सुपर फास्ट एलन डोनाल्ड को इस इंडियन बॉलर की स्पीड लगी जबरदस्त, वो है तीनों फॉर्मेट का सितारा

नई दिल्लीः एलन डोनाल्ड दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज में एक थे। उनका दक्षिण अफ्रीका में डेल स्टेन जैसा बॉलर माना जा सकता था लेकन डोनाल्ड ने स्टेन की तुलना में कहीं ज्यादा महान बल्लेबाजों का सामना किया। वे इतने तेज थे कि सचिन तक को दिक्कत हो जाती थी। डोनाल्ड ने अब भारत के एक तेज गेंदबाज को बहुत फास्ट करार दिया है।

बुमराह निश्चित तौर पर बहुत तेज हैं लेकिन शायद डोनाल्ड जितने फास्ट नहीं हैं पर जसप्रीत जिस तरह से लगातार एक ही गति से गेंद फेंकते हैं यह कुछ ऐसा काम है कैगिसो रबाडा जैसी हट्टे-कट्टे गेंदबाज के बूते की बात भी नहीं।

बुमराह और रबादा मौजूदा समय में विश्व के दो लीडिंग फास्ट बॉलर

बुमराह और रबादा मौजूदा समय में विश्व के दो लीडिंग फास्ट बॉलर

डोनाल्ड का मानना है कि बुमराह और रबादा मौजूदा समय में विश्व के दो लीडिंग फास्ट बॉलर हैं। द टेलीग्राफ से बात करते हुए, उन्होंने बुमराह की कलाई की स्थिति की ओर इशारा किया और इसे "शानदार" कहा। उन्होंने कहा, "सभी प्रारूपों में किसी भी समय यॉर्कर फेंकने की उनकी क्षमता भी सबसे अलग है। वह यह भी जानते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में उस यॉर्कर को कब फेंकना है। वह सभी प्रारूपों में पूर्ण गेंदबाज है। मुझे नहीं लगता कि मैंने इतना दमखम किसी अन्य युवा तेज गेंदबाज में देखा है। मैंने उनको देखा और पाया कि क्या गति है। और अब, वह एक ऐसा व्यक्ति है जिसे मैं हमेशा अपनी टीम में सभी प्रारूपों में रखूंगा।"

डोनाल्ड बोले- बुमराह जैसा कोई नहीं

डोनाल्ड बोले- बुमराह जैसा कोई नहीं

55 वर्षीय को यह भी लगता है कि बुमराह का रन-अप और जिस तरह से वह गेंद को रिलीज करते हैं वह तो गजब का जबरदस्त है। डोनाल्ड यह तक कहते हैं कि बुमराह की कलाई गेंद पर जिस तरह से काम करती है वह इस समय खेल में किसी और के पास नहीं है।

डोनाल्ड ने 28 साल के बुमराह की हर हालातों में ढलने की भी तारीफ की। यहां वे क्रिकेट में एक फॉर्मेट से दूसरे में स्विच करने की बात कर रहे थे।

बुमराह के लिए ये करियर में पीक पर जाने का समय-

बुमराह के लिए ये करियर में पीक पर जाने का समय-

फिलहाल बुमराह साउथ अफ्रीका के दौरे पर हैं लेकिन वे टेस्ट मैचों में अपनी निरंतरता में कहीं ना कहीं चूक गए हैं क्योंकि दक्षिण अफ्रीका दोनों टेस्ट मैचों में चौथी पारी में चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए जीता जबकि भारतीय तेज गेंदबाज उस समय किसी तरह का प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही। यही हाल शमी का रहा जिन्होंने बीच-बीच में बहुत प्रभाव छोड़ा लेकिन जब सबसे जरूरी समय था तब कुछ नहीं हो सका और भारत 1-2 से वह सीरीज हार गया तो कागजों पर पूरी तरह 3-0 से भारत के पक्ष में लिखी जाने को बेताब थी।

इस सब खामियों के बावजूद बुमराह की क्षमताएं नायाब हैं और अगर भारत का यह बॉलर हर पारी में निरंतरता दिखा सके तो बहुत अच्छी बात होगी क्योंकि इस उम्र में ही एक गेंदबाज अपने पीक पर होता है। बुमराह के पास कहर बरपाने के 3-4 साल और हैं।

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