धोनी के अंदाज को अपनाने में छुपा है हार्दिक की कामयाबी का राज, हीरो बने या जीरो, आगे बढ़ना है

मोहाली, 21 सितंबर: अगर टीम इंडिया अपनी घरेलू धरती पर 208 रनों के टोटल को लगाती है तो उम्मीद की जाएगी कि 10 में से 9 मौकों पर भारतीय टीम को जीत मिलेगी लेकिन हार का वह एक खास मौका तब आया जब भारत ने मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के सामने अपने आप को पस्त पाया। सच यह है कि भारत की विश्व कप की तैयारी जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में ठीक नहीं चल रही है। पहले एशिया कप में भारत को हार मिली और अब आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टी-20 में मिली हार नींद से जागने वाली है।

भारत को हर्ट करने वाली हार

भारत को हर्ट करने वाली हार

ऑस्ट्रेलिया ने भारत को मोहाली में 4 विकेट से मात देने में कामयाबी हासिल की। इससे पहले भारतीय टीम एशिया कप में पाकिस्तान और श्रीलंका से हारकर आ रही है। माना जा रहा था कि हर्षल पटेल की वापसी से टीम इंडिया को T20 में मजबूती मिलेगी लेकिन यह पहले से ही तय है कि हर्षल पटेल T20 में कोई चमत्कारी बॉलर नहीं हैं। वह बस एक अच्छे गेंदबाज हैं जिनके खराब दिन भी आ सकते हैं। ठीक यही स्थिति भुवनेश्वर कुमार के साथ है। इनके पास बहुत रफ्तार नहीं है और इन दोनों पर एक खराब मैच में बहुत ज्यादा रन पड़ने की संभावनाएं मौजूद रहती हैं।

हार्दिक पांड्या की बल्लेबाजी पॉजिटिव संकेत

हार्दिक पांड्या की बल्लेबाजी पॉजिटिव संकेत

इन सबके बावजूद यह कहना होगा कि हार्दिक पांड्या की बल्लेबाजी लगातार पॉजिटिव संकेत है जिन्होंने मोहाली में भी 30 गेंद पर नाबाद 71 रन बनाने में कामयाबी हासिल की। हार्दिक ने मैच के बाद कहा कि, हमें पता है कि बुमराह हमारी टीम के लिए कितने जरूरी हैं। ठीक है कुछ चिंताओं की बात जरूर है लेकिन हमें अपने खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाना होगा। यह देश के 15 लोग हैं जो बेस्ट हैं। इसी वजह से वे इस टीम का हिस्सा है। जसप्रीत अगर होते तो बड़ा फर्क पैदा होता लेकिन वह चोट के बाद वापस आ रहे हैं तो जरूरी है कि उनको कुछ आराम दिया जाए और तुरंत इतना दबाव ना दिया जाए।

 हम बेहतर बनने की कोशिश करना चाहते हैं

हम बेहतर बनने की कोशिश करना चाहते हैं

हार्दिक ने मैच के बाद ट्वीट किया था। यहां पर वो अपनी बात दोहराते हैं कि हम बेहतर बनने की कोशिश करना चाहते हैं। हार आपको सबक सिखाती है कि आप कहां पर बेहतर कर सकते हैं। विश्व कप की तैयारियां चल रही है। इसकी एक प्रक्रिया है और हम देख सकते हैं कि हम कहां पर सुधार कर सकते हैं। मुझे खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा है। कुछ खेल ऊपर नीचे हो जाते हैं उससे ज्यादा चीजें नहीं बदलती हैं।

बता दें भारत इस मुकाबले में डेथ ओवर में अच्छी गेंदबाजी करके भी जीत सकता था क्योंकि आस्ट्रेलिया को अंतिम 4 ओवर में 55 रनों की दरकार थी लेकिन पिच बहुत सपाट थी और भारतीय गेंदबाजी में धार नहीं थी जो ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी विस्फोट को रोक पाती। भुवनेश्वर कुमार ने अपने अंतिम 2 ओवरों में 15 और 16 रन दिए जबकि हर्षल पटेल के ओवर में 22 रन बने। इसी वजह से भारत इतनी आसानी से मुकाबला हार गया।

बैटिंग दिल के करीब है

बैटिंग दिल के करीब है

हार्दिक का मानना है कि इसको मैच हारने की एकमात्र वजह नहीं माना जाए। इन दोनों गेंदबाजों ने 24-25 रन खर्च किए लेकिन यह इतनी बड़ी बात नहीं है। ये एक द्विपक्षीय सीरीज है और हमारे पास दो मुकाबले और हैं। हम बेहतर तरीके से वापस आ सकते हैं।

हार्दिक से जब पूछा गया कि वह बल्लेबाजी में ऊपरी क्रम पर आते रहेंगे तो उनका कहना था टीम ने उन्हें नंबर पांच पर आने के लिए कहा है और वे इसी क्रम पर आ रहे हैं। बैटिंग उनके दिल के करीब है। 10 गेंद भी मिली तो खेलना पंसद करेंगे।

मैं न्यूट्रल हो चुका हूं

मैं न्यूट्रल हो चुका हूं

हार्दिक की सबसे बेहतर बात यही लगती है कि वह लगातार सुधार की प्रक्रिया पर गंभीरता से चिंतन-मनन कर रहे हैं। वे कहते हैं, मुझे पता है मेरे दिन इस समय अच्छे चल रहे हैं। लेकिन, मेरा फोकस यह है कि मैं और बेहतर कैसे कर सकता हूं। जिस तरह का कैरियर मेरा रहा है, मैं अपनी परफॉर्मेंस और अपने फैलियर को ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहता। मैं जीरो रन भी कर चुका हूं लेकिन मैं न्यूट्रल हो चुका हूं। मेरे पास आज अच्छा दिन था लेकिन वह बीत चुका है अब मुझे दूसरे गेम की तैयारी करनी है और मैं एक नए टारगेट के लिए तैयार हूं। हमेशा एक कदम आगे होना चाहिए।

यह वो अंदाज है जो धोनी के पास रहा है

यह वो अंदाज है जो धोनी के पास रहा है

यह वो अंदाज है जो धोनी के पास रहा है। वे जीत-हार में हमेशा उदासीन नजर आए। खुद की सफलता-विफलता में न्यूट्रल रहे। हार्दिक की धोनी से नजदीकी जगजाहिर है। धोनी की कई खिलाड़ियो से नजदीकी जगजाहिर है। उनकी पर्सनलिटी ऐसी है कि लोग उनसे जुड़ते हैं। धोनी का प्रभाव हार्दिक पर रहा है और उनकी खूबियों को अपनाए बिना हार्दिक बढ़ रहे हों, ऐसा संभव नहीं है।

उन्होंने आईपीएल 2022 में कप्तानी मिलने पर कहा था कि वो धोनी की सफलता को दोहराने की ओर देख रहे हैं। हार्दिक धोनी के न्यूट्रल स्वभाव की खूबी पर भी बात कर चुके हैं। ये कुछ ऐसी चीजें हैं जो उन्होंने आगे बढ़ने के लिए धोनी से सीखी हैं।

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