IND vs AUS: कौन बनेगा उप कप्तान ? जब भारत के कप्तान को अगले टेस्ट में बना दिया था 12वां खिलाड़ी
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम दो टेस्ट मैचों में केएल राहुल उपकप्तान नहीं होंगे, इसका मतलब है कि उनको प्लेइंग इलेवन से भी बाहर किया जा सकता है।

IND vs AUS: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टेस्ट में अगर रोहित शर्मा किसी वजह से कुछ देर के लिए मैदान से बाहर जाते हैं तो कप्तानी कौन संभालेगा ? यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि तीसरे और चौथे टेस्ट के लिए घोषित टीम में उप कप्तान का पद खाली रखा गया है। इसके पहले तक केएल राहुल उपकप्तान थे। लेकिन खराब फॉर्म को देख कर उन्हें अब इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। हाल की कामयाबी के बाद बीसीसीआइ की नजर में रोहित शर्मा की अहमियत बढ़ गयी है। उनका कद बड़ा हो गया है। तभी तो रोहित को उपकप्तान तय करने का अधिकार मिला है।
कौन होगा उपकप्तान ?
रोहित शर्मा किसे उपकप्तान बना सकते हैं ? चूंकि विराट कोहली कप्तानी छोड़ चुके हैं इसलिए उन्हें अब किसी पद में कोई रुचि नहीं है। ऐसे में वरिष्ठ खिलाड़ियों की सूची में चेतेश्वर पुजारा, रविचंद्रन अश्विन और रवीन्द्र जडेजा ही बचते हैं जो नेतृत्व की क्षमता रखते हैं। दिल्ली में पुजारा ने सौवां टेस्ट खेला था। दूसरी पारी में उन्होंने नाबाद 31 रन बना कर भारत की जीत में अहम भूमिका निभायी थी। वे भारत के आठवें सबसे सफल बल्लेबाज हैं। यानी वे टीम को प्रेरित कर करते हैं। वैसे पुजारा बांग्लादेश- भारत टेस्ट श्रृंखला में केएल राहुल के उपकप्तान रह चुके हैं। इसके अलावा रविचंद्रन अश्विन भी अनुभवी और सफल खिलाड़ी हैं। सबसे तेज 450 टेस्ट विकेट लेने के मामले में वे दूसरे पायदान पर हैं। सिर्फ मुथैया मुरलीधरन ही उनसे आगे हैं। विश्व क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी का दबदबा है। उन्हें तेजदिमाग वाला क्रिकेटर माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा टेस्ट श्रृंखला में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से तहलका मचा रखा है। लेकिन अभी तक उन्हें टीम इंडिया में उपकप्तानी का मौका नहीं मिला है।
पुजारा, अश्विन और जडेजा में से कोई एक !
अश्विन के जोड़ीदार रवीन्द्र जडेजा टीम के तीसरे ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें उपकप्तान बनाया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जडेजा ने अभी तक शानदार प्रदर्शन किया है। दो टेस्ट मैचों में उन्होंने 17 विकेट लिये है। इसके अलावा बल्ले से 70 और 26 रनों का योगदान भी दिया है। जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में भारत की तरफ से सबसे तेज 2500 रन और 250 विकेट लिये हैं। इस मामले में इंग्लैंड के इयान बॉथम ही उनसे आगे हैं। जडेजा तीन खूबियों वाले ऑलराउंडर हैं। गेंद और बल्ले के अतिरिक्त वे फील्डिंग में भी लाजवाब प्रदर्शन करते हैं। वे विश्व के सर्वश्रेष्ठ फील्डरों में एक हैं। वे जोशीले खिलाड़ी हैं और उनमें प्रेरणादायी नेतृत्व की क्षमता है। रवीन्द्र जडेजा शिखर धवन की कप्तानी में टीम इंडिया के उप कप्तान रह चुके हैं।
हीरो से जीरो
टीम इंडिया में उप कप्तानी का मसला इसलिए खड़ा हुआ है क्यों कि केएल राहुल उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। कभी कभी किसी अच्छे खिलाड़ी के जीवन में ऐसा भी दौर आता है जब उसका प्रदर्शन खराब हो जाता है। ये केवल केएल राहुल की बात नहीं है। कुछ ऐसे भी मौके आये जब निराशा में डूबी भारतीय टीम के लिए कोई उपयुक्त कप्तान मिलना मुश्किल हो गया। तब मजबूरी में किसी रिटायर खिलाड़ी को कप्तान बनाना पड़ा था। 1974 का साल भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत निराशाजनक था। अजित वाडेकर की कप्तानी में जिस टीम ने 1971 में इंग्लैंड को हरा कर टेस्ट सीरीज जीतने का इतिहास रचा था वही टीम 1974 में आंख की किरकिरी बन गयी। 1974 के लॉर्ड्स टेस्ट में भारतीय टीम ने 42 रन पर ऑलआउट हो कर बड़ा ही शर्मनाक रिकॉर्ड बनाया था। तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में भारत का 0-3 से सफाया हो गया था। कप्तान अजीत वाडेकर बल्लेबाज के रूप में नाकाम रहे। वे नायक से खलनायक बन चुके थे।
हार के बाद कप्तान नायक से खलनायक
कहा जाता है कि 1974 में जब भारतीय टीम इंग्लैंड में 0-3 से हारी थी तब उसमें कलह और गुटबाजी बहुत थी। टीम सेलेक्शन में पक्षपात का भी आरोप लगा था। अजीत वाडेकर ने बल्लेबाज और कप्तान के रूप में बहुत निराश किया था। भारत के क्रिकेट प्रशंसक टीम के इस बदतर प्रदर्शन से बहुत आक्रोशित थे। जब भारतीय टीम इंग्लैंड से भारत आयी थी तब उन्होंने गुस्से का इजहार किया था। कुछ महीने के बाद जब घरेलू क्रिकेट सीजन शुरू हुआ तो अजीत वाडेकर को पश्चिम क्षेत्र की टीम से बाहर कर दिया गया। इससे आहत हो कर वाडेकर ने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी। अब भारतीय टीम के लिए एक नये कप्तान की तलाश शुरू हुई। उस समय टीम का मनोबल इतना गिरा हुआ था कि कोई वरिष्ठ खिलाड़ी कप्तान नहीं बनना चाहता था। वाडेकर की दुर्गति सबके सामने थी।
कौन बनेगा कप्तान ?
