हिमाचल में स्वाइन फ्लू से अब तक दस की मौत, वीरभद्र भी हुए इससे बीमार

Shimla news, शिमला। स्वाइन फ्लू ने देशभर में कोहराम मचा दिया है। हिमाचल प्रदेश में स्वाइन फ्लू का प्रकोप लगाता बढ़ता जा रहा है। इस जानलेवा बीमारी की वजह से मरने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश में अब तक इस बीमारी से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदेश भर में 44 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें कांगड़ा जिला में सबसे अधिक स्वाइन फ्लू के18 मामले सामने आए हैं। जिनका इलाज चल रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए आईजीएमसी शिमला में दाखिल कराया गया था। मंगलवा शाम को उन्हें छुट्टी दे दी गई।

ten people died in himachal pradesh due to swine flu

प्रदेश सरकार ने स्वाइन फ्लू पर काबू पाने के लिए खांसी, जुकाम और बुखार आने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह लोगों को दी है। यह बीमारी एक दूसरे से फैलती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को भीड़भाड़ से दूर या फिर मुंह नाक पर मास्क लगाने की सलाह दी है। स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में फैलता है, किसी के शरीर में प्रवेश कर यह लोगों को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। अस्पतालों में इन दिनों बुखार और खांसी के मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि दो और दो साल से छोटे बच्चे, 65 साल तथा इससे ज्यादा उम्र के लोगों को यह बीमारी आसानी से अपनी गिरफ्त में लेती है। इसका कारण यह है कि इन लोगों के शरीर में बीमारी से लड़ने की कम क्षमता होती है।

ten people died in himachal pradesh due to swine flu

गर्भवती महिलाएं और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी जल्द यह बीमारी अपनी चपेट में लेती है। सर्दी, खांसी-जुकाम और बुखार इसे ए श्रेणी में रखा गया है, जबकि 101 और इससे ज्यादा बुखार आने पर बी श्रेणी और चार दिन तक इस बुखार के न उतरने को सी श्रेणी में रखा गया है। प्रदेश में यह टेस्ट तीन जगह होते हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला, राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा, कांगड़ा और सीआरआई कसौली में इन टेस्टों को कराया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि बीमारी पर काबू पाया जा रहा है। प्रदेश सरकार स्वाइन फ्लू को लेकर पूरी तरह सतर्क और सजग है तथा प्रदेश के सभी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की दवाई उपलब्ध करवा दी गयी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों सहित मुख्य चिकित्सा संस्थानों में आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए गए हैं ताकि इस संक्रमण को रोका जा सके।

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