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JD Vance Jaipur Visit: US उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जयपुर में जिस आमेर महल को देखने आ रहे, उसका इतिहास क्‍या है?

JD Vance Jaipur Visit 2025: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेम्स डेविड (जेडी) वेंस भारत दौरे पर 21 अप्रैल 2025 को राजस्‍थान की राजधानी जयपुर पहुंचेंगे। वेंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात के बाद उसी रात जयपुर आएंगे। पिंक सिटी में रहेंगे और इस दौरान राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और जल संरक्षण प्रणाली से रूबरू होंगे।

US Vice President JD Vance to Visit Amer Fort in Jaipur

आमेर में राजस्थानी परंपराओं से होगा स्वागत

22 अप्रैल 2025 की सुबह वेंस आमेर महल पहुंचेंगे। यहां उनका पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया जाएगा-जोधपुरी साफा पहनाकर, कठपुतली नृत्य और लोकगीतों के साथ। आमेर में 16वीं शताब्दी की जल प्रबंधन प्रणाली 'पन्ना मीना का कुंड' भी दिखाया जाएगा।

US Vice President JD Vance to Visit Amer Fort in Jaipur

बिजनेस समिट को करेंगे संबोधित

आमेर दौरे के बाद वेंस राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित बिजनेस समिट को संबोधित करेंगे, जहां भारत-अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके बाद वे राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करेंगे।

23 अप्रैल को ताजमहल भ्रमण, फिर लौटेंगे जयपुर

23 अप्रैल की सुबह वे विशेष विमान से आगरा रवाना होंगे। ताजमहल का करीब तीन घंटे दौरा करने के बाद वे दोपहर में वापस जयपुर लौटेंगे और सिटी पैलेस का भ्रमण करेंगे।

JD Vance Jaipur Visit

सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम

वेंस की सुरक्षा के लिए राजस्थान सरकार ने 20 विशेष वाहनों और एक अत्याधुनिक एम्बुलेंस की व्यवस्था की है। साथ ही खुफिया पुलिस और सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। आमेर महल में केवल 12 गाइडों को सुरक्षा जांच के बाद नियुक्त किया गया है।

जयपुर के बाद रवाना होंगे अमेरिका

24 अप्रैल की सुबह 6:30 बजे जेडी वेंस जयपुर से अमेरिका के लिए रवाना होंगे। उनके चार दिवसीय प्रवास को लेकर जयपुर में जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। एयरपोर्ट पर रेड कारपेट स्वागत और होटल रामबाग पैलेस में भव्य रात्रि समारोह की भी योजना है।

JD Vance Jaipur Visit

अमेरिकी उपराष्ट्रपति का मिनट टू मिनट कार्यक्रम

  • 21 अप्रैल: रात 9.30 बजे जयपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे।
  • रात 10 बजे होटल रामबाग पैलेस पहुंचेंगे।
  • होटल में ही एक समारोह में हिस्सा लेंगे। होटल में ही रुकेंगे।
  • 22 अप्रैल: सुबह 9 बजे आमेर महल को देखने पहुंचेंगे। यहां ढाई घंटे रहेंगे।
  • सिटी पैलेस और जंतर-मंतर का विजिट भी कर सकते हैं।
  • दोपहर लंच के बाद राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे।
  • शाम को राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात प्रस्तावित है।
  • 23 अप्रैल: सुबह 9 बजे जयपुर एयरपोर्ट से आगरा के लिए रवाना होंगे। तीन घंटे तक ताजमहल परिसर में रुकेंगे।
  • दोपहर 2 बजे के बाद आगरा से जयपुर पहुंचेंगे।
  • दोपहर में जयपुर सिटी पैलेस जाएंगे।
  • 24 अप्रैल: सुबह 6:30 बजे वाशिंगटन रवाना हो जाएंगे।
    JD Vance Jaipur Visit

जिस आमेर किले को देखने जेडी वेंस आ रहे, उसका इतिहास कैसा है?

आमेर किला सिर्फ एक स्थापत्य चमत्कार नहीं, बल्कि राजपूताना इतिहास का जीवंत उदाहरण है। यह न केवल शौर्य और युद्ध की कहानियाँ कहता है, बल्कि उसमें छिपी राजनीति, वास्तुकला, विज्ञान, जल प्रबंधन और सांस्कृतिक विरासत भी बयां करता है। यह किला राजस्थान की धरोहर है जो हर भारतीय को गौरवान्वित करता है।

JD Vance Jaipur Visit

आमेर किला: राजस्थान की राजपूताना शान का प्रतीक

राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे "गुलाबी नगरी" के नाम से जाना जाता है, अपने ऐतिहासिक गौरव, राजपूताना साहस और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। जयपुर की गलियों में सैर करते हुए जब आमेर की ओर बढ़ते हैं, तो यह शहर एक अलग ही रूप में सामने आता है-इतिहास, शौर्य और वास्तुकला का अद्भुत संगम।

