Rajasthan News: राजस्थान में वन स्टेट-वन इलेक्शन क्यों चाहती है भजन लाल सरकार, जानिए पूरी रणनीति

Rajasthan News: राजस्थान में भजनलाल सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन की तैयारी कर रही है। प्रदेश में इसी महीने स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सरकार इस बार निकाय और ग्राम पंचायत चुनाव एक साथ करवाने की योजना बना रही है। प्रदेश की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने वन स्टेट-वन इलेक्शन करवाने की घोषणा कर यह संकेत भी दे दिए हैं। हालांकि ऐसा करने के लिए सरकार को संवैधानिक रूप से दिक्कत आएगी। कानून बनने के बाद ही ऐसा संभव होगा। चर्चा है कि सरकार अगस्त महीने में विशेष सत्र भी बुला सकती है या अध्यादेश के जरिए वन स्टेट-वन इलेक्शन पर कानून ला सकती है। प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायत राज के चुनाव एक साथ करवाने को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कांग्रेस भी इसका विरोध कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार इसी साल अगस्त और सितंबर में प्रदेश में एक साथ स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत चुनाव करवा सकती है। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के मुताबिक बार-बार आचार संहिता लगने की वजह से सरकार के कामकाज प्रभावित होते हैं और सरकारी खजाने पर भार भी पड़ता है।

bhajan lal sharma

कांग्रेस के निशाने पर राज्य सरकार

वन स्टेट-वन इलेक्शन को लेकर भजनलाल सरकार कांग्रेस के निशाने पर है। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे लेकर कहा कि यह उनका राजनीतिक एजेंडा है। पंचायत और नगर निकाय के चुनाव ना हो। अभी हाल ही में नगर पालिका नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने थे। उसमें मुख्यमंत्री ने खुद के जिले में जिला प्रमुख का चुनाव नहीं करवाया। यह लोकतंत्र का खिलवाड़ करते ही हैं। बीजेपी की इस तरह की पुरानी आदत भी है। हम जनता को साथ लेकर इन गलत नीतियों का विरोध करेंगे।

राज्य सरकार ने बजट में की थी घोषणा

वन स्टेट-वन इलेक्शन को लेकर बजट में घोषणा की गई थी। अगर ऐसा कानून बनता है तो राजस्थान देश में ऐसा करने वाला पहला राज्य होगा। भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान एक देश-एक चुनाव के फार्मूले को भी घोषणा पत्र में शामिल किया था। प्रदेश में 11 नगर निगम, 33 नगर परिषद, 159 नगर निगम बोर्ड, 213 शहरी निकाय है। इसके अलावा 11320, सरपंच 1,09,228 पंच, 6995 पंचायत समिति सदस्य 1014 जिला पंचायत सदस्य और 7500 पार्षदों के पदों पर एक साथ चुनाव होगा। सरकार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा बिल के ड्राफ्ट और कानूनी और तकनीकी उलझन से निपटने के लिए एक मसूदा तैयार किया जा रहा है।

चुनाव से बचने के लिए वन स्टेट वन इलेक्शन

राजनीतिक गलियारों में वन स्टेट वन इलेक्शन को लेकर काफी चर्चा हो रही है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि सरकार चुनाव से बचना चाहती है। ऐसे में वन स्टेट-वन इलेक्शन लागू कर सरकार चुनाव को आगे खिसकाना चाहती है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा जमीनी स्तर पर कमजोर हो गई है। ऐसे में अभी चुनाव कराने के मूड में नहीं है। इसके पीछे एक वजह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल को भी बताया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है। ताकि विपरीत परिणाम आने पर सरकार की स्थिरता को लेकर कोई सवाल करें ना हो सके। राज्य सरकार अगर वन स्टेट-वन इलेक्शन लाकर चुनाव करवाती है तो सबसे बड़ी दिक्क्त यह होगी कि जब तक चुनाव नहीं होंगे तब तक क्या सरकार प्रशासक नियुक्त करेगी या मौजूदा जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल आगे बढ़ाया जाएगा।

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