक बल्लेबाज की ओर देखा और फिर बिना कुछ कहे वापस गेंद डालने के लिए निकल गए।

दरियादिल बनकर छा गए दीपक चाहर

दरियादिल बनकर छा गए दीपक चाहर

चाहर को अच्छे तरीके से इस बात का पता था लेकिन उन्होंने खेल भावना का परिचय दिया। फैंस ने इस बात की काफी तारीफ की है। हालांकि इनोसेंट भी जीवनदान का फायदा नहीं उठा सके और 6 रनों के स्कोर पर दीपक चाहर की गेंद पर ही आउट हो गए।

जब तीन 3 साल पहले अश्विन ने आईपीएल में ऐसा किया था और एक बहुत बड़ा विवाद ले लिया था, तब से ही मांकडिंग की चर्चा जोरों पर है।

दीपक की खेल भावना ने बल्लेबाज को बचा लिया

दीपक की खेल भावना ने बल्लेबाज को बचा लिया

फिलहाल दीपक की खेल भावना ने बल्लेबाज को बचा लिया लेकिन 1 अक्टूबर से क्रिकेट के कुछ और नियम लागू हो जाएंगे जहां पर अंपायर को मांकडिंग की स्थिति में बल्लेबाज को आउट देना ही होगा। यानी उस स्थिति में दीपक चाहर के बाद बिना अपील करें भी इनोसेंट बच नहीं पाते। जबकि आज स्थिति यह है कि गेंदबाज जब अपील करता है तो ही मांकडिंग में अंपायर बल्लेबाज को आउट करार दे सकता है।

यहां देखें वीडियो-

अगर मुकाबले की बात करें तो चाहर गेंदबाजी में काफी महंगे साबित हुए और 10 ओवर में 75 रन देकर दो विकेट लिए। जिंबाब्वे की टीम ने इस मैच को सीरीज में सबसे बेहतरीन तरीके से खेलते हुए 276 रन की लाजवाब पारी खेली। सिकंदर रजा ने 95 गेंदों पर 115 रनों का योगदान दिया। यह मैच जीतने के साथ भारत ने 3-0 से सीरीज जीत ली है।

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