Sachin Pilot: लोकसभा चुनाव 2024 में सचिन पायलट की प्रतिष्ठा टोंक की बजाय दूसरी जगह लगी है दांव पर?
Sachin Pilot Lok Sabha Election 2024: आम चुनाव 2024 में राजस्थान की 25 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार ही नहीं बल्कि कांग्रेस के सचिन पायलट जैसे दिग्गज नेताओं की साख भी दांव पर लगी हुई है।
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम रहे सचिन पायलट अभी टोंक से विधायक हैं। टोंक-सवाईमाधोपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस ने पूर्व IPS हरीश चंद्र मीना को उम्मीदवार घोषित कर रखा है।

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राजस्थान में 2024 भारतीय आम चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट की प्रतिष्ठा टोंक की बजाय दौसा में दांव पर लगी है। दौसा सचिन पायलट को विरासत में मिली सीट है। यहां सचिन पायलट के समर्थक भी बड़ी संख्या में हैं।
सचिन पायलट के माता-पिता भी बने थे दौसा एमपी
दरअसल, दौसा सीट से सचिन पायलट ही नहीं बल्कि उनके पिता राजेश पायलट व माता रमा पायलट भी सांसद रहे हैं। साल 1991 से 1999 पिता राजेश पायलट चार बार दौसा सांसद चुने गए जबकि साल 2000 में रमा पायलट व साल 2004 में सचिन पायलट दौसा सांसद बने।
दौसा सीट को सचिन पायलट का गढ़ माना जाता है। कांग्रेस नेता नरेश मीना समेत राजनीति के कई जानकार कहते हैं कि लोकसभा चुनाव 2024 में दौसा सीट की टिकट सचिन पायलट के हाथ में हैं। वे चाहेंगे उसे ही टिकट मिलेगी। हालांकि यह बात अलग है कि कांग्रेस 2004 के बाद अभी तक दौसा में नहीं जीती है।
दौसा लोकसभा सीट का इतिहास
दौसा संसदीय क्षेत्र से सचिन पायलट परिवार की लगातार जीत पर साल 2009 के चुनाव में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने ब्रेक लगाया था। यहां से निर्दलीय जीतकर सांसद बने। फिर 2014 में भाजपा के हरीश मीना व साल 2019 में भाजपा की जसकोर मीना ने जीत दर्ज की।
लोकसभा चुनाव 2024 में दौसा सीट
दौसा में कांग्रेस के सचिन पायलट की तरह भाजपा के किरोड़ीलाल का भी काफी प्रभाव है। किरोड़ी लाल मीणा सवाईमाधोपुर से विधायक बनकर भजनलाल सरकार में मंत्री बन गए।
लोकसभा चुनाव 2024 में दौसा सीट भाजपा-कांग्रेस दोनों ही अपने प्रत्याशी बदल सकते हैं। कांग्रेस टिकट की दौड़ में मुरारी लाल मीना, नरेश मीना आदि हैं जबकि भाजपा से किरोड़ी लाल मीना अपने भाई जगमोहन मीना व जसकौर मीना अपनी बेटी अर्चना मीना को टिकट दिलाना चाहती है।
राजस्थान में भारतीय आम चुनाव
राजस्थान में साल 2014 और 2019 सभी 25 सीटों भाजपा जीत दर्ज कर रही है। कांग्रेस खाता भी नहीं खोल सकी है। आखिरी बार साल 2009 में 20 सीटें जीती थी। उस समय भाजपा 4 को महज चार सीटें मिली थीं।












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