स्मृति ईरानी की वो साधारण चप्पल जो बन गयी बड़ी कहानी

नई दिल्ली। केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की हवाई चप्पल वाली तस्वीर सुर्खियां बटोर रही हैं। एक ट्वीटर यूजर के कमेंट के बाद उन्होंने इस चप्पल का दाम भी बताया है। दो सौ रुपये की पुरानी और साधारण चप्पल महफिल लूट ले गयी। यही तो सोशल मीडिया का कमाल है। खाक को भी खास बना देती है। वैसे चप्पल से जुड़ी स्मृति इरानी की एक और कहानी है। ये कहानी उनकी जीवन शैली को भी बयां करती है।

जब हवाई अड्डे पर टूट गयी चप्पल

जब हवाई अड्डे पर टूट गयी चप्पल

वाकया नवम्बर 2016 का है। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को इशा फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोयम्बटूर (तमिलनाडु) जाना था। वे विमान से कोयम्बटूर हवाई अड्डा पहुंची। जब स्मृति ईरानी विमान की सीढ़िया उतर रही थीं तभी उनकी चप्पल टूट गयी। वे थोड़ा असहज हो गयीं। वे धीरे- धीरे चल कर किसी तरह कार तक आयीं। कोई समझ नहीं पाया कि वे क्यों धीरे-धीरे चल रही हैं। जब कि वो तो अपने टूटी चप्पल को सहेज कर चलने की कोशिश कर रही थीं। उनके साथ तमिलनाडु भाजपा के महासचिव वी श्रीनिवास भी थे। कार में बैठने के बाद उन्होंने श्रीनिवास को अपनी चप्पल टूटने की बात बतायी। संयोग से हवाई अड्डा से इशा फाउंडेशन का कार्यक्रम स्थल दूर था। करीब 16 किलोमीटर का रास्त तय हो गया लेकिन चप्पल मरम्मत करने वाला कहीं दिखायी नहीं पड़ा।

एक टूटी चप्पल की बड़ी कहानी

एक टूटी चप्पल की बड़ी कहानी

कुछ देर के बाद पेरुर कस्बे में एक चप्पल गांठने की दुकान दिखायी पड़ी। स्मृति ईरानी ने कार रोकने का संकेत किया। गाड़ी रुकी तो वे अकेली उतरीं। बाकी लोगों को उन्होंने कार में बैठे रहने के लिए कहा। वे चप्पल मरम्मत करने वाले के पास पहुंची और पास में ही रखे एक स्टूल पर बैठ गयीं। स्मृति एक केन्द्रीय मंत्री थीं। रास्ते में टूटी चप्पल फेंक कर नयी भी खरीद सकती थीं। लेकिन ऐसा नहीं किया। चप्पल मरम्मत करने वाला सिर्फ तमिल जानता था। उन्होंने इशारे में टूटी चप्पल को सीने के लिए कहा। वह बिल्कुल अंजान था कि स्टूल पर बैठी महिला कौन हैं। तब तक श्रीनिवास भी वहां पहुंच गये। चप्पल की सिलाई हो गयी। उसने काम का मेहनताना उंगलियां दिखा कर दस रुपये मांगे। स्मृति इरानी के पास छुट्टे पैसे नहीं थे। उन्होंने सौ रुपये का नोट दिया। चप्पल गांठने वाले ने तमिल में कहा, खुदरा पैसे नहीं हैं। तब स्मृति ने श्रीनिवास से इसका जवाब पूछ कर कहा, चेंज वेंडा। यानी छुट्टे की जरूरत नहीं है। इसके बाद फिर वे अपने आगे की सफर पर निकलीं।

 बात कुछ अलग है

बात कुछ अलग है

स्मृति ईरानी की पृष्ठभूमि गैरराजनीतिक है। टेलीविजन की दुनिया में नाम कमाने के बाद वे राजनीति में आयी हैं। उन्हें बिना राजनीति संघर्ष के बड़ा मुकाम मिला है। वे कहां तक पढ़ी हैं और उनकी डिग्री क्या है, इस भारी विवाद रहा है। लेकिन तमाम विवादों के बावजूद उन्होंने खुद को एक जुझारू और जहीन राजनीतिज्ञ के रूप में स्थापित किया है। उनकी डिग्री को लेकर विवाद हो सकता है लेकिन उनकी समझ और मेहनत को लेकर कोई विवाद नहीं है। जब वे सांसद में जाती हैं तो पूरी तैयारी के साथ। सवालों के जवाब के लिए पूरा होमवर्क करती हैं। संसद में उनके भाषण इस बात के प्रमाण हैं। वे कितनी समर्पित और मेहनती नेता हैं इसका प्रमाण अमेठी में उनकी जीत है। 2014 में चुनाव हारने का बाद भी स्मृति ईरानी वहां पूरे दमखम से जमी रहीं। जनता के बीच रह कर पूरे पांच साल तक काम किया। पराजय के बावजूद उन्होंने अमेठी को ही कर्मस्थली माना। फिर भी किसी ने सोचा नहीं था कि राजनीति की नौसिखुआ स्मृति ईरानी, राहुल गांधी को हरा देंगी ? लेकिन 2019 में ये चमत्कार हुआ। अमेठी में स्मृति ने राहुल गांधी को ऐसे हराया जैसे 1977 में राजनारायण ने इंदिरा गांधी को हराया था। स्मृति में कुछ बात तो है जो दूसरों से अलग है।

 देखीं अम्मा, तोहे कुछ ना होई !

देखीं अम्मा, तोहे कुछ ना होई !

स्मृति लोगों से कैसे जुड़ती हैं, इसकी एक और कहानी है। बात 2019 के लोकसभा चुनाव के समय की है। अमेठी में 6 मई को वोटिंग थी। चुनाव प्रचार चरम पर था। 28 अप्रैल को स्मृति चुनाव प्रचार के लिए मुशीगंज पहुंची थीं। तभी उन्हें पता चला कि बगल के गांव पश्चिम दुआरा में भयंकर आग लगी है। अप्रैल में गर्म पछुआ हवा के झोंकों ने आग को और बढ़ा दिया था। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी। स्मृति अपने समर्थकों के साथ पश्चिम दुआरा गांव पहुंची तो पाया कि गेंहू के खेतों में आग लगी हुई है। गांव के लोग हैंडपम्प से पानी भर कर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी। खाली बाल्टी देख कर स्मृति ईरानी खुद हैंडपंप चलाने लगीं। तब तक दूसरे कार्यकर्ता वहां पहुंच गये। जिस महिला का खेत जल रहा था वह जोर जोर से रो रही थी। स्मृति ने उसको अपनी बाहों में भर कर चुप कराया। उसे ढाढस बंधाते हुए कहा, देखीं अम्मा ! तुझे कुछ ना होई। तब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच कर खेतों की आग बुझाने लगी। कांग्रेस ने इस घटना को राजनीतिक स्टंट करार दिया था। चुनाव हुए। जनता ने राहुल गांधी को 55 हजार वोटों से हरा दिया। जनता की नजर में कौन क्या है, ये पता चल गया। स्मृति ईरानी भले शो बिजनेस का हिस्सा रहीं है लेकिन असल जिंदगी बिल्कुल अलग हैं।

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