Sikar Kisan Andolan 2023: शहर में निकाली ट्रैक्टर रैली, फिर क्यों आंदोलन कर रहा सीकर का किसान?
Kisan Andolan 2023 : सीकर के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर से आवाज बुलंद की है। किसानों ने कृषि उपज मंडी परिसर से कलेक्टर तक ट्रैक्टरों से रैली निकाली।

Kisan Andolan India : राष्ट्रीय आह्वान पर सीकर में अखिल भारतीय किसान सभा व संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि उपज मंडी सीकर से लेकर जाट बाजार होते हुए कलक्ट्रेट तक ट्रैक्टरों के साथ रैली निकाली। केन्द्र व राज्य सरकार की किसानों से किए गए वादा खिलाफी को लेकर नारेबाजी करते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। किसानों ने सीकर जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया।
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सीकर के किसानों की मांग
अखिल भारतीय किसान सभा सीकर के प्रवक्ता केशाराम धायल संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 13 माह से अधिक समय तक दिल्ली के चारों तरफ विभिन्न बॉर्डरों पर किसानों के महापड़ाव के बाद मोदी सरकार ने लिखित समझौता किया था, परन्तु 14 माह बाद भी समझौते को लागू नहीं किया।

किसान नेता अमराराम ने क्या कहा?
राजस्थान सरकार ने किसान कर्जा माफी व बेरोजगारों के रोजगार का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ। किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड अमराराम ने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, किसानों को फसल का समर्थन मूल्य की गारण्टी देने, बिजली नियामक विद्येयक वापिस लेने, शहीद किसानों को मुआवज़ा व परिवार के सदस्य को नौकरी देने सहित अनेक समझौते किये थे,परन्तु अभी तक कोई भी वादा पूरा नहीं किया।

देशभर के किसानों ने निकाली रैली
अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य अध्यक्ष कामरेड पेमाराम ने कहा कि शीतलहर से किसानों की फसल चौपट हो गई है, परन्तु राज्य व केंद्रीय सरकार की अभी तक नींद नहीं खुली है। किसान सभा के सीकर जिला सचिव सागर खाचरिया ने कहा कि आज सरकारों की वादा खिलाफी को लेकर व विश्वासघात को लेकर किसानों ने 26 जनवरी से पूरे देश की जिला कलक्ट्रेट पर ट्रैक्टर रैली के रूप आन्दोलन की शुरुआत की गई है।

सीकर किसान आंदोलन का इतिहास
सीकर में भी किसान आंदोलन का आगाज किया गया है, जो वादे और समझौते को लागू करने तक जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि साल 2018 में भी सीकर के किसानों ने आंदोलन किया था, जो देशभर में चर्चा का विषय बना था। किसान नेता अमराराम के नेतृत्व में आंदोलन में लाखों किसानों ने हिस्सा लिया था। सीकर के किसान आंदोलन के सामने राजस्थान की तत्कालीन सरकार को झुकने पर मजबूर होना पड़ा था।












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