MP: कैंट बोर्ड चुनाव टलने के पीछे क्या वजह, क्या नगर निगम में विलय की तैयारी की जा रही?
सागर कैंट बोर्ड के चुनाव की सारी प्रक्रिया निरस्त होने के बाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में छावनी इलाके के असैन्य क्षेत्र के नगरीय निकाय में विलय की हवा एक बार फिर चलने लगी है।

निर्वाचन आयोग और सरकार ने कराए जा रहे कैंट बोर्ड के चुनाव निरस्त कर दिए हैं। चुनाव निरस्त होने का स्थानीय प्रशासन से लेकर कैंट बोर्ड के अधिकारियों और आला अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं है कि आखिर चुनाव क्यों निरस्त किए गए। हालांकि इसके पीछे एक नई सुगबुगाहट सामने आई है। इसमें बताया जा रहा है कि चुनाव टालने के पीछे कैंट के असैन्य क्षेत्र को निगम में विलय किया जा सकता है। हालांकि इसको लेकर स्पष्ट रूप से किसी कोई जानकारी नहीं आई है।
छावनी परिषद के मप्र सहित तमाम कैंट बोर्ड में चुनाव कराए जा रहे थे। अचानक दो दिन पहले एक आदेश जारी कर चुनाव निरस्त कर दिए गए हैं। चुाव निरस्त होने के पीछे की वजय यह भी बताई जा रही है कि कैंट के ऐसे इलाके जो सिविलयन में आते हैं उनको नगर निगम में मर्ज किया जा सकता है। यह प्रक्रिया सिर्फ सागर ही नहीं देश भर के छावनी परिषद में बन रही थी। सरकार ने पिछले दिनों कलेक्टर्स से इस आशय का प्रस्ताव भी मांगा था। सागर कलेक्टर पहले साल 2022 में और हाल ही में दूसरी दफा प्रस्ताव भेजा है।

महाराष्ट्र में कैंट एरिया की नगर निगम में मर्जिंग की शुरूआत
बता दें कि देश में महाराष्ट्र में सबसे पहले कैंट परिषद के असैन्य क्षेत्र के वार्डों और भूमि को स्थानीय नगर निगमों में विलय कि प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। बात मप्र की करें तो सागर सहित ग्वालियर का मुरार, जबलपुर, इंदौर का मऊ और नर्मदापुरम का पचमढ़ी कैंट का असैन्य इलाका नगर निगम या नगरीय निकायों में मर्ज करने के लिए विलय के प्रस्ताव मांगे गए थे।
कलेक्टर दो दफा भेज चुके हैं प्रस्ताव
सागर कलेक्टर छावनी परिषद के असैन्य इलाके को नगर निगम में मर्ज करने के लिए दो दफा शासन को प्रस्ताव भेज चुके हैं। सबसे पहले 2 दिसंबर 2022 को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद हाल ही में यह प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें कैंट की कुल 4016.73 एकड़ जमीन में से सेना के लिए आरक्षित जमीन 1547.72 एकडऋ को छोड़कर 2469.012 एकड़ का रकबा जो असैन्य क्षेत्र है उसे निगम में मर्ज करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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मर्जर से क्या फायदा होगा
कैंट इलाके के लोगों पर कई तरह के प्रतिबंध रहते हैं, तो वे राज्य और केंद्र सरकार की बड़ी-बड़ी योजनाओं से वंचित भी रहते हैं। यदि इनका नगर निगम में विलय होता है तो इन्हें मकान बनाने के लिए नगर निगम से स्वीकृति मिलने लगेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिलने लगेगा। सीवर और पानी की पाइप लाइन इलाके में डालकर इनको भवनों से जोड़ा जा सकेगा। यहां 24 घंटे पानी की सप्लाई की जा सकेगी। इसके अलावा राज्य सरकार और केंद्र सरकार की अन्य सभी येाजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
कैंट इलाके कुल जमीनों की स्थिति
ए-1 - 1547.72 एकड़
ए-2 - 112.17 एकड़
बी-1 - 64.69 एकड़
बी-2 - 48.96 एकड़
बी-3 - 634.27 एकड़
बी-4 - 1323.65 एकड़
सी- 140.76 एकड़
निजी भूमि: 3.40 एकड़
बाजार सिविल एरिया: 141.093 एकड़
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