Satna news : 4 साल पहले खो गया था बच्चा, आधार कार्ड की तकनीकी ने परिवार से मिला दिया
उमरिया जिले के पथरहाटा गांव से 11 वर्षीय ऋषभ लापता हो गया था. कुछ महीनों के बाद सतना स्टेशन पर ऋषभ मिल गया लेकिन मूक-बधिर ऋषभ न तो बोल सकता था और न ही लिख सकता था।

आधार कार्ड के कई फायदे हैं। व्यक्ति की विशिष्ट पहचान से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक आधार कार्ड का ही उपयोग किया जाता है, लेकिन आजकल इससे लापता लोगों को मिलाने का काम भी किया जा रहा है। हम कह सकते हैं कि यह सिर्फ एक कार्ड नहीं बल्कि एक ऐसा दस्तावेज बन गया है जिससे आप जहां भी हैं, आपकी पहचान कभी नहीं मिट सकती. यहां हम आपको आधार कार्ड के मानवीय पक्ष से जुड़ी एक असल स्टोरी बताने जा रहे हैं।

सतना में 4 साल से बिछड़े एक मासूम विकलांग बच्चे को उसके परिवार से मिलाने में आधार कार्ड बड़ा सहारा बना. दरअसल, अपने परिवार से बिछड़कर सतना पहुंचे मानसिक रूप से विक्षिप्त ऋषभ को आधार कार्ड ने अपने परिवार से मिला दिया. बाल कल्याण समिति रीवा से ऋषभ 1 साल बाद इंदौर शिफ्ट हो गया था। यह बच्चा 4 साल पहले उमरिया जिले के पथरहाटा गांव से लापता हो गया था. कुछ माह बाद ऋषभ सतना स्टेशन पर मिल गया, लेकिन ऋषभ कुछ बोल नहीं पा रहा था। सतना जीआरपी पुलिस ने जांच की लेकिन किशोर का कुछ पता नहीं चला तो उसे रीवा बाल गृह भेज दिया गया, जहां उसकी देखरेख की गई।
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उमरिया जिले से हुआ था गुमशुदा
ऋषभ के परिजनों ने उमरिया थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और अपने स्तर पर सभी जगह तलाश की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. मायूस होकर परिवार ने घर के चिराग से मिलने की उम्मीद छोड़ दी। लेकिन अचानक एक फोन कॉल ने उनकी उम्मीद जगा दी। 15 दिन के इंतजार के बाद उसे घर का चिराग भी मिल गया।

आधार कार्ड से नाम पता से जानकारी
यह सब फिंगरप्रिंट की मदद से हुआ। दरअसल, जब ऋषभ 7 साल का था तब घरवालों ने ऋषभ का आधार कार्ड बनवाया था। ऋषभ का फिंगर प्रिंट कंप्यूटर मेमोरी में सेव हो गया था। इंदौर में ऋषभ की बाल कल्याण समिति ने आधार कार्ड बनवाने का प्रयास किया लेकिन फिंगर प्रिंट नहीं लिया जा रहा था. फिर जब अत्याधुनिक तकनीक से फिंगर प्रिंट का मिलान किया गया तो किशोर ऋषभ के फिंगर प्रिंट का मिलान 7 साल पहले आधार कार्ड से हुआ। नाम, पिता और पता की जानकारी हुई।

परिजनों को मोबाइल नंबर में दी गई जानकारी
आधार कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो पता चला कि ऋषभ चार साल पहले लापता हो गया था। कानूनी कार्रवाई के बाद ऋषभ को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। घरवालों को देख ऋषभ भी खिलखिला उठा और घरवालों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

परिजनों के आंख में निकले खुशी के आंसू
सतना बाल कल्याण समिति ने कार्यक्रम आयोजित कर ऋषभ को उसके परिजनों को सौंप दिया। ऋषभ के परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। टीम को साधुबाद दी वही बाल कल्याण समिति के सदस्य भी कभी खुश नजर आए और एक मूक बधिर किशोर को उसके परिजनों को सौप गर्व महसूस कर रहे।












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