राजस्थान में शहरी निकायों के चुनाव कब होंगे? जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने भजनलाल शर्मा सरकार से मांगा जवाब
Rajasthan Nagar Palika Chunav: राजस्थान में 55 नगरपालिकाओं के चुनाव समय पर न कराने को लेकर मामला अब राजस्थान उच्च न्यायालय पहुंच गया है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्री चंद्र शेखर और न्यायमूर्ति श्री आनंद शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में कहा गया है कि इन नगरपालिकाओं का कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद राज्य सरकार ने चुनाव न करवाकर प्रशासकों की नियुक्ति कर दी है। यह न केवल संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है बल्कि नगरपालिका अधिनियम का भी सीधा उल्लंघन करता है। लोढ़ा की ओर से अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने कोर्ट में पक्ष रखा।

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इस मामले में कहा, "संविधान में वर्णित अनुच्छेद और विद्यमान कानून का पालन हर सरकार को करना होगा। नवंबर 2024 में अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी 55 नगरपालिकाओं में चुनाव नहीं कराना संविधान का सीधा उल्लंघन है। इसलिए मैंने इस मामले को जनहित याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष रखा है। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकारों की जगह प्रशासकों की नियुक्ति करना जनादेश का अपमान है।"
राज्य सरकार फिलहाल "वन स्टेट, वन इलेक्शन" की नीति के तहत सभी नगरीय निकायों का पुनर्सीमांकन कर रही है। सरकार का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होते ही नवंबर 2025 में चुनाव कराए जाएंगे। इसी अवधि के लिए प्रशासक नियुक्त किए गए हैं।
हालांकि, परिसीमन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि परिसीमन राजनीतिक हित साधने के लिए मनमाने ढंग से किया जा रहा है। इससे पहले पंचायत चुनावों में देरी का मामला भी हाईकोर्ट में लंबित है।
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