'मैं पापा की तरह सैनिक बनूंगी, दुश्मन को खत्म करूंगी', शहीद की 8 साल की बेटी का PAK को खुला चैलेंज
Jhunjhunu Shaheed Surendra Kumar Moga: भारत-पाकिस्तान सीमा पर आरएस पुरा सेक्टर में हुई गोलीबारी में राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मंडावा गांव के सार्जेंट सुरेंद्र मोगा शहीद हो गए। लेकिन भारत ने सिर्फ एक सैनिक नहीं खोया - उसने एक बेटी की कसम और एक संकल्पित योद्धा को जन्म दे दिया है।
शहीद की बेटी वर्तिका का ऐलान - अब मैं दुश्मनों को एक-एक कर खत्म करूंगी
सुरेंद्र मोगा की बेटी वर्तिका ने कहा, 'मुझे गर्व है कि मेरे पापा देश के लिए शहीद हुए। अब मैं आर्मी में जाऊंगी और उनकी मौत का बदला लूंगी। मैं एक-एक करके पाकिस्तान के उन कायरों को खत्म कर दूंगी।' ये वो शब्द हैं जो हर भारतीय के दिल में आग लगा दें। और पाकिस्तान को ये याद दिला दें कि भारत सिर्फ जवानों से नहीं, बेटियों के जज़्बे से भी जंग जीतता है।

कौन थे शहीद सुरेंद्र मोगा?
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मेहरादासी गांव के रहने वाले सार्जेंट सुरेंद्र मोगा, भारतीय सेना के मेडिकल असिस्टेंट पद पर तैनात थे। 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद जब भारत ने 6-7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, तो पाकिस्तान ने जवाबी हमले में मोगा को निशाना बनाया।
सुरेंद्र मोगा अपने बूढ़े माता-पिता के इकलौते बेटे थे। परिवार इस सदमे से टूट चुका है, खासकर उनकी मां को अभी तक बेटे की शहादत की खबर तक नहीं दी गई है। गांव में मातम है, लेकिन हर आंख नम होने के साथ-साथ गर्व से भी भरी है।
15 दिन पहले ही मिले थे परिवार से, अब तिरंगे में लिपटकर लौटे
सिर्फ 15 अप्रैल को वे छुट्टियों पर गांव आए थे। नए घर में गृह प्रवेश किया था। गांव के बच्चों को सेना भर्ती की ट्रेनिंग देते थे। लेकिन किसे पता था कि ये मुलाकात आखिरी होगी? उनके पीछे 8 साल की बेटी वर्तिका और 5 साल का बेटा रह गया है। लेकिन वर्तिका ने जो शब्द कहे, वो अब पूरे देश के बच्चों के लिए प्रेरणा हैं।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, पूरे झुंझुनूं ने दी सलामी
शहीद सुरेंद्र मोगा का अंतिम संस्कार मंडावा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। अंतिम विदाई में राजस्थान सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व सैनिक और हज़ारों ग्रामीण शामिल हुए। हर नारा गूंज रहा था - 'जब तक सूरज चांद रहेगा, सुरेंद्र तेरा नाम रहेगा!'
भारत ने एक जवान खोया है, लेकिन हज़ारों वर्तिका जैसे निडर इरादे जीत लिए हैं। पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए - अब जवाब गोलियों से ही नहीं, बेटियों की कसम से भी मिलेगा।












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