राजस्थान : ग्रामीण इलाकों में ऑक्सीजन की कमी व बेकार वेंटिलेटर बढ़ा रहे कोरोना मरीजों की परेशानी
सीकर, 17 मई। कोरोना महामारी के कारण राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में भी चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। सीकर जिले में भी हालात अच्छे नहीं हैं। 79 वर्षीय जगदीश प्रसाद मित्तल व मरियम बानो जैसे अनेक मरीज हैं, जो कोविड अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझने को मजबूर हुए हैं।

जगदीश प्रसाद के बेटे मनोज ने अपने पिता की तबीयत बिगड़ने पर 120 किलोमीटर के दायरे वाले अस्पतालों में आईसीयू बेड की उपलब्धता का पता लगाया, मगर निराशा ही हाथ लगी। इधर, नीमकाथाना सीएचसी के कोविड वार्ड में मरियम बानो को अचानक सांस लेने में तकलीफ बढ़ गई। पोता सैयद यूनुस तुरंत ड्यूटी डॉक्टर को बुलाकर लाया। कुछ देर डॉक्टर ने सैयद यूनुस ड्यूटी डॉक्टर के लिए रोता है जो नर्सिंग स्टाफ के साथ उसकी जांच करने के लिए दौड़ता है। लेकिन कुछ क्षण बाद बानो के बिस्तर के चारों ओर एक पर्दा खींचा जाता है। उसे मृत घोषित कर दिया गया है। शनिवार को सीकर में कोविड-19 के 485 मामले सामने आए। एक दिन पहले 674 नए मामले रिकॉर्ड किए गए थे।
14 मई को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करके कहा था कि राजस्थान में दो लाख 11 हजार एक्टिव केस हैं। इस मामले में देशभर में राजस्थान चौथा स्टेट है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को सबसे निचले स्तर तक मजबूत करने की जरूरत है।
नीमकाथाना के कपिल अस्पताल जहां बानो और मित्तल भर्ती थे। यह उपखंड का सबसे बड़ा अस्पताल है। आस-पास के 180 राजस्व गांवों और 59 ग्राम पंचायतों के लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी इसी पर है। कपिल अस्पताल के पीएमओ डॉ. जीएस तंवर कहते हैं कि सप्ताहभर पहले 30 ऑक्सीजन बेड सुविधा उपलब्ध करवाई थी। जल्द ही सारे बेड भर गए। हमें ऑक्सीजन बेड की क्षमता 40 तक बढ़ानी पड़ी है। हमारे पास 16 प्वाइंट ऑक्सीजन प्लांट है।












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