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शहीद सांवलाराम विश्‍नोई की अंत्‍येष्टि : वीरांगना को शहादत पर गर्व, पिता बोले-2 पोतों को फौज में भेजूंगा

बाड़मेर, 2 अगस्‍त। यूएनओ शांति मिशन में कांगो में वीरगति को प्राप्‍त हुए राजस्‍थान के बीएसएफ जवान सांवलाराम विश्‍नोई का अंतिम संस्‍कार उनके पैतृक गांव में किया गया है। वे बाड़मेर जिले के गुडामालानी इलाके के गांव बांड के रहने वाले थे। बेटे की शहादत पर गर्व करते हुए पिता ने कहा कि अब दोनों पोतों को भी भारतीय सेना में भेजूंगा। वहीं, वीरांगना बोलीं कि पति की शहादत पर दुख के साथ-साथ गर्व भी हो रहा।

barmer shaheed

कागो से दिल्‍ली होते सोमवार को शहीद की पार्थिव देह गांव बांड पहुंची तो कोहराम मच गया। आस-पास के लोग बड़ी संख्‍या में उनके अंतिम दर्शन पहुंचे और 'जब तक सूरज चांद रहेगा..सांवलाराम तेरा नाम रहेगा' के जयकारों से आसमां गूंजा दिया। शहीद सांवलाराम विश्‍नोई की शवयात्रा में लोगों का सैलाब उमड़ा।

Shaheed Sanlaram Vishnoi

शहीद पति को अंतिम विदाई देते वक्‍त वीरांगना रुखमणी देवी भावुक हो गईं। उन्‍होंने कहा कि 'वे हमेशा कहते थे कि आप एक बहादुर सैनिक की पत्नी हो, हमेशा गर्व से रहना होगा। यूएन मिशन पर गए थे जब जल्‍द सकुशल लौटने का वादा किया था, अब लौटे तो हैं, मगर तिरंगे में लिपटकर और हम सबसे हमेशा हमेशा के लिए जुदा होकर' पति के शहीद होने के बाद दोनों बेटों को भारतीय सेना ज्‍वाइन करवाना चाहूंगी।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में अफ्रीका के कांगो (डीआर) में तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) के भारतीय जवान सांवलाराम विश्नोई 26 जुलाई को हिंसक प्रदर्शन के दौरान शहीद हो गए। उनके साथ ही राजस्‍थान के सीकर जिले के लक्ष्‍मणगढ़ उपखंड के शिशुपाल सिंह भी वीरगति को प्राप्‍त हुए थे।

शहीद के पिता विरधाराम का कहना है कि बचपन से बेटे सांवलाराम व उसके भाई राजूराम देश सेवा के लिए फौजी बनना चाहते थे। सांवलाराम का 25 जनवरी 1999 को बीएसएफ में चयन हो गया। राजूराम की पढ़ाई छूट गई थी। इसलिए सेना में नहीं जा पाया। सांवलाराम ने भाई को भी आगे पढ़ाकर सेना की तैयारी कराई।

शहीद के पिता विरधाराम ने बताया कि सांवलाराम विश्‍नोई ने 25 जनवरी 1999 को बीएसएफ ज्‍वाइन की थी। उनका भाई राजूराम भी देश सेवा के लिए फौजी बनना चाहते थे। भाई राजूराम कहते हैं कि भाई सांवलाराम ने देश सेवा के लिए मोटिवेट किया। 8वीं करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। फिर वापस 10वीं प्राइवेट से की। सेना में जाने के लिए तैयारी की। आर्मी में चयन भी हो गया था, लेकिन डाक विभाग की लापरवाही के चलते जॉइन लेटर समय पर नहीं आया और समय निकल गया।

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