मां-बाप ने सिलाई करके पढ़ाया, 2 बेटे बिना कोचिंग के एक साथ बने IPS, एक की 423वीं रैंक, दूसरे की 424वीं
झुंझुनूं। राजस्थान के झुंझुनूं जिला मुख्यालय के गुढ़ा मोड़ पर एक छोटी सी दुकान में वर्षों से कपड़ों की सिलाई करने वाले सुभाष कुमावत टेलर होने के साथ-साथ अब दो अफसर बेटों के पिता भी हैं। इनके दो बेटे एक साथ आईपीएस बने हैं।

दो भाइयों की सक्सेस स्टोरी
टेलर सुभाष कुमावत के इन दोनों काबिल बेटों की जिंदगी संघर्ष, मेहनत और कामयाबी की मिसाल है। इन्होंने एक जैसी आर्थिक दिक्कतों का सामना किया। फिर दोनों ने जमकर मेहनत की। अब इत्तेफाक तो देखिए दोनों ही भाइयों ने दो-दो बार यूपीएससी परीक्षा पास कर डाली और दूसरी बार में इन्हें रैंक भी 423वीं व 424वीं मिली है।

कौन हैं राजस्थान के ये आईपीएस भाई
झुंझुनूं में जाट बोर्डिंग के पास की कॉलोनी के रहने वाले सुभाष कुमावत और राजेश्वरी देवी ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में बताया कि ये दोनों वो खुशनसीब मां-बाप हैं, जिनके बड़े बेटे पंकज कुमावत और उससे छोटे बेटे अमित कुमावत ने इनकी झोली एक साथ खुशियों से भर दी। तीसरा सबसे छोटा संजय कुमावत डॉक्टर बनने में सफल हुआ है।

आईपीएस पंकज कुमावत की जीवनी
पंकज कुमावत महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र के धुले जिले में एएसपी के पद पर कार्यरत हैं। 22 दिसम्बर 1992 को झुंझुनूं में जन्मे पंकज कुमावत की इसी साल जुलाई में जोधपुर की लांची प्रजापत से सगाई हुई है। लांची ने एलएलएम की डिग्री प्राप्त कर रखी है।

आईपीएस अमित कुमावत की जीवनी
झुंझुनूं में 4 नवंबर 1993 को जन्मे अमित कुमावत भी बड़े भाई आईपीएस पंकज कुमावत के नक्शे कदम पर चल रहे हैं। वर्ष 2018 में यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद अमित को आईआरटीएस (इंडियन रेलवे यातायात सर्विस) कैडर मिला था, मगर वर्ष 2019 में फिर यूपीएससी परीक्षा क्रैक करके अमित भी आईपीएस बन गए। अब आईपीएस की ट्रेनिंग पर जाने वाले हैं। अमित अभी अविवाहित हैं।

आईपीएस कुमावत भाइयों की शिक्षा
आईपीएस पंकज कुमाव व उनके भाई अमित कुमावत की शुरुआती शिक्षा झुंझुनूं में जिला मुख्यालय पर जाट बोर्डिंग के पास स्थित भारती विद्या विहार स्कूल से हुई। यहां दसवीं तक पढ़े। फिर झुंझुनूं अकेडमी से 12वीं पास की और आगे की पढ़ाई दिल्ली आईआईटी से की।

आईपीएस पंकज कुमावत ने जॉब छोड़कर की तैयारी
दिल्ली से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद पंकज ने एक निजी कम्पनी में नोएडा में एनालिटिक्स के पद पर दो साल तक जॉब किया। फिर करीब दस लाख का सालाना पैकेज छोड़कर पंकज ने अपने भाई अमित के साथ मिलकर यूपीएससी की तैयारी करने ठानी। दोनों भाइयों ने दिल्ली में रहकर एक साथ तैयारी की।

आईपीएस भाइयों की रैंक
झुंझुनूं के साधारण दर्जी परिवार के इन बेटों को दूसरे प्रयास में सफलता मिली। इन्होंने लगातार दो बार यूपीएससी परीक्षा करके दिखा दिया। वो भी बिना किसी कोचिंग के। वर्ष 2018 में पंकज को 443वीं और अमित को 600वीं रैंक मिली। ऐसे में पंकज को आईपीएस और अमित को आईआरटीएस कैडर मिला। दोनों ने फिर मेहनत की। वर्ष 2019 में अमित को 423वीं व पंकज को 424वीं रैेंक मिली। इस बार दोनों को आईपीएस कैडर मिला। पंकज पहले से ही आईपीएस थे जबकि अब अमित भी आईपीएस बन गए।

मां भी किया करती थीं सिलाई
आईपीएस पंकज बताते हैं कि उनकी कामयाबी में माता-पिता दोनों का योगदान है। पिता सुभाष कुमावत टेलर का काम करते थे। ज्यादा कमाई नहीं होती थी। बेटों को अच्छी शिक्षा मिला। इसलिए मां राजेश्वरी देवी भी घर पर सिलाई का काम किया करती थीं। इसके लिए अलावा वे महिलाओं की ओढनी के गोटा-तारे लगाने का भी काम करती थीं।












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