Raksha Bandhan News: राजस्थान में रक्षाबंधन के महापर्व पर पतंगबाजी की परम्परा, जानिए ऐसा क्यों
Rajasthan Raksha Bandhan News: देशभर में आज एक ओर जहां रक्षाबंधन का महापर्व बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है वहीं राजस्थान के करौली जिले में रक्षाबंधन के मौके पर पतंगबाजी की परम्परा से अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है।
प्रदेश के करौली जिले में सुबह से ही छतों पर डीजे की धूनों पर युवा जमकर पतंगबाजी कर रहे है। सुबह ही छतों पर ये काटा वो मारा का शोर गूंज रहा है। बूढ़े, बच्चे और जवान पतंगबाजी का जमकर लुत्फ उठा रहे है। करौली जिले में रक्षाबंधन और कृष्ण जन्माष्टमी पर पतंगबाजी की अनूठी परम्परा है।
अमूमन रक्षाबंधन के पर्व पर सुबह से ही पकवानों के बनाने की परम्परा है। महिलाएं सुबह से रसोई में नए नए पकवान बनाती है तो बहने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है।

क्या आप सोच सकते है कि रक्षाबंधन के महापर्व पर कही पतंगबाजी भी होती होगी और यह शौक नहीं रिवाज है तो आप के मूहं से यहीं निकलेगा ऐसा नहीं होगा। तो चलिए हम आपकों राजस्थान में उस परम्परा यानी रिवाज से रूबरू करवाते है जहां रक्षाबंधन के पर्व पर छतों पर पतंगबाजी की जाती है।
रक्षाबंधन के मौके पर सुबह से ही ये काटा, वो मारा का शोर सुनाई देने लगा। युवा, बच्चें और जवान अपनी छतों पर चढ़कर पतंग उड़ाते नजर आए।
भाई-बहनों के प्यार के प्रतीक रक्षाबंधन के अवसर पर जिले पतंगबाजी की परंपरा है। इस अवसर पर बाजारों में पतंग की दुकान पर पतंगबाजों की अच्छी खासी भीड़ नजर आई।
रक्षाबंधन पर पतंगबाजी क्यों ? pic.twitter.com/Cdf1MgJ3EX
— PURSHOTTAM KUMAR (@pkjoshinews) August 19, 2024
रक्षाबंधन के दिन सोमवार को सुबह से लेकर देर शाम तक बच्चे, पुरूष व महिलाएं घरों की छतों पर जाकर दिनभर पतंग उड़ाते हैं। जिससे गलियों में ये काटा-वो मारा का शोर सुनाई देता है। जिला मुख्यालय सहित हिण्डौन, मासलपुर, मंडरायल, सपोटरा व ग्रामीण क्षेत्रों में य़हीं नजारा आज के दिन दिखाई देता है।
रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व पतंगबाजों ने पतंगों की दुकानों से पतंग व माझा-डोर खरीद कर रख लिए, ताकि रक्षाबंधन के दिन पतंगों की कमी नहीं आए। बड़ों के साथ बच्चों में भी पतंग उड़ाने का खासा जुनून दिखा। बच्चें तड़के सवेरे ही छतों पर चढ़ गए और पतंग उड़ाने लगे। इस दौरान मौसम ने भी पतंगबाजों का साथ दिया।
अधिकांश घरों की छतों पर पतंगबाजों ने अपनी - अपनी छतों पर बारिश व धूप से बचने के लिए त्रिपाल, चद्दर, छतरी व मनोरंजन के लिए लाउड स्पीकर और म्यूजिक सिस्टम लगा लिए तथा संगीत की धुन पर पतंगबाजी का आनंद उठाते व नाचते नजर आए।












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