केजरीवाल की खुली पोल- 3 साल में बना पाए हैं केवल तीन स्कूल
नई दिल्लीः मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के नेता दिल्ली सरकार के कामों की तारीफ करते नहीं थकते हैं। हाल ही में दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने देश के दूसरे राज्यों को शिक्षा के क्षेत्र में खुली चुनौती देते हुए कहा कि तीन साल में इतने स्कूल बनाकर दिखाएं, जितने उन्होंने बनाएं हैं। साथ ही शिक्षा में कई दूसरे कामों को भी गिनवाया, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

आरटीआई से मिली जानकारी
दिल्ली सरकार लगभग अपने तीन साल पूरे करने वाली है और इन तीन सालों में केवल तीन ही स्कूल बनाए हैं। ये जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिली है। दैनिक जागरण में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 16 अक्टूबर को सुभाष विहार निवासी पंकज जैन ने आरटीआई दायर की थी जिसमें दो सवाल पूछे थे।

आरटीआई में पूछे थे दो सवाल
आरटीआई दायर करके पंकज जैन ने दो सवाल पूछे थे- दिल्ली सरकार के सत्ता में आने से अब तक कितने नए स्कूल खोले हैं? दूसरा सवाल था- पुराने स्कूलों में नए कमरे बनवाने व मरम्मत करने में कितना खर्च हुआ? लोक निर्माण विभाग (दक्षिण) के सहायक जन सूचना अधिकारी 14 नवंबर को इन सवालों के जवाब दिए।

तीन साल में बनाए हैं तीन सवाल
आरटीआई के जवाब में बताया कि कुल तीन नए स्कूल बनाए गए हैं व पुराने स्कूलों में नए कमरे बनाने में 383 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। बता दें, दिल्ली में बड़े-बड़े होर्डिग, पोस्टर के जरिए आम आदमी पार्टी द्वारा प्रचार किया जा रहा है कि दिल्ली सरकार ने स्कूलों में 5695 नए कमरे बनाए हैं।

1982 करोड़ रुपया लैप्स हुआ है
बता दें, केजरीवाल ने दावा किया है कि उन्होंने अभी तक पेश बजट में शिक्षा मद में सबसे अधिक धन आवंटित किया है। वहीं पिछले दो सालों के दौरान आवंटित बजट में से सरकार तकरीबन दो हजार करोड़ रुपये भी खर्च नहीं कर पाई। गत दो वर्ष में शिक्षा के बजट में से 1982 करोड़ रुपया लैप्स हुआ है।












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