गीतकार गुलजार ने 17वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन पाकिस्तान को लेकर कही यह बड़ी बात
Jaipur Literature Festival 2024: राजधानी जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित हो रहे पांच दिवसीय 17वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 का आज दूसरा दिन भी श्रोताओं से गुलजार रहा।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन आज गीतकार गुलजार ने अपने जीवन के अहम पहलुओं पर चर्चा की और यहां तक बोले कि पाकिस्तान मुझे अपने बगल वाले कमरे की दीवार जैसा लगता है।

पिंकसिटी में चल रहे 17वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन भी होटल क्लार्क आमेर में देश,दुनियां के कई साहित्यकार,गीतकार,कवि, लेखक, छात्र, युवा और करीब 150 वक्ताओं ने शिरकत की।
आज दूसरे दिन करीब 40 अलग अलग सत्रों का आयोजन हुआ इन सत्रों में 150 वक्ताओं ने अपने अनुभव शेयर किए। आज दूसरे दिन भी गीतकार गुलजार ने अपनी गजलों,नज्मों से फेस्टिवल को गुलजार कर दिया।
महान गीतकार गुलजार ने आज अपने जीवन के कुछ अहम पहलुओं पर खुलकर चर्चा की। साथ ही उन्होंने अपने जीवन पर लिखी किताब के बारे में भी तफ्सील से बात की।
17वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 के दूसरे दिन अपने जीवन पर लिखी किताब के विषय में चर्चा करते हुए गुलजार भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि 9 से 10 साल की उम्र में किसी भी बच्चे से देश की स्थिति या हालात के विषय में जानकारी होना संभव नहीं है। लेकिन इस उम्र में अगर आपने अपनी आंखों से कुछ देखा हो तो उसे भूल पाना भी संभव नहीं है।
गुलजार ने अपने बचपन के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से मोहल्ले को जलते देखा है। जलते हुए मोहल्लों में लोगों को शोला बनते देखा है।
उन्होंने कहा कि जलने के बाद निकलने वाली बदबू आज भी जेहन में बसी हुई है। वो अब तक निकल नहीं पा रही है। गुलजार ने याद करते हुए कहा कि पाकिस्तान मेरे लिए इतना पास है कि वह मेरे लिए मेरे घर के बगल की दीवार जैसा है। मेरे घर के बगल वाले कमरे की खिड़की है।












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