मच्छरों ने मुसीबत में डाला, 72 हजार का पाउडर, 20 लाख में नष्ट होगा
मच्छरों को मारने के लिए मध्य प्रदेश के दमोह जिले में मलेरिया विभाग ने बेंजीन हेक्साक्लोराइड (बीएचसी) खरीदा था। साल 1990 में इसकी कुल कीमत 70 हजार रुपए थी। बाद में पता चला कि इससे मवेशियों की जान जा रही है, इस कारण इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब इसको नष्ट करने में ही 20 लाख रुपए का खर्च बताया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में मलेरिया विभाग ने 32 साल पहले मच्छर मारने के लिए महज 72 हजार रुपए में 484 बोरी बेंजीन हेक्साक्लोराइड (बीएचसी) पाउडर खरीदा था। बाद में पता चला यह जहरीला है तो उपयोग बंद कर दिया गया। अब इसको नष्ट करने के लिए 20 लाख रुपए से अधिक का खर्च आ रहा है।
दमोह जिले में साल 1990 में 484 बोरियां बीएचसी पाउडर खरीदा गया था, जब सड़कों पर मच्छर मारने के लिए इसका छिड़काव कराया गया तो जानवरों की मौत होने का मामला सामने आया था। सरकार ने तत्काल के उपयोग पर रोक लगा दी थी। तब से अब तक यह मलेरिया विभाग के कार्यालय में रखा हुआ है। इसको नष्ट कराने के लिए हैदराबाद भेजना होगा, जहां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमानुसार इसको नष्ट किया जाएगा। इस सब में करीब 20 लाख रुपए का खर्च आ रहा है।
मलेरिया विभाग साल-दर-साल पत्र लिख रहा है
मलेरिया विभाग साल 1996 से साल दर साल इस बीएचपी पाउडर को नष्ट कराने के लिए वरिष्ठ कार्यालय और शासन को पत्र पर पत्र लिख रहा है। बावजूद इसके इस जहरीले व जानलेवा पाउडर को नष्ट करने की अनुमति नहीं मिल पा रही है। दरअसल शासन के पास इस पाउडर को नष्ट कराने के लिए तकनीकि व्यवस्था नहीं है। हैदराबाद की रेमको कंपनी से बात चल रही थी, लेकिन टेंडर के बाद कोई भी कंपनी आगे नहीं आई है। इस कारण दमोह ही नहीं प्रदेश के कई जिलों में यह पाउडर नष्ट करने के इंतजार में रखा हुआ है।












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