हिमाचल प्रदेश: एक तरफ पीएम मोदी की रैली, दूसरी तरफ कांग्रेस ने मनाया 'निकम्मा दिवस'
Shimla News,(शिमला)। हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकार गुरूवार को जब धर्मशाला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में अपने एक साल के कार्यकाल पूरा होने का जश्न मना रही थी। वहीं दूसरी ओर शिमला में कंपकपाती ठंड के बीच विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राजभवन पहुंचे। कांग्रेस ने गुरुवार का दिन निकम्मा दिवस के रूप में मनाया व कहा कि सरकार ने एक साल में कोई काम नहीं किया है।

किया विरोध प्रदर्शन दिया अजीब नाम
शिमला में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेसियों की खासी भीड़ जुटी थी। कांग्रेस आज के दिन को बीजेपी सरकार का एक साल पूरा होने पर निकम्मा दिवस के रूप में मना रही है। कांग्रेसियों ने केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश की जयराम सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता थाली बजाकर अपना गुस्सा जाहिर करती दिखीं। उसके बाद तमाम कांग्रेसी पैदल ही राजभवन की ओर नारेबाजी करते हुए निकले लेकिन उन्हें राजभवन पहुंचकर पता चला कि राज्यपाल धर्मशाला में हैं। राज्यपाल की गैरहाजिरी में कांग्रेस नेताओं ने राजभवन के अधिकारी को राज्य सरकार के खिलाफ चार्जशीट सौंपी। इस चार्जशीट में प्रदेश की जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के एक साल के कार्यकाल को असफल करार देते हुए कहा गया था कि सरकार के निकम्मेपन की वजह से विकास ठप्प हो गया है। इस चार्जशीट में सरकार के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं।

कांग्रेस ने लगाया आरोप
कांग्रेस की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में लचर कानून व्यवस्था, आपराधिक तत्वों के हौसले बुलंद, रेप व हत्या के मामले बढ़े हैं। हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज की सैर कराने के लिए घोषित उड़ान योजना हुई धराशायी हो गई है। उन्हें 2500 का टिकट 18000 में मिल रहा है। उड़ान योजना के तहत सीएम जयराम ठाकुर की ओर से घोषित हेली टैक्सी योजना भी ठप, घोषणा के बाद शिमला से चंडीगढ़ तक दो दिन ही चली हेली टैक्सी।

स्वास्थ्य सेवा बेहाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वहीं सरकार सेब पर आयात मूल्य पचास फीसदी नहीं बढ़ा पाई इसी वजह से सरकारी बागवानों को दो हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। गिरी पार के हाटी समुदाय को एससी-एसटी का दर्जा नहीं दिया गया। सरकार बेरोजगारी दूर करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना पाई। सरकार किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य देने में विफल रही है। यही नहीं केंद्र से प्रदेश के लिए वित्तीय पैकेज लाने में भी यह सरकार नाकाम रही है। आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर तबादला उद्योग सक्रिय रहा है। अधिकारियों-कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। प्रदेश की सड़के खस्ताहाल, केंद्र से मंजूर एनएच की डीपीआर तक नहीं बन सकी। राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं, अस्पतालों में डॉक्टर व पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराने को कोई कदम नहीं उठाए गए।












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