किसी और को जिंदा जलाकर अपनी हत्या का रचा ऐसा स्वांग, गुत्थी सुलझाने में पुलिस के छूटे पसीने

शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में एक रोंगटे खड़ा कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक को कार में जिंदा जलाकर मार डालने व किसी और को मृतक बताकर बीमा कंपनी से पैसे ऐंठने का मामला सामने आया है। पुलिस इसे दुर्घटना मानकर जांच कर रही थी। इस मामले में पुलिस को शक तब हुआ जब दोषियों ने पुलिस से मृत्यु प्रमाणपत्र लेने और बीमा कंपनी से पैसे हड़पने में जल्दीबाजी दिखाई। मामले की गहनता से जांच करने पर पुलिस ने इस केस को सुलझा लिया। पुलिस के अनुसार, असल में कार में सवार शख्स राजस्थान का मजदूर राजू था जिसकी हत्यारोपियों ने की। साथ ही आरोपी ने खुद की मौत का स्वांग रचा और बीमा कंपनी से पैसे हड़पने के फेर में पड़ गए।

पहले बनाया वीडियो फिर किया इंश्योरेंस क्लेम

पहले बनाया वीडियो फिर किया इंश्योरेंस क्लेम

दरअसल, जिला सिरमौर के पावंटा इलाके में 20 नवंबर की रात को एक कार रहस्यमयी तरीके से सड़क के किनारे जली मिली। घटना में कार सवार एक शख्स की जलकर मौत हो गई। हत्या की वारदात को दुर्घटना की शक्ल देने के लिए आरोपियों ने बाकायदा जलती हुई कार का वीडियो बनाया व पुलिस को बताया कि हादसे में उनके रिश्तेदार की मौत हो गई है। वास्तव में इस हादसे में कार सहित राजस्थान के एक मजदूर राजू को जिंदा जलाया गया था ताकि बीमा कंपनी से मुआवजा हड़पा जा सके। आरोपी बीमा कंपनी से लाखों रुपए हड़पकर विदेश भागने की फिराक में थे। घटना में हैरानी की बात यह थी कि हादसे में आकाश के मारे जाने का दावा किया गया था, लेकिन वह अब भी जिंदा है। आरोपियों ने राजू को जिंदा जलाकर मार डाला और दावा किया कि हादसे में आकाश की मौत हो गई है।

डेथ सर्टिफिकेट की जल्दीबाजी ने खोला राज

डेथ सर्टिफिकेट की जल्दीबाजी ने खोला राज

पूरी घटना का सच तब सामने आया जब राजू के परिजन उसके लापता होने की सूचना लेकर पुलिस के पास गए। राजू के भाई ने ही अपने भाई की गुमशुदगी की रिपोर्ट पंजाब के थाना डेराबस्सी में दर्ज कराई। पंजाब पुलिस जांच के सिलसिले में हिमाचल पहुंची तो मामले की भनक सिरामौर के एसपी रोहित मालपानी को लगी और उन्हें शक हुआ। इसके बाद सिरमौर पुलिस ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की। पुलिस जांच के दौरान मारे गए शख्स के कथित परिजनों से पुलिस ने जब डीएनए सैंपल देने को कहा तो वह आनाकानी करने लगे। साथ ही पुलिस से डेथ सर्टिफिकेट लेने के लिए आकाश के करीबियों ने जब जल्दबाजी दिखाई, तो उनपर पुलिस को शक हुआ। राजू के भाई ने पुलिस को बताया कि उसका भाई आकाश के साथ ही काम करता था। एक तरफ आकाश की मौत तो दूसरी ओर राजू की गुमशुदगी ने पुलिस को उलझा दिया था। इधर कार में जिंदा जले शख्स की शिनाख्त उसकी पत्नी व बेटी ने आकाश के रूप में कर दी थी।

सीसीटीवी कैमरे ने खोला राज

सीसीटीवी कैमरे ने खोला राज

सिरमौर के एसपी वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि आकाश की मौत का डेथ सर्टिफिकेट लेने की जल्दबाजी और राजू की गुमशुदगी की रिपोर्ट को आधार बनाकर एसपी रोहित मालपानी के निर्देशों पर जांच शुरू की गई और दस दिनों में ही असली कातिलों का पता चल गया। शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों को जब खंगाला गया तो असली कातिलों का पता चल गया। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आकाश ने स्विफ्ट कार में मजदूर राजू को बिठाया था, जबकि पीछे सैंट्रो कार में 28 वर्षीय भतीजा रवि मौजूद था। वारदात को अंजाम देने से पहले यह दोनों कारें नाहन शहर में देखी गईं थी। सीसीटीवी कैमरों में दोनों ही कारों में एक या दो मिनट का अंतर होने से पुलिस का शक और मजबूत हो गया।

पैसे हड़पकर विदेश भागने का था प्लान

पैसे हड़पकर विदेश भागने का था प्लान

एसपी वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि आकाश की मौत का डेथ सर्टिफिकेट लेने की जल्दबाजी में भतीजा रवि जब नाहन पहुंचा तो उससे गहनता से पूछताछ कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद इस पूरे मामले का खुलासा हो गया। उन्होंने बताया कि पुलिस की तफ्तीश को भटकाने के लिए बकायदा मुख्य आरोपी ने खुद की जान को खतरा बताकर एक पत्र भी वायरल किया था। पत्र के मुताबिक वह देहरादून जा रहा था। हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आकाश विदेश जाने की फिराक में था। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आकाश की बेटी साइप्रस में पढ़ाई कर रही है। बेटा पंजाब विश्वविद्यालय का छात्र है। पुलिस को उसके नेपाल या फिर साइप्रस जाने का शक था। लिहाजा, उसे दबोचने के लिए जाल बिछाया गया और बिहार-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित जलालपुर में उसे दबोच लिया गया।

जिंदा शख्स को मृत बताकर करवाया अंतिम संस्कार

जिंदा शख्स को मृत बताकर करवाया अंतिम संस्कार

एएसपी वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि मजदूर की बेरहमी से हुई हत्या को दुर्घटना का रूप दिया गया और फिर आरोपी ने अपनी ही मौत का स्वांग रच दिया। यहां तक कि परिवार के लोगों ने मृतक मजदूर राजू की आकाश के रूप में शिनाख्त कर मृत्यु के बाद निभाए जाने वाले अंतिम संस्कार भी करवा दिए। 14 दिनों के बाद लोगों व सगे संबंधियों को भोग भी खिलाया गया। हालांकि, परिवार के लोग इस षड्यंत्र में शामिल थे या नहीं, इसका पता अभी नहीं चला है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है। राजस्थान के गरीब परिवार के बेटे राजू को पहले शराब पिलाना, फिर गला घोटकर अधमरा करना और फिर तारपीन का तेल छिड़ककर जला देने वाली वारदात रोंगटे खड़े करने वाली है। राजू हत्याकांड मामले में पूरे परिवार की भूमिका संदेह के घेरे में है। लिहाजा, पुलिस फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इस मामले में परिवार के लोगों से भी पुलिस गहन-पूछताछ कर सकती है।

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