IND vs BAN: मैनेजमेंट कभी ये नहीं बताने वाला ऋषभ पंत को कैसे खेलना है, बॉलिंग कोच ने बताया कारण
ऋषभ पंत का अपना जो आक्रामक अंदाज है उसके साथ टीम मैनेजमेंट भारत-बांग्लादेश टेस्ट सीरीज में भी छेड़छाड़ नहीं करने वाला है। पंत सफेद गेंद क्रिकेट में खास प्रभावी नहीं रहे हैं ऐसे में टेस्ट फॉर्मेट में काफी उम्मीदें हैं।

भले ही ऋषभ पंत कितने ही उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजर रहे हों लेकिन टीम मैनेजमेंट उनको ये सलाह नहीं देगा कि उन्हें कैसे खेलना है। पंत का एक नेचुरल आक्रामक अंदाज है और वे अपने रोल व उम्मीदों को बेहतर तरीके से जानते हैं। ऐसा बॉलिंग कोच पारस महाम्ब्रे का कहना है। पंत अब सफेद गेंद क्रिकेट में मिली हालिया विफलता के बाद टेस्ट क्रिकेट में लौट रहे हैं। वो टेस्ट क्रिकेट जिसने उनको ऋषभ पंत के तौर पर देश-दुनिया में पहचान दी है। पंत के लिए टेस्ट में रन करना काफी आसान रहा है इसी वजह से वे 31 मैचों में 10 अर्धशतक और 5 शतक के साथ काफी बेहतर स्थिति में हैं।
पंत ने इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका की धरती पर शतक ठोके हुए हैं। निश्चित तौर पर उनको बताने की जरूरत नहीं की क्या करना है। टेस्ट मैचों में पंत खुद अपने स्वाभाविक अंदाज में रन पा लेते हैं। लेकिन लंबे समय से सफेद गेंद फॉर्मेट की विफलता का सामना करने के बाद पंत के लिए टेस्ट मैचों में क्या स्विच करना आसान होगा?

14 दिसंबर को शुरू हो रहे मुकाबले से पहले पंत नेट्स में जमकर बल्ला चलाते हुए देखा गया। इस दौरान बॉलिंग कोच पारस ने पंत के बारे में बात की। उन्होंने प्री-मैच कॉन्फ्रेंस में कहा, हमनें यहां पंत के साथ कोई स्पेशल बातचीत नहीं की है। ये उनका खेल है और हम ये जानते हैं। कुछ नहीं बदलता है, ये हर फॉर्मेट में ऐसे ही तैयारी करते हैं, और वे अपने रोल को लेकर काफी ज्यादा जागरूक हैं।
महाम्ब्रे ने पंत को उनके अंडर-19 दिनों से देखा है। उन्होंने कहा, हमारी बातचीत कभी पटरी से नहीं फिसली। वो जानते हैं टीम को उनसे क्या उम्मीदें हैं।
महाम्ब्रे ने फिलहाल ये नहीं बताया कि भारतीय टीम तीसरे स्पिनर या तीसरे पेसर के साथ जाएगी या नहीं लेकिन वे उमेश यादव से खुश नजर आए जिनके भारत के अटैक को लीड करने की उम्मीद की जा रही है। हालांकि बुमराह और शमी जैसे दो बड़े गेंदबाजों की गैरमौजूदगी को महसूस किया जाएगा।
भारतीय टीम ने लगातार चार महीने तक केवल सफेद गेंद फॉर्मेट में ही खेला है ऐसे में पारस का कहना है कि अब लाल गेंद क्रिकेट से जितना जल्दी हो सके उतना तालमेल ही सफलता की कुंजी है। इसके लिए मानसिक बदलाव की भी दरकार है।












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