1974 की सर्दियों में वेस्टइंडीज की टीम भारत के दौरे पर आने वाली थी। वेस्टइंडीज की मजबूत टीम के सामने भारतीय टीम को हौसला देने वाला कप्तान चाहिए था। सुनील गावस्कर, गुंडप्पा विश्वनाथ, बिशन सिंह बेदी जैसे सफल खिलाड़ी टीम में मौजूद थे। लेकिन वे कप्तानी के लिए इच्छुक नहीं थे। तब बीसीसीआइ ने नवाब पटौदी को याद किया। नवाब पटौदी को 1971 में टीम की कप्तानी से हटा दिया गया था। वे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से दूर थे। 1974 के इंग्लैंड दौरे के लिए उन्हें टीम में भी नहीं चुना गया था। लेकिन मजबूरी में पटौदी को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैचों के लिए कप्तान बनाया गया। हद तो ये थी कि इसके बाद भी भारतीय टीम का कोई सदस्य कप्तानी के लिए राजी नहीं हुआ। नतीजन बाकी के तीन टेस्ट मैचों में भी पटौदी को ही कप्तान बना दिया गया।
ताश के पत्तों की तरह बदले कप्तान
पहले टेस्ट में भारत की 267 रनों से करारी हार हुई। फील्डिंग करते समय कप्तान पटौदी की उंगलियां घायल हो गयीं। इसकी वजह से वे दूसरे टेस्ट मैच से बाहर हो गये। सुनील गावस्कर को कप्तान बनाया गया। उस समय दो टेस्ट मैच के बीच एक अंतराल था। रणजी ट्राफी प्रतियोगिता चल रही थी। गावस्कर मुम्बई की टीम से रणजी खेलने चले गये। बदकिस्मती से इस मैच में वे गंभीर रूप से चोटिल हो गये। उनकी कलाई टूट गयी। तब विकेटकीपर फारुख इंजीनियर को अचानक कप्तान बनाना पड़ा। उस समय हालात इतने खराब थे कि किसी को पता ही नहीं था कि टीम की कप्तानी कौन करेगा।
चक्कर पे चक्कर
11 दिसम्बर 1974 को दिल्ली में दूसरा टेस्ट मैच शुरू हुआ। जब टॉस का वक्त आया तो भारतीय क्रिकेट प्रेमी हैरत से एक दूसरे का मुंह देखने लगे। क्लाइब लॉयड के साथ टॉस के लिए श्रीनिवास वैंटकराघवन आये हुए थे। लोग सोचने लगे ये क्या हुआ? बीसीसीआइ ने तो फारुख इंजीनियर को कप्तान बनाया था, टॉस के लिए वैंकटराघवन कैसे आ गये ? क्या रात भर में ही कप्तान फिर बदल दिया गया ? बहरहाल पटौदी, गावस्कर, इंजीनियर से होते हुए कप्तान की टोपी वैंकटराघवन के माथे पर सज गयी। भारतीय क्रिकेट कप्तान बनने की यह दुर्लभ और अनोखी घटना है। वैंकटराघवन की कप्तानी में भारत दिल्ली टेस्ट भी हार गया।
कप्तान को बना दिया 12वां खिलाड़ी
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कप्तानी के लिए सांप सीढ़ी का खेल यहीं नहीं रुका। तीसरे टेस्ट में पटौदी फिर कप्तान बन कर वापस आये। फिर तो बीसीसीआइ ने जो फैसला लिया उससे लोग हक्के बक्के रह गये। टीम सेलेक्शन में ऐसा ट्विस्ट आज तक नहीं देखा गया। दूसरे टेस्ट में जो कप्तान थे उन्हें तीसरे टेस्ट में 12वां खिलाड़ी बना दिया गया। तीसरा टेस्ट जब कोलकाता में शुरू हुआ तो वैंकटराघवन टीम के 12वें खिलाड़ी थे। तीसरे टेस्ट में भारत की 85 रनों से विजय हुई। चौथा टेस्ट भारत ने 100 रनों से जीता। पांचवां टेस्ट भारत 201 रनों से हार गया। भारत 2-3 से टेस्ट श्रृंखला हार गया लेकिन टीम के प्रदर्शन से देश के लोग बहुत खुश थे। दो टेस्ट हारने के बाद वेस्टइंडीज की मजबूत टीम को अगले दो टेस्ट में हराना एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। नवाब पटौदी को अचानक कप्तानी मिली थी लेकिन उन्होंने एक निराश टीम में जोश फूंक कर कायापलट दी थी। इसके बाद पटौदी ने क्रिकेट से खुद को दूर कर लिया।












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