Ghazi Fakir : नहीं रहे वो मुस्लिम धर्मगुरु जो भारत-पाक सीमा इलाके में खुद की कोर्ट लगाकर सुनाते थे फैसले
जैसलमेर, 27 अप्रैल। राजस्थान की राजनीति में लंबे अर्से से दखल रखने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता व मुस्लिम धर्मगुरु गाजी फकीर इस जहां से रुखसत हो गए हैं। 84 वर्षीय गाजी फकीर ने मंगलवार सुबह जोधपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे काफी समय से बीमार चल रहे थे। सुबह 11 बजे राजस्थान के जैसलमेर जिले में पैतृक गांव झाबरा में उनके पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है। गाजी फकीर के निधन से जैसलमेर-बाड़मेर जिले में शोक की लहर दौड़ दिया। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

भारत के साथ पाकिस्तान में भी थी गाजी की पहचान
बता दें भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित जैसलमेर के गाजी फकीर की पहचान भारत के साथ-साथ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी थी। वे पाकिस्तान में मस्लिम समाज के बड़े धर्मगुरु पीर पगारों के नुमाइंदे थे। कुछ साल पहले जैसलमेर के तत्कालीन एसपी पंकज चौधरी ने गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट दुबारा खोल दी थी, जो काफी चर्चित मामला रहा। 48 घंटे में ही एसपी के तबादले का ऑर्डर आ गया था।

गाजी फकीर का परिवार राजनीति में सक्रिय
बता दें कि गाजी फकीर के 6 बेटे हैं। राजस्थान में चाहे भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस। गाजी फकीर के परिवार का राजस्थान की सियासत में खास दबदबा रहता है। गाजी फकीर के भाई फतेह मोहम्मद, बेटे सालेह मोहम्मद व अब्दुला फकीर जैसलमेर के जिला प्रमुख रह चुके हैं। साथ ही एक बेटा अमरुद्दीन प्रधान हैं। बेटा सालेह मोहम्मद इस समय राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में मंत्री हैं।

गाजी फकीर के इशारे पर पड़ते थे वोट
कहते हैं कि सीमावर्ती जिले जैसलमेर-बाड़मेर की राजनीति में गाजी फकीर का कद काफी बड़ा है। मुस्लिम समाज के वोट गाजी फकीर के इशारे पर ही पड़ते हैं। कभी गाजी फकीर का अलग से सामाजिक न्यायालय चलता था। मुस्लिम समाज के बीच होने वाले विभिन्न प्रकार के मसलों को सुलझाने के लिए वे बाकायदा अपना कोर्ट लगा कर फैसला देते थे। उनके फैसले को समाज के लोग सहर्ष स्वीकार करते रहे हैं।












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