राजस्थान में हर दिन केंसर से होती औसतन 175 मौतें,आखिर कौन है जिम्मेदार ?
cancer in Rajasthan: केंसर को लेकर देश,प्रदेश की सरकारें भले ही योजनाओं का राग अलापती हो। इलाज और इंतजामों की बात करती है लेकिन कोटपा एक्ट में कार्रवाई को लेकर अधिकारी आज भी बंगले झांकते है।
वैसे तो छोटे-छोटे हादसों में होने वाली मौतों की सुर्खियां आप टीवी और अखबारों में देख और पढ़ लेते है। लेकिन केंसर से मरने वालों का आंकड़ा ना तो कभी सरकार रखती है ना ही सुर्खियां बनती है।

गुलाबी नगरी जयपुर में आज आयोजित हुई 'तम्बाकू नियंत्रण में नवाचार की आवश्यकता' को लेकर राज्यस्तरीय मीडिया कार्यशाला' में जो मौत के आंकड़े सामने आए है जानकार आप भी हैरत में पड़ जाएंगे।
गांधी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉक्टर रमेश गांधी ने बताया कि राजस्थान में हर दिन केंसर से औसतन 150 से 200 जनों की मौत होती है। यहीं आंकड़ों हर महीने 6 हजार तक भी पहुंच जाता है। साथ ही अगर सालभर की बात करे तो करीब 72 हजार के करीब मौत का आंकड़ा पहुंच जाता है। लेकिन इस मौत के आंकड़ों पर ना तो टीवी चैनल पर सुर्खियां बनती है ना ही समाचार पत्रों में।
राजस्थान न्यूज: केंसर से यहां होती है रोज 175 मौतें, जिम्मेदारी किसकी ? pic.twitter.com/m1bNGOY7Ny
— PURSHOTTAM KUMAR (@pkjoshinews) January 28, 2024
केंसर एक ऐसा विषय है जिस पर बात करने के लिए परिवार के लोग भी तैयार नहीं होते है। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों ने इस पर कानून तो बनाया है। लेकिन अभी इस पर जमीनी स्तर पर अमल नहीं हो पाया है।
हालांकि एक रोचक बात है कि भारत में कोटपा एक्ट में कार्रवाई करने के मामले में राजस्थान नम्बर वन है। लेकिन जरूरत है कि लाइसेंसिंग व्यवस्था शुरू हो।
तंबाकू मुक्त राजस्थान अभियान के समन्वयक राजन चौधरी ने कहा है कि वर्तमान में राजस्थान सरकार को तम्बाकू उत्पादों से वार्षिक टैक्स के रूप में 400 से 500 करोड़ रुपए मिल रहे हैं, जो तम्बाकू विक्रेताओं को लाइसेंस देने के बाद बढ़कर 14 हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष हो सकेगा।
मीडिया कार्यशाला में उन्होंने कहा कि तम्बाकू विक्रेताओं के लिए शराब विक्रेताओं की तरह एक लाइसेंसिंग सिस्टम होना चाहिए। शराब से राज्य सरकार को वार्षिक 17 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो रहा है। जबकि तम्बाकू उत्पादों से सरकार को केवल 400 से 500 करोड़ रुपए का राजस्व प्रतिवर्ष प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में तम्बाकू उत्पादों की अधिकतम बिक्री कालाबाजारी के माध्यम से हो रही है। राजस्थान में तम्बाकू उत्पादों की बिक्री लगभग 50 हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष है और सरकार 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ 14 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त कर सकती है।
इस अभियान के समन्वयक राजन चौधरी ने बताया कि वर्ष 2009 में राजस्थान म्युनिसिपालिटी एक्ट में विक्रेता लाइसेंसिंग के लिए कानून और नियम है। विक्रेता लाइसेंसिंग सीकर में शुरू हो चुका है जबकि नागौर, झुंझुनू और अलवर में इस पर कार्रवाई हो रही है।
तंबाकू विक्रेताओं के लिए जयपुर ग्रेटर नगर निगम और जयपुर हेरिटेज नगर निगम द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। तम्बाकू विक्रेता लाइसेंसिंग से स्थानीय निकायों को राजस्व मिलेगा। नगर निकाय की सीमाओं में तम्बाकू विक्रेताओं की मैपिंग हो सकेगी।
सीमित तम्बाकू दुकानों के कारण तम्बाकू उत्पादों का कचरा कम उत्पन्न होगा। युवाओं को तम्बाकू उत्पादों की पहुँच से दूरी बढ़ेगी और कोटपा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की सुनिश्चिता हो सकेगी। उन्होंने कहा कि हाड़ोती और जयपुर के पान विक्रेता संघ चाहते हैं कि सरकार तम्बाकू विक्रेता लाइसेंसिंग शुरू करे।
राजस्थान कैंसर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने 'तम्बाकू मुक्त पीढ़ी' पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि तम्बाकू विक्रेता लाइसेंसिंग द्वारा जनवरी 2011 में जन्मे बच्चों को वर्ष 2029 तक तम्बाकू मुक्त पीढ़ी बनाई जा सकती है। वर्तमान में किशोरों के लिए तम्बाकू आसानी से उपलब्ध है। राजस्थान में तम्बाकू के आसान उपलब्धता की वजह से प्रतिदिन 300 किशोर तम्बाकू उपभोग करना शुरू कर रहे हैं।
जबकि विक्रेता लाइसेंसिंग के कारण तम्बाकू उत्पाद बेचने की सीमित दुकानें होंगी। बच्चों की पहुंच आसानी से नहीं होगी और विक्रेता भी बच्चों को तम्बाकू उत्पाद नहीं बेच सकेंगे।
राजतोफा के अध्यक्ष डॉ. रमेश गांधी ने तम्बाकू उत्पादों के सरोगेट विज्ञापनों पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आजकल सेलेब्रिटीज मीठी सुपारी, पान मसाला इत्यादि के रूप में इन तम्बाकू उत्पादों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और उनके प्रशंसक तम्बाकू का उपभोग करने की आदत में पड़ जाते हैं।
उन्होंने सभी मीडिया से निरंतर तम्बाकू का विरोध करने वाली मजबूत कहानियाँ प्रकाशित करने की अपील की है क्योंकि इससे तम्बाकू का उपभोग कम हो सकेगा।
एसआरकेपीएस के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक भूपेश दीक्षित ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के अंत में कार्यक्रम अधिकारी राहुल कुमार ने पधारे हुए सभी मीडिया प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।












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