Rajasthan: अवैध खनन के विरोध में आत्मदाह करने वाले संत विजयदास की मौत
नई दिल्ली, 23 जुलाई। राजस्थान के भरतपुर में पहाड़ियों से अवैध खनन बंद करने को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे साधु विजय दास ने बुधवार को आत्मदाह कर लिया था। साधु को गंभीर हालत में भरतपुर से दिल्ली के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। आज तड़के विजय दास का निधन हो गया। विजय दास का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके पार्थिव शरीर को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।

भरतपुर पहाड़ी के एसडीओ संजय गोयल ने बताया कि बीती 21 जुलाई को आत्मदाह करने वाले साधु विजय दास की शुक्रवार की देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई है। दास का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था। गोयल ने बताया कि शनिवार सुबह दास के पार्थिव शरीर को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।
बता दें, राजस्थान के भरतपुर में अवैध खनन को रोकने के लिए पसोपा गांव में संत बाबा विजय दास ने बुधवार को खुद को आग लगी ली थी। खुद को आग के हवाले करने के बाद विजय दास राधे-राधे कहते हुए दौड़ने लगे। जब तक पुलिस कर्मियों ने कंबल डालकर आग बुझाई, तब तक वो 80 फीसदी झुलस चुके थे। पुलिस ने उन्हें भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इसके बाद बाबा की तबियत में लगातार गिरावट के देख डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के रेफर कर दिया था। जिसके बाद बाबा का सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था। लेकिन उनकी स्थिति में अधिक सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार रात बाबा की इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे पहले डीग के गांव पसोपा में आदिबद्री एवं कनकांचल पर्वत को खनन मुक्त कराने की मांग को लेकर साधु के आत्मदाह की कोशिश करने के मामले को लेकर शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जिला कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन किया।
साधु विजयदास के आत्मदाह के प्रयास के बाद भाजपा नेताओं ने अशोक गहलोत सरकार करारा हमला किया है। बीजेपी ने साधु विजयदास के आत्मदाह के लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। चूंकि साधु संतों की ओर से अवैध खनन के खिलाफ पिछले डेढ़ साल से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इतने लम्बे आन्दोलन के बावजूद अशोक गहलोत सरकार ने साधु संतों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया।












Click it and Unblock the Notifications