RSS ने हमें राष्ट्र के लिए काम करना सिखाया: असम के राज्यपाल नियुक्त होने पर और क्या बोले गुलाब चंद कटारिया

राजस्थान में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने असम के राज्यपाल बनाए जाने के बाद आरएसएस से अपने संबंधों की खूब सराहना की है। उन्होंने कहा है कि संघ ने ही उन्हें राष्ट्र की सेवा करना सिखाया है।

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असम के गवर्नर नियुक्त होने के बाद राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से अपने पुराने रिश्तों पर बात की है और कहा है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी पद की मांग नहीं की। कटारिया को गवर्नर बनाकर राजस्थान भेजा जाना, चुनावी वर्ष में भाजपा की राजनीति के लिए बड़ा दांव माना जा रहा है। जहां इससे एक तरफ पार्टी में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों में एक नाम कम हुआ है तो पार्टी ने प्रदेश के एक दिग्गज और जनाधार वाले नेता को गवर्नर बनाकर चुनावी साल में एक सकारात्मक संकेत देने की भी कोशिश की है।

राजस्थान के मंजे हुए राजनेता हैं गुलाब चंद कटारिया

राजस्थान के मंजे हुए राजनेता हैं गुलाब चंद कटारिया

राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया को असम का राज्यपाल नियुक्त करके केंद्र सरकार ने राज्य में बीजेपी की राजनीति में बड़ा बदलाव कर दिया है। कटारिया को राज्य में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का संभावित उम्मीदवार भी माना जा रहा था, लेकिन मोदी सरकार के फैसले से यह सारी अटकलें खत्म कर दी गई हैं। भाजपा के दिग्गज नेता 78 वर्षीय कटारिया 8 बार के एमएलए और राज्य के पूर्व मंत्री हैं। गवर्नर नियुक्त किए जाने के बाद उनका कहना है कि वह इस पद की गरिमा के मुताबिक अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

आरएएस ने हमें राष्ट्र के लिए काम करना सिखाया- कटारिया

आरएएस ने हमें राष्ट्र के लिए काम करना सिखाया- कटारिया

कटारिया उदयपुर से ताल्लुक रखते हैं और राजस्थान के मेवाड़ इलाके में उनका काफी प्रभाव माना जाता है। राज्यपाल के पद पर नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि वह कभी भी किसी पद के पीछे नहीं भागे और सिर्फ बीजेपी में ही ऐसा हो सकता है कि एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता भी सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा, 'मैं खुद को एक कार्यकर्ता मानता हूं। मैं आरएसएस जैसे संगठन से आता हूं, जिसने हमें राष्ट्र के लिए काम करना सिखाया है।' उनके मुताबिक उन्हें अपनी नियुक्ति के बारे में तबतक जानकारी नहीं थी, जबतक मीडिया और पार्टी के नेताओं ने सुबह में उन्हें फोन करना नहीं शुरू किया।

1977 में पहली बार एमएलए बने थे कटारिया

1977 में पहली बार एमएलए बने थे कटारिया

असम के नवनियुक्त राज्यपाल ने कहा कि दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कॉल किया था और सामान्य तरह से पूछा था कि उनका काम कैसा चल रहा है, लेकिन इस नई जिम्मेदारी के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई थी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'मुझे इसके बारे तब पता चला जब मीडिया और पार्टी नेताओं ने सुबह में मुझे कॉल करना शुरू किया।' वो बोले कि उन्होंने समर्पित होकर सभी जिम्मेदारियों को निभाया है और आगे भी निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा है, 'पद की गरिमा के अनुरूप जो भी आवश्यकता होगी, मैं करूंगा।' कटारिया पहली बार 1977 में विधायक चुने गए थे और फिर 1980 में भी उन्हें जीत मिली थी। 1993 के बाद से वह विधानसभा का हर चुनाव जीते हैं।

'मुझे जो भी मिला, वह पार्टी की ओर से दिया गया'

'मुझे जो भी मिला, वह पार्टी की ओर से दिया गया'

कटारिया ने संघ जैसे संगठन में काम करने का महत्त्व समझाते हुए कहा कि, 'मैं एक आरएसएस कार्यकर्ता था। आपातकाल के दौरान मैं जेल में था। बाद में पार्टी ने मुझे चुनावों में उतारा। मैंने किसी भी पद की मांग नहीं की और मुझे जो भी मिला, वह पार्टी की ओर से दिया गया।' राजस्थान विधानसभा चुनाव इसी साल के अंत में होना है, जहां के मतदाता पिछले कुछ चुनावों से भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता को बदलते आ रहे हैं। ऐसे में कटारिया को जयपुर से गुवाहाटी भेजकर भाजपा नेतृत्व ने पार्टी के सीएम उम्मीदवार के दावेदारों की संख्या कम कर दी है।

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    जैसे ही कटारिया के असम के गवर्नर नियुक्त होने की जानकारी सामने आई पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, विधानसभा में विपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौर और अन्य नेता और कार्यकर्ता जयपुर में उनके आवास पर पहुंने शुरू हो गए और उन्हें नई भूमिका के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, 'कटारिया का असम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पूरे राजस्थान के लिए सम्मान की बात है....इन्होंने मेवाड़ में बीजेपी को मजबूत किया है।' उधर राजे ने ट्वीट किया, 'भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया को असम के राज्यपाल नियुक्त होने पर हार्दिक शुभकामनाएं। ' 'आपका ऊर्जावान और प्रभावी व्यक्तित्व और राजनीतिक अनुभव असम के विकास में एक नया अध्याय लिखेगा।' (इनपुट- पीटीआई)

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