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आमेर का इतिहास

आमेर (या आमेर) का किला जयपुर से लगभग 11 किलोमीटर उत्तर में अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में कछवाहा राजपूतों ने कराया था, जिन्होंने इस स्थान को मीणा जाति से छीना था। इससे पहले आमेर का नाम "ढूंडाड़" था और यह मीणा समुदाय की राजधानी थी।

किंवदंती के अनुसार, राजा आलन सिंह की बहन के पुत्र ढोला राय ने दीपावली के दिन एक अनुष्ठान 'पित्र तर्पण' के समय मीणाओं पर हमला किया और आमेर पर अधिकार कर लिया। ढोला राय को भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज माना जाता है।

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स्थापत्य और निर्माण कार्य

आमेर किला शिल्पशास्त्र के नियमों के अनुसार निर्मित एक गिरी दुर्ग (पहाड़ी किला) है। इसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से किया गया है, जिसमें हिन्दू और मुग़ल स्थापत्य का सुंदर संगम देखा जा सकता है। इसकी नींव राजा भारमल और राजा मान सिंह प्रथम ने 1558 में रखी थी और अंतिम रूप 1727 में राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने दिया।

आमेर किला चार प्रमुख प्रांगणों में विभाजित

प्रथम प्रांगण

  • सूरज पोल से प्रवेश कर आप जलेब चौक में पहुँचते हैं, जहाँ युद्ध से लौटे सैनिकों का स्वागत होता था।
  • दाईं ओर स्थित है सीला देवी मंदिर, जहाँ एक समय में नवरात्रि पर बलि दी जाती थी।
  • मंदिर के ऊपर सुगंध मंडिर है, जहाँ केवल राजघराने की महिलाएँ पूजा करती थीं।

द्वितीय प्रांगण

  • यहाँ दीवान-ए-आम (जनसभा भवन) और दीवान-ए-खास (विशेष सभा भवन) स्थित हैं।
  • यहाँ 27 स्तंभों पर आधारित एक मंच है, जिनके शीर्ष पर हाथी के आकार की आकृतियाँ हैं।
  • जय मंदिर इसकी छत पर स्थित है, जिसमें शीशे की सुंदर सजावट है।

तृतीय प्रांगण

  • गणेश पोल से प्रवेश करते ही राजपरिवार के आवासीय क्षेत्र में पहुँचा जाता है।
  • यहाँ स्थित है प्रसिद्ध शीश महल, जिसकी दीवारों पर लगे काँच एक दीपक की रोशनी से पूरे कक्ष को प्रकाशित कर देते हैं।
  • इसके सामने सुख महल है, जिसकी दीवारों में जल मार्ग बनाए गए थे, जिससे प्राकृतिक वातानुकूलन होता था।
  • यहाँ का राजा मान सिंह महल सबसे पुराना भाग है, जिसका निर्माण 1599 में पूर्ण हुआ।

चतुर्थ प्रांगण

  • त्रिपोलिया गेट से प्रवेश करने पर जनाना ड्योढ़ी (रानियों का निवास) दिखाई देती है।
  • इसकी संरचना इस प्रकार की गई थी कि राजा किस रानी के पास गए, यह किसी को पता न चले।
  • गलियारों के भीतर बने निजी रास्ते अलग-अलग कक्षों की ओर जाते थे।

आमेर किले की सुरक्षा व जल संरचना

  • आमेर किले के चारों ओर मोता झील और सागर झील सुरक्षा खाई का कार्य करती थीं।
  • पानी की आपूर्ति के लिए मिट्टी की पाइपों से झील से टैंक तक पानी लाया जाता था।
  • उसके बाद चरखियों और बैल की सहायता से ऊपरी टैंकों में पानी पहुँचाया जाता था।
  • एक समान प्रक्रिया जयगढ़ किले में भी अपनाई जाती थी, जो आमेर किले से गुप्त मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ था। यह आपातकाल में शरण स्थल के रूप में प्रयोग किया जाता था।

आमेर का वर्तमान स्वरूप

1727 में जब जयपुर की स्थापना हुई, तब राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने राजधानी को आमेर से स्थानांतरित कर दिया। फिर भी आमेर पूरी तरह से वीरान नहीं हुआ। गुजरात से आने वाले व्यापारिक मार्गों के कारण यहाँ जीवन बना रहा। आमेर किला 2013 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। आज यह जयपुर के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। किले की देखरेख और संरक्षण पर लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

पर्यटन और आकर्षण

  • आमेर किले का दिन और रात दोनों समय का भ्रमण अनोखा अनुभव देता है।
  • दिन में हाथी की सवारी से किले तक पहुँचना राजसी अनुभव है, तो रात में रोशनी से जगमगाता किला अपने मूल वैभव में लौटता प्रतीत होता है।
  • लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से यहाँ की लोककथाएँ, युद्धगाथाएँ और इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

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