बिशन सिंह बेदी ने गुस्से में बुलाये थे भारतीय खिलाड़ी वापस, पाकिस्तान को किया गया विनर घोषित
Bishan Singh Bedi profile: भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी का सोमवार को 77 साल की उम्र में निधन हो गया। टीम इंडिया के लिए वह लम्बे समय तक खेले थे। इसके अलावा फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी बेदी को एक बड़ा नाम माना जाता है। वह अपनी जादूई गेंदबाजी से दिग्गज बल्लेबाजों नचाते थे।
शुरुआती जीवन: बिशन सिंह बेदी का जन्म अमृतसर में 25 सितम्बर 1946 में हुआ था। वह भारतीय टीम के लिए खेले लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से ज्यादा फर्स्ट क्लास करियर में चमके थे। उनको हमेशा से बेबाकी के लिए जाना जाता था। क्रिकेट के बारे में वह अक्सर बोलते थे।

करियर: भारतीय टीम के लिए बिशन सिंह बेदी साल 1967 से लेकर 1979 तक खेले थे। इस दौरान उन्होंने 67 टेस्ट मैच खेलकर कुल 266 विकेट अपने नाम किये थे। 15 बार उन्होंने पारी में 5 विकेट झटके। 1 मैच में उन्होंने 10 विकेट झटके थे। इसके अलावा वनडे में उनके नाम 10 मैचों में 7 विकेट है। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में वह दिल्ली के लिए काफी खेले थे। प्रथम श्रेणी में उन्होंने 370 मैच खेलकर 1560 विकेट अपने नाम किये। इस प्रदर्शन के लिए उनको ज्यादा माना जाता है। टीम इंडिया के लिए उन्होंने 22 मैचों में कप्तानी की।
परिवार: बिशन सिंह बेदी दो शादियाँ हुई थीं। उनकी पहली पत्नी ऑस्ट्रेलिया से थीं, इस शादी के बाद तलाक हुआ था। दूसरी बार बेदी की शादी अंजू से हुई। बिशन सिंह बेदी के बेटे का नाम अंगद बेदी है, वह एक्टर हैं। अंगद की पत्नी नेहा धूपिया बॉलीवुड एक्ट्रेस हैं।
विवाद: साल 1976-77 के इंग्लैंड दौरे पर बिशन सिंह बेदी ने जॉन लेवर पर वैसलीन लगाकर बॉल चमकाने का आरोप जड़ा था। हालांकि बाद में आरोप गलत साबित हुए। गेंदबाज आँखों में जाने वाले पसीने को रोकने के लिए ऐसा कर रहा था। वह पहले ऐसे कप्तान भी थे जिन्होंने 1978 में मैच होने से पहले ही हार स्वीकार कर ली। पाकिस्तान के खिलाफ 1978 में भारत को 18 गेंदों में 23 रन बनाने थे, पाक गेंदबाज सरफराज नवाज ने लगातार बाउंसर फेंकी, अम्पायर ने वाइड नहीं दी, तो गुस्से में बेदी ने खिलाड़ियों को वापस बुला लिया, पाकिस्तान को मैच में विजेता घोषित कर दिया गया।
अवॉर्ड: बिशन सिंह बेदी को साल 1970 में पद्मश्री से नवाजा गया था। खेल में उत्कृष्ट योगदान के लिए उनको लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया था। साल 2004 में उनको सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला था।












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