Rajasthan News: महेंद्रजीत सिंह मालवीय कहां चले घर छोड़कर ? मिशन 25 के लिए कितना नफा कितना नुकसान
Mahendrajeet Singh Malviya: राजस्थान में कांग्रेस के सीडब्ल्यूसी सदस्य और विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीय की भाजपा में जाने की चर्चाएं जोरों पर है।
लेकिन आखिर क्या है वजह जो सालों से कांग्रेस के बूते अपना नाम और पहचान बना चुके मालवीय का कांग्रेस से मोह भंग हो गया है।

सियासी जानकारों की माने तो मालवीय पिछले गहलोत सरकार में उपेक्षा से नाराज चल रहे है। लेकिन इस बार उन्हे फिर भरोसा था कि विधानसभा में उनकी वरियता को देखते हुए आलाकमान नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी देगा।
और इसी ताजा वजह से मालवीय भाजपा के ऑपरेशन लॉट्स में शामिल होते नजर आ रहे है।
सियासी जानकार एक दूसरी ओर वजह मान रहे है कि हाल भी राज्यसभा चुनावों में चुन्नीलाल गरासिया को भाजपा ने उम्मीदवार बना बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी शुरू कर दी है।
जिसके चलते सालों से तैयार की गई आदिवासी बाहुल्य इलाके में सियासी जमीन अब मालवीय को खिसकती नजर आ रही है। माना यह भी जा रहा है कि पत्नी की लोकसभा चुनाव लड़ाने की मंशा पाले मालवीय को बड़ा झटका लगने से पहले ही मालवीय ने कांग्रेस को तगड़ा झटका देने की तैयारी शुरू की है।
चलिए बात करते है कि भाजपा के ऑपरेशन लॉट्स के लिए महेंद्रजीत सिंह मालवीय कितने जरूरी और अहम है।साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों पर मिशन 25 की हैट्रिक लगाने की भाजपा ने तैयारी शुरू की है।
साल 20024 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान की 25 सीटें जीतने के बाद राजनीतिक इतिहास में पहली बार होगा जब कोई राजनीतिक दर लगातार तीसरी बार पूरी की पूरी सीटों पर जीत हासिल करेंगा।
राजस्थान में लोकसभा चुनाव से पहले ऑपरेशन लॉट्स की काफी चर्चाएं हो रही है। दक्षिणी राजस्थान के एक बड़े आदिवासी नेता समेत कुछ और नेता भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
यह सभी नेता कांग्रेस खेमे के बड़े दिग्गज है। जो सभी अपने-अपने इलाके में मजबूत पैठ के साथ मतदाताओं में पकड़ भी रखते हैं।
इन सभी नेताओं में बागीदौरा विधायक महेंद्रजीत मालवीय सबसे बड़ा नाम है। महेंद्रजीत मालवीय दक्षिणी राजस्थान से आते हैं. बांसवाड़ा जिले की बागीदौरा विधानसभा सीट से विधायक भी हैं।
कांग्रेस के केंद्रीय कार्य समिति के सदस्य हैं। वे पिछला विधासनभा चुनाव 40 हजार से ज्यादा मतों से जीते है। जबकि भाजपा में शामिल होते हैं तो उन्हें विधानसभा सीट से इस्तीफा भी देना होगा।
अगर वे विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं तो क्या भाजपा उन्हें कुछ बड़ा ऑफर देगी? क्या भाजपा में उनकी एंट्री की राह इतनी आसान होने वाली है?
भाजपा की नजर लोकसभा में एक बार फिर से हैट्रिक के साथ क्लीन स्वीप करने पर है। लेकिन विधानसभा चुनाव के परिणाम के आंकड़े ने डूंगरपुर - बांसवाड़ा सीट को लेकर पार्टी की बेचैनी बढ़ा दी थी।
विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भले ही प्रदेश में सरकार बनाई हो लेकिन डूंगरपुर और बांसवाडा में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है. भाजपा को दोनो जिलों की 9 सीटों में केवल दो सीटें मिली है। पिछली बार के मुकाबले पार्टी ने न सिर्फ सीटों का नुकसान सहा है बल्कि पार्टी का वोट भी घटा है।
जाहिर है भाजपा इन आंकड़ों को बेहतर करना चाहती है। इसलिए महेंद्रजीत मालवीय जैसे मजबूत नेता के आने से पार्टी को काफी उम्मीदें हैं। क्योंकि कांग्रेस पार्टी से इतर महेंद्रजीत मालवीय का अपना भी वोट बैंक है।
चर्चा है कि महेंद्रजीत मालवीय अपनी पत्नी के लिए लोकसभा का टिकट चाहते थे। इस बीच पार्टी का एक धड़ा भारत आदिवासी पार्टी से गठबंधन की बात भी कर रहा है।
ऐसे में महेंद्रजीत मालवीय को यह सीट मिलने की उम्मीद कम थी। आदिवासी पार्टी ने बीते कुछ सालों में इस इलाके में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा के अंतर्गत आने वाली 8 सीटों में 2 लाख 05 हजार 770 वोट प्राप्त किए थे। विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने 3 सीटें जीती थी और 5 सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही।
अब अगर मालवीय भाजपा का दामन थाम लेते है तो कांग्रेस को बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है। और इसके डेमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेसी हलके में भी गहमागहमी शुरू हो गई है।












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