Rajasthan Budget: पूर्व सीएम गहलोत से लेकर पायलट और डोटासरा ने यूं किया पलटवार, जानिए

Rajasthan Budget 2024: राजस्थान में भजनलाल सरकार की वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बजट पेश कर प्रदेश के विकास में चार चांद लगाने के दावे कर सौगातों का पिटारा खोल दिया। लेकिन विपक्ष ने इस बजट को सियासी मुद्दा बना लिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भाजपा सरकार के बजट पर जमकर पलटवार किया है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व उपमुख्यमंत्री और टोंक विधायक सचिन पायलट ने प्रदेश की भाजपा सरकार के पहले पूर्ण बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जनता को सरकार से उम्मीद थी कि प्रदेश में लगातार बढ़ रही महंगाई और बेरोजगारी को कम करने के लिए बजट में कोई ठोस कदम उठाये जायेंगे परन्तु पेश किए बजट से प्रदेश की जनता को विशेषकर मध्यम वर्ग, किसान, युवाओं को निराशा ही हाथ लगी है।

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उन्होंने कहा कि हरियाणा के बाद देश में सबसे अधिक बेरोजगारी दर वाले राजस्थान की बेरोजगारी दर को कम करने का सरकार द्वारा बजट में कोई रोड़मैप प्रस्तुत नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार को बेरोजगारी को कम करने के लिए अगले पांच सालों में 4 लाख भर्तियां करने का संकल्प मात्र लेने के स्थान पर इसके लिए ठोस कार्य योजना प्रस्तुत करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी भत्ते पर बजट में चुप्पी साध ली गई है जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई को कम करने के लिए भी बजट में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई को कम के लिए कोई काम नहीं किया गया है। केन्द्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद पेट्रोल, डीजल, केरोसीन के दामों को कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

पायलट ने ईआरसीपी की लेकर भी प्रदेश सरकार को तीखा पलटवार करते हुए कहा प्रथम फेज के कार्य आदेश क्या भारत सरकार द्वारा दोनों राज्यों की सहमति और राष्ट्रीय परियोजना घोषित हुए बिना तथा केंद्र से 90 प्रतिशत फंडिंग के बिना कर दिए।

केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि का बजट भाषण में कोई उल्लेख नहीं है और न ही यह उल्लेख है कि ईआरसीपी और यमुना परियोजना के लिए केंद्र सरकार से इस वर्ष क्या सहयोग मिलेगा।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने मिशन 2030 के तहत राजस्थान को नंबर 1 बनाने का लक्ष्य रखा था। मुझे आशा थी कि हमारी सरकार जाने के बाद भाजपा सरकार कम से कम राजस्थान की बेहतरी के लिए इस मिशन को ध्यान में रखकर काम करेगी और विकास की बेहतरीन योजनाएं लाएगी। राजस्थान सरकार द्वारा लाए गए बजट का शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं लगता है।

पिछले 10 साल से जैसा केन्द्र सरकार का बजट नीरस एवं दिशाहीन होता है वैसे ही राजस्थान सरकार का बजट भी नीरस और दिशाहीन आया है।

पूर्व सीएम गहलोत ने मोदी की गारंटी पर चुटकी लेते हुए कहा कि उनके अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बल्कि हमारी सरकार की महंगाई से राहत देने वाली योजनाओं जैसे 100 यूनिट फ्री बिजली, अन्नपूर्णा राशन किट, इन्दिरा रसोई, फ्री कृषि बिजली आदि के लिए कोई बजट आंवटन नहीं किया है यानी आने वाले दिनों में जनता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा

बजट के दिन ही रोडवेज एसी बसों का किराया 10 पैसे प्रति किलोमीटर बढ़ाकर सरकार ने अपना उद्देश्य जाहिर कर दिया है।

यह आश्चर्य की बात है कि 25 लाख रुपये राशि वाली चिरंजीवी बीमा योजना की जगह पर यह सरकार 5 लाख रुपये राशि की आयुष्मान भारत योजना को लागू करना चाहती है। चिरंजीवी योजना में राजस्थान का प्रत्येक परिवार कवर था पर आयुष्मान भारत में प्रदेश की 50% आबादी भी शामिल नहीं होगी। चिरंजीवी योजना में बड़ी संख्या में अस्पताल शामिल थे पर आयुष्मान योजना में अस्पतालों की संख्या बेहद कम है।

OPS को लेकर भी सरकार की कोई राय बजट में नहीं आई है। केन्द्रीय वित्त मंत्री लगातार OPS का विरोध करती रही हैं परन्तु राज्य की वित्त मंत्री ने OPS पर कोई राय नहीं रखी जिससे राज्य के कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति है। सरकार को OPS पर अपनी राय स्पष्ट करनी चाहिए।

राजस्थान कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बजट को लेकर कहा कि इसमें सिर्फ किलों और महलों की बातें हुई है।

गांव, गरीब, ग्रामीण, किसान की कोई बात नहीं हुई। राजस्थान की भाजपा सरकार का बजट पूर्णतया दिशाहीन है। बजट भाषण थोथी घोषणाओं, झूठे तथ्यों एवं हताशा से भरा हुआ था।

बजट में किसानों, महिलाओं, युवाओं, नौकरीपेशा एवं मध्यमवर्ग के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की भी उपेक्षा की गई। भाजपा सरकार बजट में वो सारे वादे भूल गई जिनकी घोषणा उन्होंने अपने संकल्प पत्र में की थी। इस बजट की धरातल पर क्रियान्विति भी दूर-दूर तक नज़र आना मुश्किल है।

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