Takhat Baisa Biography: कौन हैं तखत बाईसा, जिन्हें लोग मान रहे देवी का अवतार, क्या-क्या चमत्कार दिखाए?
Takhat Baisa Kaun Hai: तखत बाईसा के नाम पर आस्था उमड़ रही या अंधविश्वास फैलाया जा रहा? हम कुछ कह नहीं सकते, मगर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के इलाकों में इस कन्या की चर्चा खूब हो रही है। लोग इन्हें साक्षात देवी का रूप मान रहे हैं। आमजन ही नहीं बल्कि फौजी व पुलिसकर्मी भी इनके सामने नतमस्तक हैं।
सबसे पहले जानिए कि आखिर तखत बाईसा हैं कौन? फिर बताते हैं कि इनके चमत्कारों की चौंका देने वाली कहानी और इनके देवीय रूप को मिल रही चुनौतियों के बारे में।

Who is Takhat Baisa: तखत बाईसा देवका शिव बाड़मेर
तखत बाईसा राजस्थान के बाड़मेर जिले की शिव तहसील के गांव देवका की रहने वाली हैं। चारण परिवार में जन्मी तखत बाईसा के पिता का नाम गेमरदान चारण है। तखत बाईसा को आवड माता का अवतार माना जा रहा है।

Takhat Baisa Video: तखत बाईसा के वायरल वीडियो
पिछले कई दिनों राजस्थान के बाड़मेर से तखत बाईसा के वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे काले व लाल कपड़ों और नंगे पांव नजर आ रही हैं। इनके साथ लोगों का आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। लोग इनके दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। इनसे आशीर्वाद ले रहे हैं। ये माता के मंदिर में विराजमान नजर आ रही हैं।

Takhat Baisa Story in Hindi: तखत बाईसा की कहानी क्या है?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में दावा किया जा रहा है कि तखत बाईसा बचपन से ही मां आयड़ की भक्ति में लीन रहती थीं। तखत बाईसा के गांव देवका में करणी माता का मंदिर बना है, जिसके पास एक रहस्यमयी गुफा है। उसी गुफा में तखत बाईसा ने कठोर तपस्या की है।

तखत बाईसा के पास रहते थे सांप
फेसबुक पर दिनेश दान के वीडियो में दावा किया गया है कि गुफा में तखत बाईसा पिछले चार साल से तपस्या कर रही थीं। गुफा के एक बंद कमरे में बिजली-पानी तक की सुविधा नहीं थी। उस गुफा में अक्सर दो सांपों को जाते भी देखा गया था।
तखत बाईसा पीती थीं दूध, अन्न नहीं खाया
तखत बाईसा ने बिना कुछ खाए रहस्यमयी गुफा के अंधेरे कमरे में चार साल तक माता आयड़ की पूजा अर्चना करती रहीं। इस दौरान तखत बाईसा के पिता अंधेरे कमरे में दूध का गिलास रखा करते थे, जिसे तखत बाईसा सप्ताह में एक-दो बार पी लिया करती थीं। इसके अलावा अन्न का एक दाना तक नहीं खाया करती थीं।

चारण समाज में होता रहा है देवियों का अवतार
चार साल की भक्ति साधना या तपस्या करने के बाद तखत बाईसा अचानक उस बंद कमरे से बाहर निकलती हैं और भक्तों को दर्शन देती हैं। बता दें कि चारण समाज में प्राचीन काल से ही देवियों का अवतार होता आया है। इसी कड़ी में अब बाड़मेर से तखत बाईसा का नाम जुड़ गया है।
Takhat Baisa Education: तखत बाईसा आठवीं तक पढ़ी-लिखी
बताया जाता है कि तखत बाईसा ने अपने गांव देवका से आठवीं तक की पढ़ाई की है। इसके बाद उनका मन पढ़ाई की बजाय माता आयड़ की भक्ति में रमने लगा। ऐसे में उन्होंने पढ़ाई छोढ़कर मां आयड़ की भक्ति की ठानी और गुफा के बंद कमरे में तपस्या शुरू कर दी।

Takhat Baisa Mandir: तखत बाईसा तनोट समेत कई मंदिरों में पहुंचीं
गांव देवका से बंद कमरे में माता आयड़ की चार साल तक पूजा अर्चना करने के बाद बाहर आईं तखत बाईसा ने जैसलमेर का तेमड़ा राय मंदिर, भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित फौजियों वाली देवी माता तनोट समेत तमाम मंदिरों में पहुंचकर दर्शन किए।

करणी भगत डॉ. गुलाब सिंह ने क्या कहा?
करणी भगत डॉ. गुलाब सिंह जी कहते हैं कि तखत बाईसा को विद्वानों से साक्षात करना चाहिए। तब हम मानेंगे। मुझमें ना इतनी हिम्मत और ना इतना ज्ञान की मैं उनको खुद से साक्षात के लिए कहूं। हमारे गुजरात में सोनल मां हुई थीं, जिन्हें किसी ने चुनौती दी कि मैं आपको रुपयों से तौलूंगा। मां ने भगवती को तौलने से मना किया। फिर भी सामने वाला जिद पर अड़ा रहा। तराजू लगा दिया तब सोनल मां ने सिर्फ अपना अंगूठा काटकर पलड़े में रखा, जो उनसे उठा है। इसलिए भगवती को कभी चुनौती नहीं देनी चाहिए।
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