ऋषि कपूर के परदादा ने गर्लफ्रेंड के घर तक खोद डाली थी सुरंग, किताब ‘खुल्लम-खुल्ला' में किए कई खुलासे
ऋषि कपूर के परदादा ने गर्लफ्रेंड के घर तक खोद डाली थी सुरंग, किताब ‘खुल्लम-खुल्ला' में किए कई खुलासे
नई दिल्ली। ऋषि कपूर बेबाक और विंदास थे। लीक तोड़ कर चलने वाले इंसान थे। जो देखा, सुना और महसूस किया उसे बेधड़क बोल दिया। उनके जैसा इंसान ही अपने परदादा और पिता की प्रेम कहानियों पर कलम चला सकता था। उन्हें इस बात की बिल्कुल परवाह न थी कि जब लोग यह पढ़ेंगे तो क्या कहेंगे। इतना ही नहीं ऋषि कपूर ने अपनी दादी रामशरणी कपूर की सुंदरता की भी दिल खोल कर तारीफ की है। उन्होंने अपनी किताब 'खुल्लम खुल्ला- ऋषि कपूर दिल से’ में कई ऐसे प्रसंग लिखे हैं जिनको पढ़कर आम आदमी को हैरानी हो सकती है।
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परदादा की गर्लफ्रैंड
ऋषि कपूर (चिंटू) ने अपने परदादा को देखा तो नहीं था लेकिन उनसे किस्से जरूर बयां किये। उनके परदादा का नाम बशेशरनाथ कपूर (बशेस्वरनाथ सिंह कपूर) था। वे अंग्रेजी राज में तहसीलदार थे। लोग उन्हें दीवान साहब कह कर बुलाते थे। ऋषि कपूर ने लिखा है- मेरे परदादा को 36 साल की उम्र में नौकरी से इसलिए बर्खास्त कर दिया गया था क्योंकि वे अपनी गर्लफ्रैंड के घर तक सुरंग खोदते हुए पकड़े गये थे। उन्होंने अपने परदादा की दिलफेंक छवि के बारे में बताया है- एक बार एक अंग्रेज अधिकारी ने बशेशरनाथ से कहा, आपकी घोड़ी (वे घोड़ी पर चलते थे) बहुत अच्छी है। इस पर उनेक परदादा ने कहा, आपकी गोरी (पत्नी) बहुत अच्छी है। चूंकि मेरे परदादा और पिता (राज कपूर), दोनों वर्जानाओं को तोड़ कर चलने वाले लोग थे इसलिए दोनों में बहुत पटती थी। ऋषि कपूर ने अपनी दादी के बारे में लिखा है- मेरी दादी रामशरणी कपूर युवावस्था में अपूर्व सुंदरी थीं। वे जहां भी जातीं लोगों की आंखें उन्हीं पर अटक जातीं। दादी की सुंदर नीली आंखें आज तक कपूर खानदान की पहचान बनी हुई हैं।

पिता राजकपूर के अफेयर्स
ऋषि कपूर ने अपने पिता राज कपूर के बारे में लिखा है- उन्हें ऐसे दुस्साहसी मर्द पसंद थे जो मर्यादाओं की सीमा को पार करने की हिम्मत रखते थे। उन्होंने नरगिस और वैजयंतीमाला के साथ अपने पिता के प्रेम संबंधों के बारे में लिखा है। "वे प्रेम में डूबे हुए व्यक्ति थे। लेकिन उस समय उनकी प्रेमपात्र मेरी मां नहीं बल्कि एक अन्य महिला थीं। उनकी यह महिला मित्र उस समय की सफलतम नायिका थीं। वे आर के स्टूडियो के प्रतीक चिह्न में स्थान पा कर हमेशा के लिए अमर हो चुकी थीं।" ऋषि कपूर के मुताबिक, फिल्म अंदाज के सेट पर राज कपूर, नरगिस को दिल दे बैठे थे। नर्गिस और राज कपूर उस समय की सबसे सफल जोड़ी थी। दोनों लगातार 8 हिट फिल्में दे चुके थे। नरगिस, राज कपूर से शादी करने पर अड़ी हुई थीं। लेकिन राज कपूर के शादीशुदा होने की वजह से ऐसा मुमकिन नहीं था। नरगिस ने उस समय के कई वकीलों से राय ली थी कि क्या किसी शादीशुदा व्यक्ति से उनकी शादी मुमकिन है। राज कपूर घर परिवार छोड़ने पर राजी नहीं थे। आखिरकार 1956 में दोनों को अलग होना पड़ा। कुछ साल बाद एक पार्टी में नरगिस और कृष्णा कपूर (ऋषि कपूर की मां) की मुलाकात हुई । नरगिस ने ऋषि कपूर की मां से माफी मांगी और कहा कि आपकी जिंदगी की सारी परेशानियों की वजह मैं हूं। इस पर कृष्णा कपूर ने कुछ नहीं कहा और नरगिस को माफ कर दिया था।

जब ऋषि कपूर की मां ने छोड़ दिया था घर
नरगिस से अलग होने के बाद राज कपूर अपनी पत्नी कृष्णा कपूर के पास लौट आये थे। लेकिन कुछ समय बाद उनका नाम वैजयंतीमाला से जुड़ गया। दोनों के अफेयर के चर्चे होने लगे। फिर यह अफवाह उड़ी कि राज कपूर ने वैजयंती माला से शादी कर ली है। इन बातों से कृष्णा कपूर परेशान रहने लगीं। जब बात बढ़ गयीं तो एक दिन उन्होंने घर छोड़ दिया और अपने बच्चों के साथ रहने के लिए होटल में चली गयीं। इसका जिक्र ऋषि कपूर कुछ इस प्रकार किया है- जब पापा और वैजयंतीमाला के अफेयर से मां परेशान हो गयीं तो एक दिन हम भाई-बहनों को लेकर होटल नटराज में रहने चली गयीं। मां, पापा से बहुत नाराज थीं। फिर हम वहां से दो महीने के लिए चित्रकूट चले गये। चित्रकूट में पापा ने एक अपार्टमेंट खरीदा था। पापा ने मां को मनाने की बहुत कोशिशें की लेकिन मां उनके रोज रोज के अफेयर से टूट गयीं थीं। वे चुपचाप सब कुछ सहती रहीं। लेकिन उन्होंने पापा को कभी छोड़ा नहीं। मां तभी घर लौटीं जब वैजयंतीमाला का प्रकरण खत्म हुआ। बाद में राज कपूर की छोटी बेटी रीमा जैन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लोग कुछ भी कहें, मेरे पिता मां को बहुत प्यार करते थे। वे मां का इतना ख्याल रखते थे कि पैर तक दबाते थे।












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