Rajasthan News: एक भगवान ऐसा जिसे हर कोई बनाता है अपना बिजनेस पार्टनर...जानिए क्या है पूरा मामला
Rajasthan News: प्रदेश में चित्तौड़गढ़ के मंडफिया में स्थित भगवान श्रीसांवलियाजी सेठ के मंदिर में एक किसान से लेकर बड़े बिजनेसमैन तक भगवान श्रीसांवलियाजी सेठ को अपना बिजनेस पार्टनर बनाते है। यहां तक की अपने व्यवसाय में भगवान की 2 फीसदी से लेकर 20 या इससे अधिक हिस्सेदारी देता है।
देश मे एक ऐसी जगह है जहां भक्त भगवान को बिजनस पार्टनर बनाते है और ईमानदारी से बिजनस प्रॉफिट का भगवान का शेयर मंदिर में चढ़ा कर जाते है।

आज हम बात कर रहे है चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर स्थित मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कृष्णधाम के रूप में पहचान रखने वाले श्रीसांवलियाजी सेठ के मंदिर की।
चित्तौड़गढ़ के मंडफिया में स्थित भगवान श्रीसांवलियाजी सेठ के मंदिर का आध्यात्म की दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। सांवलिया सेठ मंदिर में चढ़ावे के रूप में भंडारगृह में हर बार की तरह इस महीने भी जमकर धन वर्षा हुई है, जिसमें भंडारे से 12 करोड़ 80 लाख रुपए से ज्यादा की नगदी प्राप्त हुई।
सांवलियासेठ के मंदिर में भक्तों की ओर से इस महीने भगवान श्रीसांवलिया सेठ को चढ़ाई राशि की गणना की जा रही है। श्रीसांवलिया सेठ के भंडारे से प्राप्त राशि में से अब तक 12 करोड़ 80 लाख 15 हजार रुपए की गणना कर ली गई है।
भंडारा खुलने से लेकर अब तक तीन चरणों की गणना हुई है, जिसमें ये राशि निकल कर सामने आई है. क्रमबद्ध तरीके से विभिन्न चरणों मे जारी नोटों की गणना प्रक्रिया जल्द ही पूरी होगी, जिसमें शेष बची राशी की गणना के अलावा मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुए सोना-चांदी का वजन भी किया जाएगा।
मंदिर मंडल कमेटी के अनुसार, प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को सांवलियाजी मंदिर का भंडार खोला जाता है और कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर कमेटी, प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में दानपात्र से मिलने वाली राशि की गणना की जाती है।
मंदिर कमेटी के अनुसार, चढ़ावे के रूप में प्राप्त करोडों रुपए की राशि चिकित्सा, शिक्षा, विकास और सामाजिक सरोकार के लिए खर्च की जाती है. वहीं मंदिर के विकास, मूलभूत सुविधाओं और आसपास के गांवों के विकास के लिए भी ये राशि खर्च होती है।
जानकारी के अनुसार, करीब 450 साल पहले मेवाड़ राजपरिवार की ओर से सांवलियाजी मंदिर का निर्माण करवाया गया था। धीरे-धीरे समय के साथ मंदिर के विकास कार्य होते गए जो अब भी निरंतर जारी है।
विशाल क्षेत्रफल में फैला सांवलियाजी मंदिर अब देश ही नहीं, बल्कि विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के आस्था का विशेष केंद्र बन चुका है। यहां प्रत्येक महीने की अमावस्या से एक दिन पहले मंदिर के भंडार खोले जाते है और भंडारे में प्राप्त नगदी, सोना-चांदी की गणना शुरू कर दी जाती है।
अगले ही दिन से श्रीसांवलियाजी सेठ के दो दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जिसमें भारतवर्ष से बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण श्री सांवलियासेठ का आशीर्वाद लेने आते है।
एक अनुमानित आंकड़े के अनुसार, हर साल करीब एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु श्रीसाँवलियासेठ के दर्शन करने चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी मंदिर आते है। भक्ति और श्रद्धा की डोर से श्रद्धालु भगवान श्रीसांवलियासेठ से जुड़ते ही है।
एक ऐसी मान्यता भी है कि भक्त की ओर से श्री सांवलिया जी सेठ के चरणों में समर्पित धन भगवान की कृपा से वापस भक्त को उसके बिजनेस में कई गुना रिटर्न के रूप में वापस मिल जाता है।
ऐसे में खेती करने वाले एक किसान से लेकर बड़े बिजनेसमैन तक भगवान श्रीसांवलियाजी सेठ को अपना बिजनेस पार्टनर बनाते है और अपने व्यवसाय में भगवान की 2 फीसदी से लेकर 20 या इससे अधिक हिस्सेदारी तय कर लेते है।
माना जाता है कि श्रीसांवलिया सेठ की बिजनस पार्टनर के रूप में अपने भक्त पर असीम कृपा बरसाती है और भक्त को बिजनस में तगड़ा मुनाफा भी होता है. इसी मान्यता के चलते हर महीने देश के कौने-कौने श्रद्धालु बिजनस पार्टनर के रूप में श्रीसांवलियाजी मंदिर आकर ठाकुरजी के हिस्से का शेयर चढ़ावे के रूप में भंडारे में चढ़ाते है।
देश ही नहीं अलबत्ता अलग-अलग देशों से एनआरआई श्रद्धालु भी श्रीसांवलियासेठ के बिजनेस पार्टनर के रूप में जुड़े है। जो हर महीने यहां आकर भंडारे में डॉलर, पोंड, रियाल, दीनार आदि के रूप में विदेशी मुद्रा चढ़ाकर जाते है।
प्रत्येक महीने भंडारे से प्राप्त राशि की गणना के दौरान भारतीय मुद्रा के अलावा अलग-अलग देश की करेंसी भी निकलती है, जिसकी अलग से गणना होती है।
मन्नत के अनुरूप मकान, गाड़ी या किसी विशेष वस्तु प्राप्त होने पर श्रद्धालु उसी स्वरूप की चांदी-सोने की वस्तु चढ़ा कर जाते है। यही कारण है कि आए दिन श्रद्धालुगण सांवलियाजी मंदिर में कभी चांदी का मकान, तो चांदी का स्कूटर, चांदी का बल्ला, चांदी का पेट्रोलपंप सहित कीमती धातुओं की बनी अलग अलग वस्तुए चढ़ाकर जाते है।
श्रद्धा भक्ति के अलावा भक्त और भगवान के बीच जुड़ा ये बिजनस रिलेशन वाइक में इतना अनोखा है कि जिस किसी को इसकी जानकारी होती है, वो आश्चर्यचकित हुए बिना नही रह पाता है।
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