'अश्विन बनें भारत के टेस्ट कप्तान', पूर्व पाक क्रिकेटर हुआ ऑलराउंड क्षमता का मुरीद, कुंबले से की तुलना

भारत के रविचंद्रन अश्विन ने बांग्लादेश के खिलाफ हाल में ही सम्पन्न हुई टेस्ट सीरीज के दौरान जिस तरह की ऑलराउंड क्षमता दिखाई थी उसने कई लोगों को बहुत प्रभावित किया है।

Ravichandran Ashwin

भारत के ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन ने बांग्लादेश में भारत की टेस्ट सीरीज में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए तारीफें बटोरी हैं। कुछ फैंस ने यहां तक ​​​​कहा कि उन्हें खेल के सबसे लंबे प्रारूप में टीम का कप्तान बनने के लिए सबसे आगे होना चाहिए। अश्विन समय के साथ एक बेहतरीन बल्लेबाज के तौर पर भी विकसित हुए हैं। उनकी बैटिंग भारत के एक और ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा की छाया तले चलती रही है। यह माना जाता है जडेजा बेहतर बल्लेबाज हैं और अश्विन बेहतर गेंदबाज हैं। लेकिन अश्विन की कई पारियों ने ये साबित किया है कि निचले क्रम के हिसाब से उन्होंने बैटिंग में जो किया है वह एक बहुत जूझारू बल्लेबाज ही कर सकता है।

अश्विन ने ऑलराउंडर के तौर पर बड़ी उपलब्धि भी हासिल की है। वे टेस्ट क्रिकेट में 3000 रन और 400 से अधिक विकेट लेने वाले न्यूजीलैंड के महान रिचर्ड हैडली के बाद दूसरे सबसे तेज खिलाड़ी बन गए हैं। ये कुछ ऐसा है जो भारत के महानतम ऑलराउंडर कपिल देव ने भी बहुत बाद में किया था। अश्विन ने सीरीज में सात विकेट लिए और 112 रन बनाए। वे दूसरे टेस्ट में चौथी पारी में 62 गेंदों पर 42 रन बनाकर नाबाद रहे जिसने मैच को भारत के पक्ष में मोड़ दिया। उन्होंने बांग्लादेश की पहली पारी में चार और दूसरी पारी में भी दो विकेट लिए थे। पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने कहा है कि अश्विन को भारत की टेस्ट कप्तानी संभालने वाले उम्मीदवारों में शामिल होना चाहिए।

कनेरिया ने कहा, "रविचंद्रन अश्विन को भारत की टेस्ट कप्तानी के लिए उम्मीदवारों में से एक होना चाहिए। उनके पास अभी भी बहुत क्रिकेट बाकी है। वह अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ बहुत स्मार्ट हैं। ऐसा लगता है जैसे वह लगातार मैदान पर सोच-विचारते रहते हैं।"

ऐसे ही फैंस का भी मानना है कि अश्विन बहुत बेहतर कर रहे हैं और उन्होंने इसके लिए टी20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में भी शानदार तरीके से दबाव झेला।

कनेरिया ने कहा कि जब भारत दूसरे टेस्ट में भी दबाव में था तो अश्विन शांत थे। उन्होंने कहा, "भारत काफी दबाव में था। रविचंद्रन अश्विन उस स्थिति में शांत थे, उन्होंने अपनी टीम को स्थिर करने के लिए शानदार पारी खेली। उन्होंने अपने बल्लेबाजी योगदान से कई मौकों पर भारत को बचाया है। भारतीय टीम पहले जब कुंबले के बिना खेलती थी तो कमजोर दिखती थी, ऐसा ही अश्विन के लिए सच है। उनकी 42 रनों की पारी शतक के बराबर थी।"

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