Sagar News: 'तिजौरी' ने किया मायूस, ताला खुलते ही टूटी 'खजाने' की आस
'खजाने' की आस में अंग्रेजों के समय की जिस 'तिजौरी' को पुलिस थाने में दो दिन से सुरक्षा के साये में रखा गया था, वह तिजौरी खाली निकली है। ताला खुलते ही लोगों की आस टूट गई जिसमें वे उम्मीद लगाए थे कि शायद इसमें सोना-चांदी, जेवर, हीरे-मोती निकल सकते हैं।

दरअसल मप्र के सागर जिले में बीना जंग्शन के अधीन करोंद रेलवे स्टेशन के पास तीसरी लाइन के ट्रैक के किए खुदाई का काम चल रहा है। दो दिन पहले यहां रेलवे के एक पुराने भवन को तोड़ने के दौरान अंग्रेजों के समय निर्मित एक पुरानी भारी-भरकम तिजौरी निकली थी। जमीन से उसे उखाड़कर निकाला गया तो गांव वाले उस पर दावा ठोकने लगे और तिजौरी को छीनने का प्रयास भी किया था। तिजौरी को सुरक्षित थाने में रखवा दिया गया था। तिजौरी को जब खोलने के लिए डंपर से नीचे उतारा जा रहा था, उस दौरान वह जमीन पर गिरकर टूट गई। उसके अंदर खजाना तो ठीक एक कागज का टुकड़ा तक नहीं निकला।
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RPF और भानगढ़ Police की मौजूदगी में खोल रहे थे
तिजौरी को रेलवे ठेकेदार ने भानगढ़ थाना पुलिस की कस्टडी में रखवा दिया था। इसे जिस डंपर में रखकर लाया गया था, उसी में रखे रहा। थाना परिसर में सीसीटीवी की निगरानी में दो दिन तक तिजौरी की पुलिसकर्मी सुरक्षा करते रहे। उत्तर प्रदेश के ललितपुर की आरपीएफ और भानगढ़ पुलिस की मौजूदगी में इसे करोंदा स्टेशन पर खोला गया। जब करोंदा स्टेशन में तिजोरी को खोलने के लिए डंपर से नीचे उतारा गया, उसी समय तिजोरी नीचे गिरने से टूट गई। जब उसे खोलकर देखा गया, तो वह खाली निकली। जबकि उम्मीद थी कि इसमें कीमती जवाहरात और सोना-चांदी निकल सकता है।
टिकट बिक्री के रुपए रखते थे पहले
तिजौरी को लेकर रेलवे के अधिकारियों को पहले से आशंका थी कि वह खाली निकलेगी। कारण रेलवे रिकॉर्ड में इस तरह की तिजौरी का उल्लेख है, जिसमें रेलवे टिकट की ब्रिकी के बाद रुपए रखने के लिए रेलवे विभाग की तरफ से इन्हें उपलब्ध कराया जाता था। इनकी चोरी या डकैती की आशंका के चलते इन्हें जमीन में गाड़ा जाता था, केवल ऊपर से इन्हें खोला जा सकता था।












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