Rajasthan News: आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत, 11 साल बाद जेल से आएंगे बाहर
Rajasthan News: राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्वयंभू संत आसाराम को 31 मार्च 2025 तक अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह निर्णय 2013 के बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की चिकित्सा उपचार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी एक अन्य बलात्कार मामले में स्वास्थ्य के आधार पर आसाराम को उसी तिथि तक अंतरिम जमानत दी थी। राजस्थान हाईकोर्ट का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित माना जा रहा है। जो न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर याचिकाओं के प्रति समान नजरिए को दर्शाता है।

स्वास्थ्य के आधार पर मिली राहत
आसाराम के वकील निशांत बोरा के नेतृत्व में हाईकोर्ट में यह दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका और उसके आधार समान थे। वकील निशांत बोरा ने कहा कि हमने तर्क दिया कि आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से स्वास्थ्य आधार पर राहत मिली है। यह याचिका भी वैध आधार पर है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और विनीत कुमार माथुर शामिल थे। खंडपीठ ने याचिका की समानताओं को स्वीकार करते हुए चिकित्सा आधार पर आसाराम को अंतरिम राहत दी है।
सख्त शर्तों के साथ अंतरिम जमानत
राजस्थान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों के साथ ही कुछ अतिरिक्त नियम भी लागू किए हैं। यदि आसाराम जोधपुर के बाहर यात्रा करना चाहते है तो उन्हें सुरक्षा के लिए नियुक्त तीन कांस्टेबलों का खर्च खुद उठाना होगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि आसाराम की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। आसाराम के वकील बोरा ने इस शर्त पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्रावधान आसाराम की गतिविधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जोड़ा गया है।
2013 के मामले में दोषी ठहराए गए थे आसाराम
अप्रैल 2018 में जोधपुर की निचली अदालत ने आसाराम को नाबालिग के साथ बलात्कार का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह अपराध जोधपुर स्थित उनके आश्रम में 2013 में हुआ था। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना और स्वयंभू संतों की साख पर सवाल उठाने वाला एक महत्वपूर्ण प्रकरण साबित हुआ।
न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय पहलू
आसाराम को दी गई अंतरिम जमानत चिकित्सा उपचार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए दी गई है। हालांकि हाईकोर्ट ने सख्त शर्तें लगाकर यह सुनिश्चित किया है कि उनकी रिहाई से सार्वजनिक सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता पर कोई प्रभाव न पड़े।
सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट दोनों द्वारा समान शर्तों और तर्कों के आधार पर आसाराम को अंतरिम राहत देना न्यायिक मानवीयता का उदाहरण है। हालांकि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा यात्रा के लिए लगाई गई सख्त शर्तें यह सुनिश्चित करती हैं कि आसाराम की अस्थायी रिहाई निगरानी में रहे और कानून व्यवस्था पर कोई प्रभाव न पड़े।












Click it and Unblock the Notifications