'बल्ला पकड़ना नहीं आता और बन गए आका' CJI सूर्यकांत क्यों हुए आगबबूला, किसकी लगाई फटकार? जानिए पूरा मामला
CJI Suryakant on MCA: महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा बाउंसर फेंका कि सत्ता की पिच पर खड़े कई लोग क्लीन बोल्ड हो गए। MCA चुनावों में भाई-भतीजावाद और राजनीतिक दखलंदाजी पर सुप्रीम कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई है।
CJI सूर्यकांत की बेंच ने साफ किया कि क्रिकेट प्रशासन अधिकारियों से नहीं, बल्कि पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों से चलता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, भाई-भतीजावाद, गुटबाजी और राजनीतिक दखल ने क्रिकेट प्रशासन को खेल से ज़्यादा सत्ता का खेल बना दिया है। जानिए आखिर क्या है पूरा मामला और CJI सूर्यकांत ने क्यों लगाई जबरदस्त फटकार?

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व क्रिकेटर केदार जाधव की याचिका पर सुनवाई करते हुए तीखी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने MCA पदाधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा जिन्हें "बल्ला पकड़ना तक नहीं आता", मगर वे एसोसिएशन का हिस्सा बन बैठे हैं। जबकि 300 सीटें उन दिग्गज क्रिकेटरों के लिए होनी चाहिए थीं जिन्होंने देश का नाम रोशन किया है।"
MCA पर केदार जाधव ने क्या लगाए हैं आरोप?
यह मामला तब गरमाया जब पूर्व क्रिकेटर केदार जाधव ने आरोप लगाया कि राजनीतिक रसूख के दम पर रातों-रात 401 नए सदस्यों को एसोसिएशन में शामिल कर लिया गया। इन नए चेहरों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के विधायक रोहित पवार की पत्नी कुंती पवार और सांसद सुप्रिया सुले की बेटी तक के नाम शामिल हैं, जिस पर अदालत ने हैरानी जताई है।
MCA में सदस्यों की वृद्धि "बंपर ड्रा" की तरह कैसे हुई?
सुप्रीम कोर्ट ने MCA की सदस्यों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। अदालत ने पूछा कि 1986 से 2023 तक जहां सदस्यों की संख्या 164 सीमित थी, वहीं अचानक इतनी बड़ी वृद्धि "बंपर ड्रा" की तरह कैसे हुई? CJI ने क्रिकेट प्रशासन के गिरते स्तर पर गहरी नाराजगी जाहिर की।
रिटायर्ड जज कमेटी और 2000 एकड़ जमीन का खुलासा
सीनियर वकील ए.एम. सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुआई वाली समिति ने MCA के 48 पुराने सदस्यों को हटाकर नए सदस्यों को शामिल किया। इस प्रक्रिया के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि एक सदस्य ने एसोसिएशन को करीब 2000 एकड़ भूमि दान में देने की पेशकश की थी, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट की पहले से लगी रोक
MCA चुनावों पर इससे पहले ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोपों को गंभीर मानते हुए रोक लगा दी थी। अदालत का मानना था कि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्षता और पारदर्शिता के मानकों पर खरी नहीं उतर रही है।
खेल प्रशासन के लिए स्वतंत्र ट्रिब्यूनल की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर ज़ोर दिया कि सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि सभी खेलों के लिए एक स्वतंत्र फोरम या ट्रिब्यूनल होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि खेल संस्थाओं को खिलाड़ियों के सम्मान के साथ संचालित किया जाना चाहिए और अनुभवी क्रिकेटरों की भागीदारी प्रशासन में सुनिश्चित होनी चाहिए।












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