Rajasthan Assembly: श्मशान की भूमि पर 199 विधायकों का अटूट संयोग! क्या राजस्थान विधानसभा वाकई श्रापित है?

Rajasthan Assembly: राजधानी जयपुर में स्थित जस्थान विधानसभा फिर से 199 विधायकों की स्थिति में आ गई है, क्योंकि भाजपा के कंवरलाल मीणा की जेल सजा के कारण सदस्यता समाप्त हो गई है। राजस्‍थान विधानसभा की पूरी 200 सीटें कभी स्थिर नहीं रहतीं। कभी विधायक की मौत, कभी जेल, तो कभी चुनाव स्थगित होने की वजह से। क्या यह महज संयोग है या सच में यह विधानसभा भवन श्मशान भूमि पर बना है, जैसा कुछ लोग दावा करते रहे हैं?

भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द

राजस्‍थान के बारां जिले की अंता सीट से भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा को दो दशक पुराने मामले में तीन साल की जेल सजा मिलने के कारण विधानसभा सदस्यता से बाहर कर दिया गया है। इस मामले में कोर्ट ने उन्हें तत्कालीन एसडीएम पर रिवॉल्वर ताने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप मानते हुए सजा सुनाई।

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सजा मिलने के 23 दिन बाद, 21 मई 2025 को मीणा ने आत्मसमर्पण किया और 23 मई को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। विधानसभा अध्यक्ष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस मामले को राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

राजस्‍थान विधानसभा में रिक्त सीट और उपचुनाव की अनिवार्यता

राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य होते हैं। 23 मई 2025 को कंवरलाल मीणा की सदस्यता समाप्त होने के बाद विधायकों की संख्या घटकर 199 रह गई है। नियम के अनुसार छह महीने के भीतर इस सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक होगा।

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पहले भी घट चुकी है विधायकों की संख्या

झुंझुनूं के बृजेंद्र ओला, टोंक-सवाई माधोपुर के हरीश मीणा, दौसा के मुरारीलाल मीणा, नागौर के हनुमान बेनीवाल और बांसवाड़ा के राजकुमार रोत के लोकसभा सदस्य बनने से विधानसभा की संख्या 195 रह गई थी। बाद में, सलुंबर के अमृतलाल मीणा और रामगढ़ के जुबेर खान के निधन से यह संख्या घटकर 193 हो गई। इन रिक्त सीटों पर 23 नवंबर 2024 को उपचुनाव हुए और संख्या फिर 200 हो गई।

19 फरवरी 2024 को बागीदौरा के महेंद्रजीत मालवीय ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था, पर बाद में बीएपी ने उपचुनाव में जीत दर्ज की। 2023 के विधानसभा चुनाव में श्रीगंगानगर की करणपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के निधन के कारण मतदान स्थगित हुआ था, बाद में उपचुनाव हुआ।

वर्तमान दलगत स्थिति (23 मई 2025 तक)

  • भाजपा: 118
  • कांग्रेस: 66
  • बसपा: 2
  • बीएसपी (बागी): 4
  • आरएलडी: 1
  • निर्दलीय: 8
  • रिक्त: 1
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कंवरलाल मीणा का मामला क्‍या है?

वर्ष 2003 में कंवरलाल मीणा पर आरोप था कि उन्होंने तत्कालीन एसडीएम की कनपटी पर रिवॉल्वर तानी, सरकारी कार्य में बाधा डाली और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। कोर्ट ने इस मामले में उन्हें तीन साल की सजा सुनाई।

मीणा ने सुप्रीम कोर्ट में राहत याचिका लगाई, लेकिन कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण का आदेश दिया। उन्होंने 21 मई 2025 को आत्मसमर्पण किया और तब से जेल में हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में उन्होंने अंता सीट से कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया को 5861 वोटों से हराया था।

पहले भी समाप्त हो चुकी है विधायकों की सदस्यता

राजस्‍थान में पिछले आठ वर्षों में यह दूसरा मामला है जब विधायक की सदस्यता समाप्त हुई है। 2018 में धौलपुर के बसपा विधायक बीएल कुशवाह को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी, जिसके बाद उनकी पत्नी शोभारानी कुशवाह ने भाजपा से उपचुनाव जीत लिया था।

राजस्थान विधानसभा: संयोग, मृत्यु, जेल और रहस्य

कभी भी सभी 200 विधायक एक साथ विधानसभा भवन में नहीं बैठे हैं। हर बार कोई न कोई सीट खाली रहती है - मौत, जेल या चुनाव स्थगित होने की वजह से।

चुनाव से पहले उम्मीदवार की मौत

  • 2023: गुरमीत सिंह कुन्‍नर (श्रीगंगानगर की करणपुर सीट)
  • 2018: लक्ष्मण चौधरी (रामगढ़ से बीएसपी प्रत्याशी)

बिना उद्घाटन शुरू हुई विधानसभा: 25 फरवरी 2001 को राष्ट्रपति की तबीयत खराब होने से विधानसभा बिना औपचारिक उद्घाटन के शुरू हुई।
विधायकों की असमय मृत्यु: 2000 से 2018 के बीच कई विधायक असमय निधन हो चुके हैं।
विधायकों का जेल जाना: 2011 और 2013 में कई विधायकों ने जेल काटी है।

राजस्थान विधानसभा भवन पर वास्तु दोष और भूत-प्रेत का साया?

क्या विधानसभा भवन वास्तु दोष या भूत-प्रेतों के कारण अस्थिरता का शिकार है? मीडिया की खबरों के अनुसार नागौर के पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान और पूर्व मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने ऐसे दावे किए थे। साल 2018 में तांत्रिक गणेश महाराज को भी भवन में बुलाया गया, जिन्होंने कई वास्तु दोष पाए और विधानसभा अध्यक्ष को एक रिपोर्ट भी सौंपी गई थी।

वास्तु दोष की मुख्य बातें

मूल डिज़ाइन में अध्यक्ष को उत्तर दिशा और सत्ता पक्ष को ईशान कोण में बैठना था, लेकिन इसे उलट दिया गया। सदन के नीचे बेसमेंट बनाना मूल डिज़ाइन के विपरीत था। डोम से जोधपुरी पत्थर हटा दिए गए, केवल पेंट किया गया। विधानसभा परिसर के पास पूर्व में श्मशान घाट था, जो वास्तु दोष माना जाता है।

राजस्‍थान विधानसभा भवन की कुछ जानकारी

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