देश का पहला गो मंदिर : चित्तौड़गढ़ में 20 अनाथ बछड़ों को जीवनदान देने वाली गाय की याद में मंदिर-अस्पताल
चित्तौड़गढ़, 4 सितम्बर। देश में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बहस के बीच राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से अनूठी खबर सामने आई है। यहां पर गो मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। दावा है कि चित्तौड़गढ़ में बनने वाला गो मंदिर भारत का पहला गो मंदिर होगा। मंदिर के साथ ही यहां गायों के लिए खास अस्पताल भी बनाया जा रहा है।
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गाय करुणा की पिछले साल मौत
बता दें कि राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के भादसोड़ा में संचालित श्रीकृष्ण आदिनाथ गोशाला में निर्माणाधीन गो मंदिर उस गाय को समर्पित है, जिसने यहां करीब दो साल में 20 अनाथ बछड़ों को दूध पिलाकर उन्हें जीवनदान दिया। उस गाय का नाम करुणा था। उसकी पिछले साल मौत हो चुकी है।

किशनगढ़ से बनवा रहे गो मंदिर की मूर्ति
गाय की स्मृति में गोशाला कमेटी की ओर से 8 लाख खर्च करके यह गो मंदिर बनाया जा रहा है। फिलहाल इसका निर्माण जारी है। आगामी सात माह में निर्माण पूर्ण होने का लक्ष्य है। इस करुणा गोसमाधि मंदिर नाम दिया गया है। इसमें श्रीकृष्ण व गाय की मूर्ति भी होगी, जिसे अजमेर जिले के किशनगढ़ में मार्बल कारीगर तैयार कर रहे हैं।

2009 से संचालित है गोशाला
मीडिया से बातचीत में गोशाला कमेटी के अध्यक्ष विशाल भदानिया कहते हैं कि साल 2009 से संचालित इस गोशाला में आस-पास के सौ किमी के दायरे में पाए गए लावारिस, बीमार व जख्मी गोवंश को रखा जाता है। वर्तमान में यहां पर 270 स्वस्थ और 45 बीमार या घायल गोवंश है।
गायों के लिए आईसीयू
गोशाला कमेटी भादविया के अनुसार यूं तो देशभर में गोवंश की कई समाधियां बनी हुई हैं, मगर किसी गाय की याद में यह देश का संभवतया पहला मंदिर है। इसमें मंदिर के साथ-साथ घायल गायों के इलाज के लिए आईसीयू भी बनाया जा रहा है।

भामाशाहों ने की आर्थिक मदद
बता दें कि चित्तौड़गढ़ के भादसोड़ा में 625 वर्गफीट में बनने वाले गो मंदिर के लिए आठ लाख रुपए भामाशाहों ने उपलब्ध करवाए हैं। यहां पर गायों के आईसीयू में सर्जरी व एक्सरे की सुविधा होगी। इसके अलावा मंदिर के बाहर छह स्तंभ वाला वुडन सीमेंटेड गार्डन भी बनाया जाएगा। प्रत्येक स्तंभ पर भामाशाह का नाम लिखवाया जाएगा।

बीमार बछड़े को देखकर रोती थी गाय करुणा
गोशाला कमेटी के पदाधिकारी कहते हैं कि एक गाय का नाम करुणा रखने के पीछे कहानी ये है कि करीब दो साल पहले एक गाय को घायलावस्था में गोशाला में लाया गया था। फिर वह स्वस्थ हो गई। उसने एक बछड़े को जन्म दिया। वह खुद के बछड़े के साथ-साथ अन्य अनाथ बछड़ों को भी दूध पिलाती थी। एक साथ-साथ तीन-चार बछड़े उसका दूध पीते थे। ममतामयी करुणा देखकर उस गाय का नाम करुणा रख दिया गया था। खास बात है कि बीमार बछड़ों को देख गाय करुणा की आंखें भर आती थीं।

छह युवाओं ने शुरू की थी गोशाला
बता दें कि राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के भादसोड़ा में सुरखंड मार्ग पर साल 2009 में छह युवाओं ने प्रतिदिन 10 रुपए की बचत से गोशाला का संचालन शुरू किया था। सवा पांच सौ बीघा में फैली इस गोशाला में बीते जन्माष्टमी पर यहां गोवंश के इलाज के लिए आईसीयू की सुविधा उपलब्ध करवाया जाना तय हुआ। इस आईसीयू में गोवंश के 45 ब्लॉक बनेंगे।












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