फिंच ने TOP पर छोड़ी कप्तानी लेकिन भारत में तो कप्तानों के साथ...
नई दिल्ली, 11 सितंबर: ऑस्ट्रेलिया के एरोन फिंच ने एकदिवसीय टीम की कप्तानी से संन्यास ले लिया। टीम के प्रति उनके ईमानदार सोच की हर जगह सराहना हो रही है। अगर आप शिखर पर रह कर अपनी कप्तानी को अलविदा कहते हैं तो इससे बढ़ कर कोई और सम्मान नहीं हो सकता है। आप खुद पर फक्र महसूस करते हैं और दुनिया आपके फैसले पर। एकदिवसीय मैचों में अपने खराब फॉर्म को देख कर फिंच ने स्वेच्छा से कप्तानी छोड़ दी। इसी तरह इंग्लैंड को विश्वविजेता बनाने वाले कप्तान इयान मॉर्गन ने भी सही समय पर कप्तानी छोड़ी थी। मॉर्गन 18 महीनों से रन नहीं बना पा रहे थे। फिटनेस की भी समस्या थी। कोई उनको कुछ कहता इसके पहले ही उन्होंने जून 2022 में कप्तानी और क्रिकेट से संन्यास ले लिया। लेकिन भारत में इसके उलट स्थिति है। यहां कप्तानी के लिए दांव पेंच चले जाते हैं। इस मामले में कभी क्रिकेट बोर्ड तो कभी खिलाड़ियों का रवैया बहुत अपमानजनक रहा है। और तो और क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर से बहुत ही अपमानजनक तरीके से कप्तानी छीनी गयी थी।।

फिंच की बेमिसाल सोच
फिंच की सकारात्मक सोच की जितनी भी तारीफ की जाए वो कम है। उन्होंने कहा, कुछ सुनहरी यादों के साथ यह (वनडे) एक बेहतरीन सफर रहा। लेकिन अब समय आ गया है कि कप्तानी किसी और के हाथ में सौंपी जाए ताकि उन्हें अगले विश्वकप (वनडे) की तैयारियों के लिए समुचित समय मिल जाए। जब फिंच ने देखा कि वे एकदिवसीय मैचों में रन नहीं बना पा रहे हैं तब उन्होंने कप्तानी छोड़ने का मन बना लिया। जब कप्तान खुद रना बना कर टीम को प्रेरित नहीं कर सकता तो उसे नैतिक रूप से नेतृत्व करने का अधिकार नहीं है। फिंच पिछली 12 एकदिवसीय पारियों में पांच बार खाता नहीं खोल सके थे। उन्होंने 13 की औसत से रन बनाये जो बहुत ही खराब प्रदर्शन था। आखिरकार उन्होंने कप्तानी छोड़ दी ताकि किसी दूसरे योग्य खिलाड़ी को इसकी जिम्मेदारी दी जा सके।

वनडे के शानदार खिलाड़ी
फिंच एकदिवसीय मैचों के शानदार खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने 145 वनडे में 17 शतक लगाये हैं जो ऑस्ट्रेलिया की तरफ से किसी बल्लेबाज का तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 2015 में जब ऑस्ट्रेलिया एकदिवसीय विश्वकप जीता था उसमें फिंच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। उन्होंने ग्रुप मैच में इंग्लैंड के खिलाफ 135 रनों की पारी खेली थी। लेकिन जब एरोन फिंच को महसूस हुआ कि वे टीम में अपेक्षा के अनुरूप योगदान नहीं दे रहे हैं तो उन्होंने कप्तानी छोड़ दी।

क्या हुआ था सचिन तेंदुलकर के साथ
भारत में क्रिकेट को धर्म और सचिन तेंदुलकर को इस धर्म का भगवान माना जाता है। क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में एक हैं। वे विश्वकीर्तिमानों के पहाड़ पर खड़े हैं। लेकिन इसके बावजूद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें अपमानित करने का दुस्साहस किया था। इस अपमान का जिक्र उन्होंने अपनी किताब- प्लेइंग इट माई वे- में किया है। सचिन 1996 में भारत के कप्तान बने थे। लेकिन टीम के खारब प्रदर्शन के कारण 1997 में उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया था। 1997 में सचिन की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका के साथ 3 टेस्ट मैचों की सीरीज खेली थी जो ड्रा रही थी। सचिन लिखते हैं, इस सीरीज के बाद मुझे अनौपचारिक रूप से कप्तानी से हटा दिया गया था। बीसीसीआइ की तरफ से किसी ने मुझे फोन करने या कप्तानी से हटाये जाने की सूचना देना जरूरी नहीं समझा था। मुझे कप्तानी से हटाये जाने की जानकारी मीडिया से मिली। उस समय मैं अपने दोस्तों के साथ एक आयोजन में था। यह सुन कर मैंने काफी अपमानजनक महसूस किया। तब मैंने खुद से कहा, क्रिकेट के आका मुझसे कप्तानी छीन सकते हैं लेकिन मेरे क्रिकेट और खेल को कोई नहीं छीन सकता। इससे मेरे संकल्प को और मजबूती मिली। मैंने जिस तरह से खुद को संभाला उसके बाद चीजें बेहतर होती गयीं। सचिन इस अपमान को कभी भूल नहीं सके थे। लेकिन इसी क्रिकेट बोर्ड ने 1999 में फिर सचिन को कप्तान बना दिया था।

कपिल, श्रीकांत, गांगुली के साथ भी बुरा हुआ
1983 में महान सुनील गावस्कर को हटा कर कपिलदेव को कप्तान बनाया गया था। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 23 साल थी। उस साल कपिल ने कमाल कर दिया। उन्होंने भारत को विश्वचैम्पियन बना कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया । लेकिन एक साल बाद ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने पलटी मार दी। 1984 में सुनील गावस्कर को फिर कप्तान बना दिया गया। गावस्कर कप्तान बने तो कपिल को कोलकाता के तीसरे टेस्ट से निकाल ही दिया। क्रिकेट बोर्ड के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण कपिल और गावस्कर का विवाद तिल से बढ़कर ताड़ हो गया। कपिल और गावस्कर दोनों महान खिलाड़ी थे लेकिन उन्हें अपमान के दौर से गुजरना पड़ा। इसा तरह श्रीकांत की कप्तानी में भारत की टीम ने 1989 में पाकिस्तान का दौरा किया था। इस दौरे में टेस्ट सीरीज ड्रा समाप्त हुई थी। इसके बावजूद श्रीकांत को कप्तानी से हटा दिया गया। इसकी वजह ये थी कि वे क्रिकेट खिलाड़ियों के संघ का नेतृत्व कर रहे थे। ग्रेग चैपल जब टीम इंडिया के कोच बने तब उनका कप्तान सौरव गांगुली से विवाद हो गया। इस विवाद के कारण 2005 में गांगुली को अपमानजनक ढंग से कप्तानी से हटा दिया गया था। इस मामले में महेन्द्र सिंह धोनी सबसे जुदा रहे। उन्होंने 2014 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बीच सीरीज में ही कप्तानी छोड़ दी थी।












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