331 साल पुराने न्यूटन की गति के तीसरे नियम को भारतीय ने दी चुनौती

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक पद पर तैनात अजय शर्मा ने इग्नू में चल रही अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन न्यूटन गति के तीसरे नियम के बारे में चौंकाने वाले तथ्य पेश किए।

शिमला। इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय आइडिया ऑफ भारत कॉन्फ्रेंस में हिमाचल प्रदेश के वैज्ञानिक अजय शर्मा ने कई साल पुराने न्यूटन की गति के नियम को चुनौती देते हुए दावा किया कि यह नियम गलत है और इसे अधूरे ढ़ंग से पढ़ाया जा रहा है।

331 साल पुराने न्यूटन के तीसरे नियम को भारतीय ने दी चुनौती

इग्नू में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में अजय शर्मा ने उठाए सवाल

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक पद पर तैनात अजय शर्मा ने इग्नू में चल रही अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन न्यूटन गति के तीसरे नियम के बारे में चौंकाने वाले तथ्य पेश किए। अजय शर्मा ने एक तरफ जहां नियम की खामियां गिनाई, वहीं यह भी सिद्ध किया कि न्यूटन की गति के तीसरे नियम को अधूरे ढ़ंग से पढ़ाया जा रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आइडिया ऑफ भारत कॉन्फ्रेंस का शुभारम्भ महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को किया। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर भी इस मौके पर मौजूद थे। शुक्रवार को अजय शर्मा ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। कॉन्फ्रेंस पुस्तिका में पृष्ठ संख्या 7 पर अजय शर्मा का शोधपत्र छपा है। प्रयोगात्मक आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर अजय शर्मा ने कहा कि न्यूटन का नियम वस्तु की प्रकृति, संरचना, विशिष्ठता, कठोरता, लचीलापन, आकार आदि की अनदेखी करता है। नियम के अनुसार विश्व की सभी स्थितियों पर अगर क्रिया (फोर्स या बल) समान है तो प्रतिक्रिया भी समान होनी चाहिए। उपरोक्त प्रभावों या घटकों का प्रतिक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं होना चाहिए जबकि प्रयोगों में उपरोक्त घटक परिणामों को पूरी तरह बदल देते हैं। यह न्यूटन के नियम की सबसे बड़ी खामी है।

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राष्ट्रपति ने किया अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आइडिया ऑफ भारत कॉन्फ्रेंस

अजय शर्मा ने एक ही भार के लोहे की कील और स्प्रिंग को गिरा कर खामी को दर्शाया। स्प्रिंग फर्श से टकरा कर तेजी से ऊपर उछलता है जबकि कील बिल्कुल नहीं उछलती। तीसरे नियम के अनुसार दोनों स्थितियों में प्रतिक्रिया बराबर होनी चाहिए थी। अजय शर्मा ने आगे बताया कि जब हम रबड़ की गेंद को फर्श पर गिराते हैं तो वह टकरा कर ऊपर उछलती है। इस तरह तीसरा नियम इस स्थिति में सही है। अगर उसी गेंद को हम रेत में गिराते हैं तो बिल्कुल ऊपर नहीं उछलती है। इस तरह तीसरा नियम गलत है। शर्मा ने कहा जिन प्रयोगों में न्यूटन का प्रयोग गलत पाया जाता है उनका पाठ्य पुस्तकों में नाम तक नहीं लिया जाता है। शर्मा ने कहा कि नियम की मुख्य खामी यह है कि यह वस्तु की प्रकृति, संरचना, कठोरता, लचीलापन आदि अनदेखी की करता है। इस खामी को दूर करने के लिए न्यूटन के तीसरे नियम में संशोधन किया गया है। संशोधित नियम के अनुसार प्रतिक्रिया, क्रिया के बराबर या भिन्न भी हो सकती है। इस सम्बन्ध में वस्तु की विशेषताएं बहुत महत्वपूर्ण हैं जिनकी न्यूटन का नियम अनदेखी करता है। अजय शर्मा ने कहा दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों में क्रिया और प्रतिक्रिया को बल या फोर्स के रूप में परिभाषित किया जाता है। अजय शर्मा ने दर्शाया कि न्यूटन की पुस्तक प्रिंसिपिया के पृष्ठ 20 के अनुच्छेद 3 के अनुसार क्रिया और प्रतिक्रिया के वस्तु के वेग (विलौसिटी) के रूप में भी परिभाषित होना चाहिए। इस तीसरे नियम फोर्स और वेग के रूप में होनी चाहिए। अन्यथा तीसरे नियम की समझ अधूरी है। काबिले गौर है कि अजय शर्मा की 2013 में कैम्ब्रिज, इग्लैंड से पुस्तक "बियोड न्यूटन एंड आर्किमिडीज" से प्रकाशित हुई है। इसमें नियम को संशोधित किया है।

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