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शादी समारोह में मर्द-औरत का साथ में भोजन करना हराम, दारुल उलूम का फतवा

सहारनपुर। यूपी के सहारनपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने तीन अलग-अलग मुद्दों पर पूछे गए सवालों के जवाब में फतवा जारी किया है। पहले फतवे में एक साथ शादी समारोह में पति-पत्नी के खाना खाने को हराम करार दिया है। वहीं दूसरे फतवे में शादी में रस्म के तौर पर दिए जाने वाले सलामी की नापसंदीदा अमल कहा गया है। तीसरे फतवे में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति फोन पर बात करते समय किसी का भी कॉल रिकॉर्ड करता है तो उसे भी गलत ठहराते हुए गुनाह करार दिया है।

शादी में पति-पत्नी का साथ खाना-खाना है हराम

शादी में पति-पत्नी का साथ खाना-खाना है हराम

दारुल उलूम ने किसी भी शादी समारोह में मर्द और औरत के एक साथ भोजन करने को हराम करार दिया गया है। दारुल उलूम का यह ताजा फतवा चर्चा का विषय बना हुआ है। दारुल उलूम देवबंद ने अपने ताजा फतवे में विवाह या अन्य समारोह में मर्द और औरतों के एक साथ खाना-खाने व खिलाने को हराम बताया है।

कस्बा देवबन्द के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने दारुल उलूम के इफ्ता विभाग से लिखित सवाल किया था कि विवाह, बर्थ डे पार्टी अथवा अन्य अन्य बड़े समारोह में आजकल औरतों और मर्दों को एक साथ खाना खिलाने का चलन है। इस तरह का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है, क्या इस तरह सामूहिक खाना करना सही है अथवा गलत। इसके जवाब में दारुल उलूम ने जारी फतवे में कहा है कि सामूहिक रूप से मर्दों और औरतों का एक साथ शामिल होकर भोजन करना हराम है।

दूल्हे का सलामी पर दुल्हन के घर जाना गलत- दारुल उलूम

दूल्हे का सलामी पर दुल्हन के घर जाना गलत- दारुल उलूम

मजहब इस्लाम एक दूसरे को सलामती की दुआ देने यानी सलाम करने की तालीम देता है लेकिन अगर इसे भी रस्म के तौर पर इस्तेमाल किया जाए तो यह इस्लाम में नापसंदीदा है। ऐसा ही एक फतवा दारुल उलूम देवबंद से जारी हुआ है, जिसमें रस्म के तौर पर दूल्हे का सलामी के लिए दुल्हन के घर जाना नापसंदीदा अमल बताया गया है। वहीं ससुराल आकर दुल्हन की मुंह दिखाई करने की रस्म को भी छोड़ने की ताकीद की गई है।

देवबंद के ही गांव इमलिया के रहने वाले मुदस्सिर सिद्दीकी ने दारुल उलूम देवबंद से लिखित सवाल किया था कि शादी के मौके पर दूल्हा का सलामी के लिए दुल्हल के घर जाना और नामहरम औरतों को सलाम कर उनसे गिफ्ट वगैरहा लेना कैसा है। साथ ही यह भी पूछा गया था कि इसी तरह दुल्हन के पहली बार ससुराल जाने पर उसकी मुंह दिखाई की जाती है, मुंह देखने वालों में नामहरम भी शामिल होते हैं। इतना ही नहीं खीर आदि चटाने की रस्में भी की जाती हैं। इन सबके बारे में शरई हुक्म क्या है। पूछे गए सवाल के जवाब में दारुल उलूम के मुफ्तियों की खंडपीठ ने जारी फतवे में कहा है कि यह सब बाते रसूम ए कबीहा (नापसंदीदा अमल) हैं। इन सबसे बचना जरूरी है। कुरआन ने औरत को पर्दे का हुक्म दिया है, इसलिए मुंह दिखाई के नाम पर नामहरम लोगों को दुल्हन का मुंह दिखाना सरासर गलत है।

 कॉल रिकॉर्ड करना गुनाह

कॉल रिकॉर्ड करना गुनाह

टेक्नोलोजी के इस युग में जहां मोबाइल से की जाने वाली हर एक कॉल को रिकॉर्ड करना आम बात हो गया है। वहीं अपने फतवों के लिए दुनियाभर में मशहूर दारुल उलूम देवबंद से निकले एक फतवे में बिना इजाजत किसी भी व्यक्ति की कॉल रिकार्ड करने को गुनाह व अमानत में ख्यानत बताया गया है। सऊदी अरब के एक व्यक्ति ने दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग से सवाल किया था कि आजकल मोबाइल वगैरह पर आवाज रिकॉर्ड करना आम हो गया है। हालांकि जिस व्यक्ति की आवाज रिकॉर्ड की जा रही है वह इससे बेखबर होता है। ऐसे में बहुत से व्यक्तियों की निजी बाते आम हो जाती हैं जो उनके लिए रुसवाई का सबब भी बनती हैं।

पूछे गए सवाल के जवाब में मुफ्तियों की खंडपीठ ने जारी किये फतवे में साफ कहा है कि दो व्यक्तियों की आपस में जो बातचीत होती है वह दोनों के लिए अमानत होती है। इसलिए जिससे बात की जा रही है उसकी इजाजत के बगैर उसकी बातों को फोन में या फिर किसी और चीज में रिकॉर्ड करना दुरुस्त नहीं है। खासतौर पर तब जब बात करने वाला व्यक्ति आपको भरोसेमंद समझते हुए अपने दिल की या फिर कोई राज की बात आपसे कर रहा हो। फतवे में कहा गया है कि मोबाइल पर निजी बातचीत को रिकार्ड कर वायरल कर देना इस्लाम की नजर में अमानत में ख्यानत है। और ख्यानत करना इस्लाम के अनुसार गुनाह है।

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