हिमाचल में राजधानी शिमला के पास फिर भूस्खलन, पहाड़ ढहने से राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित, वाहन फंसे
शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश के चलते राजधानी शिमला के मेहली-शोघी बाईपास रोड पर भूस्खलन हुआ है। भूस्खलन के कारण प्रशासन ने रोड को वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि, इस बार भारी बारिश के कारण ही लगभग 22 लिंक सड़कें और 3 राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में भूस्खलन की अब तक एक दर्जन से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं।

राजधानी शिमला के पास पहाड़ ढहा
राजधानी शिमला के ज्योरी इलाके के पास भी एक पहाड़ ढहने से नेशनल हाईवे-5 बाधित हो गया। भूस्खलन के कारण सड़क पूरी तरह खराब हो गई और वहां पहाड़ी का मलबा जमा हो गया। टूटे पहाड़ की बड़ी-बड़ी शिलाएं तेज आवाज के साथ नीचे गिरीं। पता चलने पर प्रशासन ने स्थिति का जायजा लेने के लिए एसडीएम रामपुर और एक पुलिस-जाब्ते को मौके पर भेजा। सूचना मिलने पर उच्चाधिकारी भी रवाना हो गए।

..लगातार हो रहा भूस्खलन
पहाड़ी राज्य होने की वजह से हिमाचल और उत्तराखंड में भूस्खलन की घटनाएं लगातार हो रही हैं। पिछले महीने कई जिलों में पहाड़ दरके। किन्नौर जिले में रिकांगपियो-शिमला राजमार्ग पर चट्टान टूटकर गिरी थीं, जिससे कई वाहन दब गए। हादसे में 14 लोगों की मौत हुई थी और 13 को घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया था। उसी प्रकार किन्नौर जिले के एक अन्य हादसे में 4 वाहन मलबे में दब गए। बचाव कार्य में सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों को लगाया गया। आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडेय ने बताया कि, ऊपर से पत्थर गिरने से बचाव कार्य बाधित हुआ था। उन्होंने कहा कि, यह इलाका ऐसा ही है जहां भूस्खलन की संभावना ज्यादा रहती है। जिसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो जाते हैं।

भूस्खलन की बड़ी घटनाएं हो चुकी
पिछले माह चंद्रभागा नदी में पानी का प्रवाह रुक जाने की वजह से आसपास के आबादी वाले इलाकों पर खंतरा मंडरा गया था। जलभराव की वजह से जूंडा, तडंग और जसरथ गांवों में फसल-बर्बादी हुई। लोग पलायन करने को मजबूर हो गए। जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों को नदी के पास नहीं जाने की सलाह दी। एक अधिकारी ने कहा कि, हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों के अंदर भूस्खलन की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ। नेशनल हाईवे-5 पर अगस्त महीने में निगुलसेरी के पास पहाड़ खिसकर खाई में जा गिरा था।












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