उत्तरकाशी में कुदरती तबाही के जख्म, राजस्थान के 5 फौजी लापता, सांसद कस्वां ने सरकार से मांगा अपडेट
Uttarkashi disaster 2025: पहाड़ी इलाकों में कुदरती कहर जारी है। 14 अगस्त 2025 को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोती गांव में बादल फटने से करीब 38 लोगों की मौत हो गई। उधर, 5 अगस्त 2025 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली-हर्षिल क्षेत्र में तबाही मचने के बाद अब जानकारी मिली है कि राजस्थान के पांच फौजी भी लापता हैं।
उत्तरकाशी आपदा में भारतीय सेना की राजपूताना राइफल्स के कई जवान लापता हो गए हैं, जिनमें राजस्थान के पांच जवान शामिल हैं। इन जवानों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे उनके परिवार चिंता में डूबे हैं।

राजस्थान के पांच जवानों से संपर्क नहीं
कांग्रेस नेता और चूरू से सांसद राहुल कस्वां ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। कस्वां ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी शेयर करते हुए बताया कि राजस्थान के लापता जवानों में चूरू के हरलाल कालेर (रतनगढ़) और सचिन (सादुलपुर), करौली के अजीत राजपूत, सीकर के हरित सिंह और नागौर के पूनाराम शामिल हैं।
सांसद कस्वां ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए कहा, "कृपया त्वरित हस्तक्षेप कर लापता जवानों की स्थिति की जानकारी से उनके परिवारों को अवगत कराएं।" यह भी लिखा कि परिवारजन न तो उन जवानों से संपर्क कर पा रहे हैं और न ही सेना की ओर से कोई पुख्ता जानकारी मिल रही है।
धराली-हर्षिल में राहत अभियान जारी
उत्तरकाशी पुलिस के अनुसार, गंगनानी और लिम्चागाड़ के पास वैली ब्रिज निर्माण कार्य के बीच हर्षिल-धराली क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए विभिन्न बचाव एजेंसियां संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं।
प्रभावित इलाके तक रसद और जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा का उपयोग किया जा रहा है। आपदा प्रभावितों और बचाव दलों के लिए सामुदायिक रसोई का संचालन एसडीआरएफ ने संभाल लिया है। लगातार गिरते मलबे और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद टीमें लापता लोगों को खोजने में जुटी हैं।
उल्लेखनीय है कि धराली में 5 अगस्त को आई आपदा के बाद अब पांच लोगों के शव बरामद हो चुके हैं जबकि बड़ी संख्या में लोग मलबे में दबे हुए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है और उनके अब जिंदा बचने की उम्मीद टूट चुकी है। उधर, हर्षिल में भारतीय सेना का कैंप भी इस आपदा की चपेट में गया था। कैंप से कई जवान अभी भी लापता हैं।












Click it and Unblock the Notifications