MP News: सतना सेंट्रल जेल में भागवत कथा का आयोजन, बंदियों की मानसिकता बदलने की अनूठी पहल

सतना सेंट्रल जेल में 1850 से ज्यादा कैदी सजा काट रहे हैं। उनकी मनोदशा सुधारने और उनको अपराध की दुनिया से बाहर निकालने के लिए जेल प्रबंधक ने श्रीमद्भागवत कथा का सहारा लिया है।

मध्य प्रदेश के सतना सेंट्रल जेल में इन दिनों एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां पर कैदियों के बीच में ज्ञान की गंगा बह रही है। दरअसल, जेल अधीक्षक की पहल पर रेप, चोरी, मारपीट, हत्या के प्रयास,डकैती और लूट जैसे संगीन अपराधों में सजायाफ्ता कैदियों को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराया जा रहा है।

 अपराध की दुनिया से बाहर लाने के लिए कथा का सहारा

अपराध की दुनिया से बाहर लाने के लिए कथा का सहारा

जानकारी के मुताबिक सेंट्रल जेल में 1850 से ज्यादा कैदी सजा काट रहे हैं। उनकी मनो दशा सुधारने के लिए और उनको अपराध की दुनिया से बाहर लाने के लिए जेल प्रबंधक ने श्रीमद भागवत कथा का सहारा लिया है। इसी वजह से सतना सेंट्रल जेल में भागवत कथा का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में कैदी हिस्सा ले रहे हैं।

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    4 मार्च को विशाल भंडारा

    4 मार्च को विशाल भंडारा

    सतना सेंटर जेल में विंध्य क्षेत्र के साथ-साथ बुंदेलखंड के बंदी भी सजा काट रहे हैं। जेल में बंदियों की संख्या 1850 है। खास बात ये है कि बन्दियों के साथ-साथ जेल प्रबंधन भी श्रीमद भागवत कथा का रसपान कर रह हैं। श्रीमद भागवत कथा का समापन 4 मार्च को विशाल भंडारा के साथ होगा।

     सेंट्रल जेल की अधीक्षक लीना कोष्टा ने बताया

    सेंट्रल जेल की अधीक्षक लीना कोष्टा ने बताया

    सेंट्रल जेल की अधीक्षक लीना कोष्टा ने बताया कि आज केंद्रीय जेल सतना में सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा शुरू हुई है। 26 तारीख से 4 मार्च तक चलेगा। रामानंदाचार्य रामलला जी द्वारा भागवत गीता सुनाई जा रही है। इसका मकसद ये है। कि कैदी जेल में किसी न किसी अपराध की सजा काट रहे हैं। वो भी समाज का महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने जाने अनजाने में अपराध की दुनिया में कदम रखा। लेकिन इन्हें भी एक बार सुधरने का मौका मिलना चाहिए। जब कैदी यहां से सजा काटकर अपने घर वापस जाएं तो यह भी मुख्यधारा में लौट कर समाज का हिस्सा बनेंगे। इसलिए इनके लिये भी ऐसे धार्मिक आयोजन जरूरी है। जेल में कैदी बाहरी दुनिया से बिल्कुल कटे रहते हैं। जेल के अंदर ऐसे धार्मिक आयोजन इन कैदियों की मानसिक सोच में भी सकारात्मक बदलाव लाएंगे।

    जेल में बंद बंदी ने क्या कहा

    जेल में बंद बंदी ने क्या कहा

    बंदी ब्रजेश तिवारी ने जानकारी दी कि श्रीमद्भागवत गीता से बंदियों को एक सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। उसके सुनने के पश्चात यह एहसास होता है कि जो अपराध करके आए हैं। उस अपराध से मुक्ति मिलती है कि भविष्य में ऐसा न करने की सीख मिलती है। ऐसे आयोजन से सकारात्मक भाव आता है और अच्छी सीख मिलती है। ऐसे कार्यक्रम हमेशा आयोजित होते रहने चाहिए।

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