Chittorgarh Unique Temple News: राजस्थान का अनूठा मंदिर यहां प्रसाद में बंटते है रुपए, लूटने के लिए उमड़े भक्त

Chittorgarh's unique temple news: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में देश का एक ऐसा अनूठा मंदिर है जहां प्रसाद के रूप में धन बांटा जाता है। इस मंदिर के पट सालभर में मात्र दो ही बार खोले जाते है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस दिन सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

चित्तौड़गढ़ जिले के प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल बानोड़ा बालाजी के श्रीलक्ष्मीरानी मंदिर के गुरुवार को पट खोले और यहां पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं को लक्ष्मी वितरित की गई।

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आपकों बता दे कि पूरे भारत देश में यह एक अकेला मंदिर है, जहां पर प्रसाद के रूप मेंं धन बांटा जाता है और सभी श्रद्धालुओं को रुपयों और सिक्कों के रूप में लक्ष्मी का वितरण होता है।

यह अद्भुत मंदिर साल में महज दो ही बार खुलता है। बानोड़ा बालाजी के महन्त पंडित कैलाश शर्मा ने माता लक्ष्मीरानी की आरती की और उसके बाद लक्ष्मी वितरण प्रारंभ किया।

लक्ष्मी मंदिर में दर्शनार्थ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में 1,2,5 व 10 के सिक्कों के साथ 5, 10, 20, 50, 100 और 500 रुपए के नोटों के रूप में लक्ष्मी बांटी जाती है। अब किसके हाथ में कितनी लक्ष्मी आती है यह किसी को पता नहीं होता लेकिन साल में 2 बार खुलने वाले इस मंदिर में दर्शनों के लिए दूर दराज से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते है। देश भर में अपने आप में इस अनूठे मंदिर में परम्पराएं है।

महन्त पंडित कैलाश शर्मा द्वारा सभी व्यस्थाओं और धार्मिक कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। प्रतिवर्ष यहां पर विशाल यज्ञ भी होता है। यहां रात्रि महोत्सव समापन के अवसर पर महालक्ष्मी के दिव्य दर्शन के साथ छप्पन भोग और अमृत खीर महाप्रसादी का आयोजन होता है।

जानकारी के अनुसार आस-पास के क्षेत्रों के साथ ही राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से भी श्रद्धालु यहां आते है और यहां प्रसाद के रूप में मिलने वाले धन को लोग अपनी तिजोरी गल्ले में सहेज कर रखते है। इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लोग झोली फैला कर प्रसाद के रूप में इस धन को ग्रहण करते है।

साल में दो बार खुलते है लक्ष्मी के द्वार
जानकारी के अनुसार लक्ष्मी मंदिर के द्वार वर्ष में 2 बार ही खुलते है। बताया जाता है कि यहां स्थित लक्ष्मीरानी की प्रतिमा शयन मुद्रा में है। शारदीय नवरात्रि के बाद आने वाली शरद पूर्णिमा और चैत्र मास की पूर्णिमा को लक्ष्मी मंदिर के द्वार खोले जाते है और पूजा अर्चना के बाद धन वितरण होता है।

बताया जाता है कि बानाेड़ा बालाजी मंदिर समूह में सिद्धी दात्रि देवी मंदिर में नवरात्रि महोत्सव 16 दिन का मनाया जाता है और आज इसका समापन हुआ है।

200 से अधिक गांवों में 20 साल से हो रही अखंड रामायण
बेगूं क्षेत्र में स्थित बानोड़ा बालाजी मेवाड़ का प्रमुख तीर्थ स्थल बनता जा रहा है। यहां पर 13 मंदिरों का समूह है और श्री शेषावतार कल्लाजी की प्राचीन प्रतिमा स्थित है।

बड़ी बात यह है कि यहां के महन्त पंडित कैलाश शर्मा के प्रेरणा से राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा के 200 से अधिक गांवों में अखंड रामायण पाठ अनवरत चलता रहता है। बानोड़ा बालाजी सेवा मंडल द्वारा यह अखंड रामायण पाठ अनवरत चल रहा है।

पिछले 20 वर्षाें में यहां 13 मंदिरों की स्थापना हुई है, जिसमें पंचमुखी हनुमान, नर्सिंग मंदिर, सिद्धी दात्रि मंदिर, लक्ष्मी रानी मंदिर, गायत्री मंदिर, कार्तिक मंदिर, नर्सिंग मंदिर, रामजानकी, खाटुश्याम, श्री गणेश, भगवान जगन्नाथ, अर्जुन-द्रोपदी के मंदिर है।

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