70 भारतीय मजदूरों को छुड़ाने पहुंचे ASI और हेड कॉन्स्टेबल को नेपाली पुलिस ने रोका, लौटना पड़ा खाली हाथ

Shahjahanpur news शाहजहांपुर। नेपाल में काम करने गए मजदूरों को ईट-भट्टे के काम पर बंधक बनाने के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। इस घटना की जांच करने के लिए जब एसएसआई और कांस्टेबल नेपाल पहुंचे तो वहां पर ईट-भट्टा मालिक ने विवाद कर दिया। उसके बाद नेपाल पुलिस ने पुलिसकर्मियों को थाने पर बैठा लिया। नेपाल पुलिस ने यहां के पुलिसकर्मियों का बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया। हालांकि नेपाल पुलिस से छूटे पुलिसकर्मियों ने यहां आकर आलाधिकारियों को सूचना दी। उसके बाद अब एसपी दूतावास के जरिए बात करने की बात कर रहे हैं।

नेपाल पहुंचे थे ASI और हेड कॉन्स्टेबल

नेपाल पहुंचे थे ASI और हेड कॉन्स्टेबल

दरअसल घटना थाना तिलहर की है। यहां के रहने वाले मजदूरों के परिवार ने 12 मार्च को एसपी को प्रार्थना पत्र देकर मजदूरों को नेपाल से छुड़ाने की मांग की थी। उसके बाद पुलिस ने जांच कर कार्यवाई करने की बात की थी। पुलिस को जांच में घटना सही मिली। उसके बाद पुलिस ने आरोपी ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। तिलहर थाने के एसएसआई वीके मौर्य और हेड कॉन्स्टेबल अनीस को जांच करने के लिए नेपाल भेजा गया था। जहां दोनों पुलिसकर्मी नेपाल में उस ईट-भट्टे पर पहुंचे। जहां पर मजदूरों को बंधक बनाने का आरोप लगा था। बताया जा रहा है कि जब पुलिसकर्मी भट्टे पर पहुंचे तो ईट भट्टे मालिक ने पुलिसकर्मियों से विवाद करना शुरू कर दिया। जिसके बाद वहां पर नेपाल की स्थानीय पुलिस को बुला लिया गया। नेपाल पुलिस ने हिंदुस्तान के पुलिसकर्मियों को सहयोग करने के बजाए उनको थाने पर बैठा लिया। उसके बाद जैसे तैसे पुलिसकर्मियों को छोड़ा गया। उसके बाद वह वापस शाहजहांपुर पहुंचे। जहां उन्होंने घटना की जानकारी एसपी एस चिनप्पा को दी।

नेपाली पुलिस ने की गतल सलूक

नेपाली पुलिस ने की गतल सलूक

एसपी एस चिनप्पा का कहना है कि घटना की जानकारी मिली है। नेपाल पुलिस ने हमारी पुलिस को बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया। उन्होंने काफी अभद्रता की है। इस मामले की जानकारी दूतावास में दी जाएगी। दूतावास के जरिए ही घटना की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

ठेकेदार ने 70 मजदूर को नेपाल में बेचा

ठेकेदार ने 70 मजदूर को नेपाल में बेचा

आपको बता दें कि तिलहर थाना क्षेत्र के रहने वाले मजदूरों के परिवार ने 12 मार्च को एसपी को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि थाना निगोही के रहने वाले ठेकेदारों ने गांव के करीब 70 मजदूरों को काम दिलाने का झांसा दिया था। उसके बाद ठेकेदार के कहने पर सभी मजदूर गोला गए। जहां से उनको नेपाल भेज दिया गया। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी वह लोग वापस नहीं लौटे तो उसके बाद मजदूरों की जानकारी करने परिवार के लोग ठेकेदार के पास गए तो वह मारपीट पर उतारू हो गए। ठेकेदार ने बताया कि मजदूरों को नैपाल मे ईट भट्टे पर बेच दिया गया है। उसके बाद मजदूरों ने परिवार को फोन किया। फोन पर मजदूर खुद को बचाने की गुहार लगा रहे थे। उसके बाद मजदूरों के परिवारों ने पुलिस का सहारा लिया था।

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